जब भी स्किनकेयर की बात होती है तो सनस्क्रीन को हमेशा विकल्प माना जाता है। सोशल मीडिया की वजह से लोग स्किन केयर के प्रति जागरूक हुए हैं लेकिन सनस्क्रीन से जुड़े मिथ्स को लोग सच मानते हैं। खासतौर से पुरुषों को लगता है कि सनस्क्रीन लगाने का कोई फायदा नहीं होता है। 

 

लोगों का मानना है कि जिन लोगों का रंग काला है उन्हें सनस्क्रीन लगाने की जरूरत नहीं है। इसके अलावा ठंडे मौसम में भी सनस्क्रीन को लगाने का कोई फायदा नहीं है। आपको बता दें कि ये सभी बातें भ्रम है। इन बातों में कोई सच्चाई नहीं है।

 

यह भी पढ़ें: सुबह के नाश्ते में पराठे की बजाय खाएं ये चीजें, दिनभर नहीं लगेगी भूख

सनस्क्रीन से जुड़े मिथ्स के बारे में जानें

मिथ 1- सनस्क्रीन सिर्फ धूप में लगाना चाहिए

 

सनस्क्रीन धूप में सूरज की हानिकारक किरणों से बचाने का काम करता है। लोगों को लगता है कि बारिश और ठंड के मौसम में सनस्क्रीन लगाने की जरूरत नहीं होती है लेकिन यह सच नहीं है। ठंडे मौसम में सूरज की हानिकारक किरणे त्वचा के लिए नुकसानदायक है।

 

मिथ 2- दिन में एक बार लगाना काफी है

 

लोगों को लगता है कि दिन में एक बार सनस्क्रीन लगाना काफी होती है और आप सूरज की हानिकारक किरणों से बच सकते है। पसीने, प्रदूषण की वजह से सन स्क्रीन कुछ समय के बाद प्रभाव नहीं रहता है। त्वचा विशेषज्ञों के मुताबिक आपको दिन में दो से तीन बार सनस्क्रीन लगाना जरूरी है।

 

मिथ 3- अधिक एसपीएफ क्रीम ज्यादा फायदेमंद है

 

लोगों को लगता है कि अधिक एसपीएफ वाली क्रीम त्वचा के लिए ज्यादा फायदेमंद है। ऐसा बिल्कुल नहीं है। अधिक एसपीएफ का यह मतलब नहीं है कि आप सूरज की यूवी ए और यूवी बी किरणों से पूरी तरह से सुरक्षित है।

 

यह भी पढ़ें: मानसून में रूखे, फ्रिजी बालों से हैं परेशान, देखभाल के लिए अपनाएं ये तरीके

 

मिथ 4- सिर्फ सनस्क्रीन लगाना काफी है

 

ऐसा सोचना आपकी सबसे बड़ी गलती है। सनस्क्रीन आपको सूरज की हानिकारक किरणों से बचाने का काम करता हैं लेकिन अन्य समस्याओं से छुटकारा नहीं दिलाता है।

 

मिथ 5- डार्क लोगों को सनस्क्रीन की जरूरत नहीं

 

त्वचा में मेलनिन की मात्रा अधिक होने से प्राकृतिक रूप से यूवी रे से सुरक्षा मिलती है लेकिन ये दाग-धब्बे, एजिंग और स्किन कैंसर के खतरे को कम नहीं करता है। सनस्क्रीन हर स्किन टोन के व्यक्ति के लिए जरूरी है।