महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में पिछले साल सितंबर-अक्टूबर में हुई ज्यादा बारिश की वजह से गन्ने की फसल प्रभावित हुई। इससे चीनी का उत्पादन घटा और स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया। चीनी के दाम महज एक महीने में 20 रुपये प्रति किलो बढ़ गए। दशहरा 20 अक्टूबर और दिवाली 8 नवंबर को है, लेकिन त्योहारी सीजन से पहले ही चीनी के दाम आसमान पर हैं। डिपार्टमेंट ऑफ कंज्युमर अफेयर के आंकड़े बताते हैं शुक्रवार को चीनी की खुदरा कीमत 65 रुपये प्रति किलो थी।
21 जुलाई को यह सिर्फ 45 रुपये थी और 31 जुलाई तक 50 रुपये हो गई थी। एक महीने में दाम 20 रुपये प्रति किलो उछल गए। 20 अगस्त को चीनी की कीमतें उत्तर प्रदेश में 57 से 60 रुपये, महाराष्ट्र में 62.5 से 64 रुपये और कर्नाटक में 63 से 64 रुपये प्रति किलो थीं। 1 अगस्त को ये कीमतें क्रमशः 44.95 से 46.7, 46.2 से 46.9 और 46.25 से 47 रुपये प्रति किलो थीं।
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उम्मीद से कम हुआ है चीनी उत्पादन
नवंबर 2025 की शुरुआत में इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने 2025-26 सीजन (अक्टूबर-सितंबर) में अनुमान जताया था कि कुल उत्पादन 343.5 लाख टन उत्पादन हुआ था, 34 लाख टन एथेनॉल के लिए निकालने के बाद नेट उत्पादन 309.5 लाख टन रह गया।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब नेट उत्पादन सिर्फ 279 लाख टन रह गया है, जो पहले के अनुमान से 30.5 लाख टन कम है। सीजन की शुरुआत में स्टॉक करीब 50 लाख टन था। उत्पादन जोड़ने पर कुल उपलब्ध चीनी करीब 329 लाख टन होगी।
घरेलू खपत 280 लाख टन और निर्यात 8 लाख टन घटाने के बाद सीजन के अंत में स्टॉक करीब 41 लाख टन रह जाएगा। यह 2016-17 के 39.4 लाख टन के बाद सबसे कम है। शुरुआती स्टॉक 48 लाख टन था, अंत में स्टॉक 39 लाख टन रह सकता है। यह साल 2008-09 के बाद सबसे कम होगा।
गन्ने की पैदावार घटी क्यों?
महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में सितंबर-अक्टूबर में ज्यादा बारिश और मानसून के देर से जाने की वजह से खेत पानी में डूब गए। मौसम की वजह से गन्ना बढ़ नहीं पाया और चीनी उत्पादन अपने निचलते स्तर पर पहुंच गया। पैदावार और मिलों में चीनी रिकवरी दोनों घटीं।
ISMA ने नवंबर में महाराष्ट्र में 130 लाख टन और कर्नाटक में 63.5 लाख टन उत्पादन का अनुमान लगाया था, लेकिन असल में वहां सिर्फ 99.2 लाख टन और 47.2 लाख टन ही बना। उत्तर प्रदेश में भी अनुमानित 103.2 लाख टन के मुकाबले सिर्फ 89.7 लाख टन उत्पादन हुआ।
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सरकार ने चीनी के बढ़ते दाम की क्या वजह बताई?
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने बताया है, 'देश में चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी का मुख्य कारण चालू सीजन में चीनी उत्पादन का अनुमान से कम रहना है। गन्ना उत्पादक राज्यों के शुरुआती अनुमान के मुताबिक चीनी उत्पादन लगभग 343 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने की उम्मीद थी। लेकिन अब मौजूदा सीजन का उत्पादन करीब 306 LMT के आसपास रहने का अनुमान है।'
सरकार ने बताया है कि अनुमान से करीब 37 लाख टन कम उत्पादन की वजह से चीनी के दाम बढ़े हैं। उत्पादन प्रभावित होने की कई वजहें सामने आईं। गन्ना खराब उगा, बीमारियां हुई और ज्यादा बारिश की वजह से खेतों में जलभराव हो गया।
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क्यों एथेनॉल को दोषी नहीं मानती है सरकार?
नवंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच तेल कंपनियों को आपूर्ति किए गए कुल एथेनॉल में केवल 32 प्रतिशत गन्ने से बना जबकि 68 प्रतिशत मक्का, चावल और अन्य अनाज से आया। विशेषज्ञों का कहना है कि कीमतों में उछाल की मुख्य वजह उत्पादन में गिरावट है, न कि एथेनॉल डायवर्जन। चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए एथनॉल कार्यक्रम को दोषी ठहराना सही नहीं है। इस सीजन में 30 लाख टन चीनी एथेनॉल बनाने में लगाई गई, लेकिन वास्तविक उत्पादन अनुमान से 34.5 लाख टन कम रहने से इसका असर बढ़ा है।
क्या और बढ़ेंगे दाम?
सरकार ने कहा है कि उत्पादन अनुमान से कम है, लेकिन घरेलू उपलब्धता अभी भी पर्याप्त बताई जा रही है। सरकार का कहना है कि घरेलू जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। बीमारी और मौसम की मार की वजह से उत्पादन हुआ है, कीमतें बढ़ी हैं लेकिन भारत चीनी सकंट से दूर है।
