अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी को बड़ा झटका लगा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ऐतिहासिक जीत की तरफ अग्रसर है। सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी बुरी तरह से हारती दिख रही है। अब सवाल उठता है कि दोनों सदनों में करारी हार के बाद क्या डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देना पड़ेगा? उनकी ताकत पर इन चुनाव नतीजों का क्या असर पड़ेगा। आइये आसान भाषा में समझते हैं...

 

अमेरिका की संसद को कांग्रेस कहा जाता है। इसके उच्च सदन को सीनेट और निम्न सदन को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स कहते हैं। मिडटर्म चुनाव का संबंध कांग्रेस चुनाव से है। यह चुनाव राष्ट्रपति इलेक्शन से अलग होते हैं। मिडटर्म इलेक्शन के माध्यम से अमेरिका की जनता अपने सांसदों को चुनती हैं। पिछले 8 दशक में 90 फीसद मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति की पार्टी को हाउस में हार का ही सामना करना पड़ा। 

 

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क्या चली जाएगी ट्रंप की कुर्सी?

अमेरिका में हर चार साल में राष्ट्रपति का चुनाव होता है। इस लिहाज से 2029 तक डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल है। मिडटर्म चुनाव में हारने के बावजूद भी ट्रंप की कुर्सी पर कोई खतरा नहीं है, क्योंकि अमेरिका संविधान में ऐसी कोई शर्त नहीं है कि मध्यावधि चुनाव हारने पर राष्ट्रपति को अपना पद छोड़ना पड़े। हालांकि इन चुनाव नतीजों से ट्रंप की ताकत जरूर घटेगी।  

 

2010 में बराक ओबामा जब राष्ट्रपति थे, उस वक्त डेमोक्रेटिक पार्टी को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में हार झेलनी पड़ी। उनसे पहले 2006 में जॉर्ज डब्ल्यू बुश की रिपब्लिकन पार्टी को दोनों सदनों में हार मिली थी। 1994 में बिल क्लिंटन की पार्टी भी कांग्रेस में हार गई थी।

अमेरिकी कांग्रेस का सियासी गणित

सीनेट (उच्च सदन): कुल 100 सीटें हैं यानी अमेरिका के हर राज्य से दो सीनेट सदस्य होते हैं। कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। हर 2 साल में एक-तिहाई सदस्यों का इलेक्शन होता है। सीनेट सदस्यों का चुनाव सीधे जनता करती है। उपराष्ट्रपति इसके अध्यक्ष होते हैं। उनके पास निर्णायक वोट देने का अधिकार होता है। 

 

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (निम्न सदन): यह अमेरिकी संसद का निम्न सदन है। जैसे हमारे यहां लोकसभा होती है। जनसंख्या के अनुपात में हर राज्य को सीटें मिलती हैं। इनके सदस्यों का कार्यकाल सिर्फ 2 वर्ष का होता है। कुल 435 सदस्य हैं। भारत की लोकसभा के तर्ज पर यहां भी स्पीकर होते हैं। सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ही अमेरिका के कानून बनाते हैं। संघीय सरकार की निगरानी करते हैं। बजट खर्च को मंजूरी देनी है या नहीं... यह भी तय करते हैं।

 

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ट्रंप की क्या मुश्किलें बढ़ेंगी?

सीनेट और प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स का कब्जा होने पर कांग्रेस ट्रंप के प्रस्तावित कानूनों पर रोक लगा सकती है। सरकारी खर्च और बजट पास कराने में दिक्कत आएगी। ट्रंप प्रशासन के फैसलों की जांच और अहम नियुक्तियों को रोका जा सकता है। ट्रंप घरेलू सियासत में उलझे रहेंगे। विदेशी नीति पर भी खुलकर मनमर्जी नहीं कर सकेंगे।

महाभियोग एक रास्ता

सीनेट और प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होने पर ट्रंप को महाभियोग के माध्यम से हटाया जा सकता है। इसके लिए प्रतिनिधि सभा में साधारण बहुमत की जरूरत होगी। वहीं सीनेट में महाभियोग का ट्रायल चलेगा। दोषसिद्धि और दो-तिहाई बहुमत से ट्रंप को हटाया जा सकता है।  

अमेरिका में डिवाइडेड गवर्नमेंट

मौजूदा चुनाव नतीजों से अमेरिका की सियासत में डिवाइडेड गवर्नमेंट की स्थिति पैदा हो गई है। इसका अर्थ यह हुआ कि कांग्रेस के दोनों सदनों पर विपक्ष का बहुमत होगा और राष्ट्रपति रिपब्लिकन पार्टी से होगा।