डायबिटीज एक गंभीर बीमार है जिससे लाखों लोग पीड़ित है। इसमें शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बनता या फिर शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता है जिसक वजह से ब्लड में ग्लूकोज का लेवल हाई रहता है। डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए मेटफॉर्मिन नाम की दवा दी जाती है।

 

यह दवा ब्लड में शुगर को कंट्रोल करने में मदद करती है। क्या आपने सोचा है कि यह दवा शरीर में कैसे काम करती है? इस बारे में हमने बेंगलुरु के एस्टर सीएमआई अस्पताल के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर महेश डी.एम से बात की।

 

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कैसे मेटफॉर्मिन शुगर को कंट्रोल करती है?

टाइप 2 डायबिटीक मरीजों की लिवर में जरूरत से ज्यादा ग्लूकोज बनता है। मेटफॉर्मिन ग्लूकोज के प्रोडक्शन को कम करने में मदद करता है ताकि ब्लड में शुगर का लेवल नियंत्रित रहे। इसके अलावा शरीर को इंसुलिन सेंसिटिविटी के प्रति भी बेहतर बनाता है जिससे मांसपेशियां और शरीर के अन्य टिशूज बेहतर तरीके से काम कर सकें। यह इंसुलिन प्रोडक्शन को आमतौर पर बढ़ाता नहीं है इसलिए सिर्फ मेटफॉर्मिन लेने से ब्लड शुगर के लो होने का रिस्क कम होता है।

 

मेटफॉर्मिन तब अच्छे से काम करता है जब आप उसके साथ अच्छी डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज, पूरी नींद और जरूरत पड़ने पर बताई गई डायबिटीज की दूसरी दवाओं को लेते हैं। इसे डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए।

मेटफॉर्मिन लेने का सही समय क्या है?

मेटफॉर्मिन का सही समय डॉक्टर द्वारा दी गई डोज पर निर्भर है लेकिन आमतौर पर इसे खाने के साथ या तुरंत बाद लेने की सलाह दी जाती है। इसे लेने से मतली, उल्टी, पेट फूलना और पेट में असहजपन और दस्त की समस्या नहीं होती है। अगर आपको दिन में मेटफॉर्मिन की एक खुराक लेने को कहा गया है तो शाम में खाने के बाद लें। अगर आपको रोजाना दो गोलियां लेनी है तो दोपहर और रात में खाना खाने के बाद लें। एक्सटेंडेड-रिलीज या XR दवाएं आमतौर पर दिन में एक बार रात के खाने के साथ ली जाती हैं, जब तक कि डॉक्टर कुछ और न कहें। जरूरी बात यह है कि इसे हर दिन एक ही समय पर लें और बिना डॉक्टरी सलाह के डोज न छोड़ें या न समय बदलें। हमेशा डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही कोई कदम उठाएं।

क्या मेटफॉर्मिन लिवर को प्रभावित करती है?

मेटफॉर्मिन मुख्य रूप से लिवर पर काम करती है और अन्य टिशूज को भी प्रभावित करती है। इसका मुख्य काम होता है कि लिवर में ग्लूकोज को अधिक मात्रा में बनने से रोकना जिसकी वजह से ब्लड में शुगर का लेवल कम होता है। इसके इस्तेमाल से इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर होती है। यह कुछ हद तक दिमाग तक भी पहुंचती है और दिमाग के मेटाबॉलिज्म और अन्य प्रक्रियाओं पर इसके असर को समझने के लिए रिसर्च चल रही है। हाल ही में एक स्टडी हुई थी जिसमें बताया गया था कि मेटफॉर्मिन आपके लिवर नहीं दिमाग के रिस्पेटर को सिग्नल भेजता है जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करता है।

कैसे काम करती है यह दवाई?

 स्टडी में पाया गया कि मेटफॉर्मिन दिमाग में मौजूद Rap1 नाम के खास प्रोटीन की गतिविधि को कम कर देता है। रैप1 की गतिविधि कम होने से हाइपोथैलमस में मौजूद एसएफ1 (SF-1) न्यूरोन एक्टिव हो जाते हैं। इसके बाद दिमाग शरीर को ऐसे सिग्नल भेजता है जिससे ग्लूकोज का लेवल कम होने में मदद मिलती है। इस स्टडी को Baylor College of Medicine के शोधकर्ताओं ने किया है। दशकों से ऐसी धारणा थी कि मेटफॉर्मिन सिर्फ आपके लिवर के लिए काम करता है जिसकी वजह से ग्लूकोज का उत्पादन कम होता है। अगर मेटफॉर्मिन सीधा दिमाग को टारगेट करती है तो भविष्य में कम मात्रा में इसका अधिक असर देखने को मिलेगा। हालांकि यह शोध का विषय है।

ब्लड शुगर को कैसे कंट्रोल करें?

  • डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए दवा के साथ हेल्दी ईटिंग, फिजिकल एक्टिविटी और शुगर की नियमित रूप से जांच कराते रहना चाहिए। मरीज को डॉक्टर द्वारा दी गई दवा को नियमित रूप से लेना चाहिए।
  • संतुलित आहार में सब्जियों, साबूत अनाज, दाले, प्रोटीन, हेल्दी फैट को शामिल करना चाहिए। शुगर वाली ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड फूड को खाने से बचना चाहिए। 
  • रोजाना एक्सरसाइज करें। 
  • पर्याप्त नींद लें।
  • नियमित रूप से HbA1c टेस्ट करवाएं ताकि शुगर की बीमारी का समय से पहले पता चल जाएं।
  • स्वस्थ जीवनशैली को अपना कर इस गंभीर बीमारी से बच सकते हैं।