अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका का चुनाव तंत्र खोखला है, मरे हुए लोग वोट डालते हैं, लाखों लोगों के पास अमेरिका की नागरिकता नहीं है, फिर भी वे चुनाव में दखल देते हैं, वोट करते हैं, सिस्टम में धांधली है। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी दावा किया है कि चीन जैसे कुछ देश अमेरिका की चुनाव प्रक्रिया में दखल देते हैं और अपनी बढ़त बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने कई दस्तावेजों और खुफिया रिपोर्ट का जिक्र भी किया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार रात देश को संबोधित करते हुए कहा, 'अमेरिका का चुनाव सिस्टम बहुत कमजोर है। यह सिस्टम हैकिंग और धांधली के लिए खुला पड़ा है। बिना बड़े बदलाव के नवंबर के मिडटर्म चुनाव भी प्रभावित और चोरी हो सकते हैं।'
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डोनाल्ड ट्रंप की चिंता क्या है?
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मौजूदा वोटिंग और मेल-इन वोटिंग सिस्टम बिल्कुल सुरक्षित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया, 'करोड़ों अमेरिकी वोटरों की जानकारी विदेशी सरकारों के हाथ लग गई है। वोट गिनने वाली मशीनें हैक हो सकती हैं। लाखों गैर-नागरिकों और मर चुके लोगों के नाम अभी भी वोटर लिस्ट में हैं।'
क्या बदलाव चाहते हैं डोनाल्ड ट्रंप?
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में वोटर आईडी और नागरिकता प्रमाण की अनिवार्यता की मांग दोहराई। उन्होंने मेल-इन वोटिंग पर सख्ती से रोक लगाने की बात कही। ट्रंप ने 2020 के चुनाव में धांधली के पुराने आरोपों को भी दोहराया और कहा कि सबूतों को दबाया गया।
किस डीप स्टेट से डर गए हैं डोनाल्ड ट्रंप?
डोनाल्ड ट्रंप ने 'डीप स्टेट' पर आरोप लगाया कि खुफिया एजेंसियों ने 2020 में चीन के हस्तक्षेप की जानकारी छिपाई। ये एजेंसियां खुद उनकी सरकार में काम कर रही थीं। अमेरिका में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ डीप स्टेट शब्द का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है।
डीप स्टेट, चुनी हुई सरकारों से अलग होकर नीतियों और फैसलों को प्रभावित करता है। यह शब्द अक्सर FBI, CIA, नौकरशाही, रक्षा-उद्योग, और बड़े कॉरपोरेट हितों के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है।
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अब क्या सोच रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप?
डोनाल्ड ट्रंप के भाषण के बाद व्हाइट हाउस ने एक नई वेबसाइट शुरू की है, जिसमें कुछ पुरानी खुफिया रिपोर्ट्स जारी की गई हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया था कि रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया चुनाव से जुड़ी सिस्टम तक पहुंच सकते हैं, लेकिन इसका कोई ठोस सबूत नहीं मिला कि उन्होंने वोट चोरी की। डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी संसद से 'सेव अमेरिका एक्ट' पास करने की अपील की, हालांकि यह कानून इस साल के चुनाव पर असर नहीं डालेगा।
