आज की युवा पीढ़ी, यानी Gen-Z और Millennials, काम और अपनी निजी जिंदगी के बीच संतुलन को लेकर बेहद सतर्क है। वे अब खुद के लिए समय यानी 'मी टाइम', मानसिक शांति और ऐसी नौकरियों को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं जो उन्हें पैसों और भावनाओं के मामले में सुरक्षित महसूस कराएं। उन्होंने यह बात 'डेलॉइट ग्लोबल Gen-Z एंड मिलेनियल सर्वे 2026' रिपोर्ट में साफ तौर पर कही है। वे अब पुरानी पीढ़ी की तरह बिना रुके काम करने के बजाय अपने मानसिक स्वास्थ्य को सबसे ऊपर रख रहे हैं। काम करने के इस नए तरीके ने उनके करियर को देखने का पूरा नजरिया ही बदल दिया है।

 

आजकल के युवाओं पर पैसों का दबाव बहुत ज्यादा है। 'डेलॉइट ग्लोबल Gen-Z एंड मिलेनियल सर्वे 2026' में शामिल 55% Gen-Z और 52% Millennials का मानना है कि उनकी अभी की आर्थिक स्थिति के कारण उन्होंने अपनी जिंदगी के बड़े फैसले टाल दिए हैं। इसके अलावा रहने के लिए सही घर का न मिल पाना और उनकी बढ़ती कीमतें उनके करियर के फैसलों को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही हैं। इसी वजह से वे ऐसी कंपनियों में काम करना पसंद कर रहे हैं जहां उन्हें आर्थिक सुरक्षा का अहसास हो।  

 

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तरक्की की नई सोच

आजकल करियर का मतलब सिर्फ जल्दी तरक्की पाना या ऊंचे पद पर पहुंचना नहीं रह गया है। इस सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ 25% Gen-Z और 21% Millennials ही अपनी नौकरी में बहुत तेजी से आगे बढ़ना चाहते हैं। ज्यादातर युवा अब काम का अनुभव लेने या नई चीजें सीखने के लिए अपनी प्रोफाइल में बदलाव करने को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। लीडरशिप या ऊंचे पद पाने की होड़ अब बहुत कम हो गई है और सिर्फ 6% लोग ही इसे अपना मुख्य लक्ष्य मानते हैं। इसकी वजह यह है कि युवा जानते हैं कि बड़ी जिम्मेदारी के साथ काम का तनाव भी बढ़ता है जो उनके मानसिक स्वास्थ्य और 'मी टाइम' के लिए नुकसानदेह हो सकता है।  

 

आज की युवा पीढ़ी अपने काम और निजी जिंदगी के संतुलन को लेकर बिल्कुल भी समझौता नहीं करना चाहती। 'डेलॉइट ग्लोबल Gen-Z एंड मिलेनियल सर्वे 2026' के मुताबिक, कई युवाओं ने अपनी पुरानी नौकरी इसलिए छोड़ दी है क्योंकि वहां का माहौल उनके निजी जीवन या मानसिक स्वास्थ्य के लिए सही नहीं था। वे अब ऐसी कंपनियों के साथ काम करना चाहते हैं जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों का सम्मान करें और काम में लचीलापन भी दें।  

काम का नया तरीका

काम करने के तरीकों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का असर अब साफ दिखने लगा है, जहां लगभग 74% Gen-Z और Millennials अपने रोज के काम में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। युवा पीढ़ी AI को एक ऐसे मददगार उपकरण के रूप में देख रही है जो काम का बोझ कम कर सकता है और उनकी रफ्तार बढ़ा सकता है। हालांकि, इस रिपोर्ट के मुताबिक एक नई चुनौती भी सामने आई है युवाओं का मानना है कि वे अपनी कंपनियों के मुकाबले AI को बहुत तेजी से अपना रहे हैं।

 

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इससे काम करने के तरीके में एक असंतुलन पैदा हो रहा है क्योंकि कंपनियां इस तकनीक को अपनाने में उनसे पीछे छूट रही हैं।  जब पुरानी पीढ़ी काम से रिटायर होगी और नई पीढ़ी, यानी Gen Alpha कार्यक्षेत्र में आएगी, तब कंपनियों के सामने ज्ञान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने और तालमेल बिठाने की बहुत बड़ी चुनौती होगी।