ईरान के बाद मध्य पूर्व में अब अमेरिका और ओमान के बीच रिश्ते बिगड़ते दिख रहे हैं। यह तब हो रहा है जब दोनों देशों के बीच 200 साल के ऐतिहासिक रिश्ते हैं। ओमान हमेशा से अमेरिका का सक्रिय सहयोगी रहा है। ईरान से युद्ध शुरू होने से पहले परमाणु वार्ता में बेहद अहम किरदार निभाया। जंग शुरू हुई तो अमेरिका का करीबी होने की सजा भी भुगतनी पड़ी।
ईरान ने 1 मार्च को ओमान के दुक्म वाणिज्यिक बंदरगाह पर दो ड्रोन से हमला किया। 3 मार्च को एक ईंधन टैंक पर अटैक किया। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओमान को उड़ा देने की धमकी दी। आइये समझते हैं कि ट्रंप को यह धमकी क्यों देनी पड़ी, इसके पीछे क्या वजह है?
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डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को वाशिंगटन में कैबिनेट की बैठक बुलाई। तभी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बारे में ट्रंप ने कहा, इसे कोई काबू नहीं करने वाला है। यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र है। ओमान भी बाकी देशों की तरह व्यवहार करेगा। वरना हमें उन्हें उड़ा देना होगा।
शुरुआत में लोगों को लगा कि ट्रंप ने गलती से ईरान की जगह ओमान बोल दिया है, क्योंकि ट्रंप ऐसी गलती कई बार कर चुके हैं। बाद में अमेरिकी विदेश मंत्रालय के सोशल मीडिया पोस्ट ने साफ कर दिया कि ट्रंप ने ओमान को ही धमकी दी है। अब सवाल उठता है कि ट्रंप ने ओमान को धमकी क्यों दी?
यह है धमकी के पीछे की वजह
ईरान के सरकारी टीवी ने ट्रंप के बयान से पहले दावा किया कि अमेरिका और ईरान एक समझौते के बेहद करीब हैं। इसके तहत ईरान और ओमान मिलकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नियंत्रित करेंगे। यहां से गुजरने वाले जहाजों को 'सेवा शुल्क' देना होगा। अब माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन इसी बात से नाराज है, क्योंकि अमेरिका की पूरी कोशिश कब्जा मुक्त स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है। अगर वहां ईरान और ओमान का नियंत्रण हो जाता है तो वैश्विक स्तर पर यह अमेरिका की बड़ी हार होगी। बुधवार को जब ट्रंप से ईरान और ओमान के नियंत्रण के बारे में पूछा गया तो उन्होंने ओमान को उड़ाने की धमकी दी।
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डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र का हिस्सा है। हालांकि उनका यह तथ्य सही नहीं है। इसका अधिकांश भाग ओमान और ईरान के जलक्षेत्र में पड़ता है। कुछ हिस्सा संयुक्त अरब अमीरात में पड़ता है। हालांकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अंतरराष्ट्रीय स्ट्रेट है। यहां करीब 20 फीसद पेट्रोलियम और गैस का निर्यात होता है।
28 फरवरी के तड़के अमेरिका और इजरायल ने एक साथ ईरान पर बमबारी शुरू की। इसके बाद तेहरान ने स्ट्रेट को बंद कर दिया। हालांकि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में न होने की स्थिति में भी कोई देश प्राकृतिक जलडमरूमध्य पर शुल्क नहीं लगा सकता है। अगर ऐसा किया जाता है तो यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।
