देश की राजधानी दिल्ली में SIR प्रक्रिया के खिलाफ कांग्रेस की अगुवाई में INDIA गठबंधन फिर से प्रदर्शन कर रहा है। इस प्रदर्शन के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) से मिलने का समय मांगा था। INDIA गठबंधन स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने  वाले थे। साथ ही CJI को ज्ञापन सौंपने वाले थे। उन्होंने कहा कि उन्हें मीटिंग के लिए पत्र मिला था। उन्होंने अपनी असमर्थता जताते हुए मिलने से मना कर दिया। 

 

'वन नेशन वन इलेक्शन' मुद्दे पर उन्होंने कहा कि कोर्ट में इस मामले को लेकर हितों के टकराव की संभावना थी। हमें हितों के टकराव से बचना चाहिए। उन्होंने विपक्ष को सलाह दी है कि कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं जो भी न्यायसंगत होगा वह किया जाएगा। 

 

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CJI ने क्या कहा?

मीडिया से बातचीत के दौरान उनसे पूछा गया कि विपक्ष ने आपसे मिलने का समय मांगा है। उस पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा, 'मुझे कल मीटिंग के अनुरोध के बारे में एक पत्र मिला था। जिसका मैंने कल रात ही जवाब दे दिया था। पत्र में मैंने कुछ कारणों का जिक्र किया है। मैं नेताओं से मिलने के लिए असमर्थ हूं और मैंने लेटर में लिख भी दिया है।'  उन्होंने यह भी कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। किसी भी आम नागरिक या चुने हुए लोग की याचिका का स्वागत है। हर भारतीय नागरिक को कोर्ट जाने का अधिकार है। हम उनकी बात सुनेंगे और कानून के तहत जो भी उचित होगा वह करेंगे।'

 

 

इसके साथ ही CJI ने JPC के सुप्रीम कोर्ट के दौरे के रद्द होने पर भी बात की। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर भी कोर्ट में सुनवाई की संभावना थी, इसलिए न्यायिक साथियों के साथ चर्चा के बाद हितों के टकराव से बचने के लिए दौरा रद्द किया गया। 'वन नेशन वन इलेक्शन' पर CJI ने कहा, 'इस मामले में तुलनात्मक रूप से ज्यादा आधार हैं क्योंकि उस मुद्दे में कोर्ट में हितों के टकराव की संभावना थी। इस कारण हमें प्रशासनिक पहलू पर चर्चा करनी पड़ी। मेरे वरिष्ठ न्यायिक सहयोगियों और मेरी सामूहिक राय थी कि हमें हितों के किसी भी टकराव से बचना चाहिए।'

 

 

CJP के प्रोटेस्ट पर उन्होंने कहा कि यह विषय कानून व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। इस विषय पर कुछ कहना गलत होगा। साथ ही CJI ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि संविधान के तहत सुप्रीम कोर्ट प्रशासनिक स्तर पर कार्यपालिका के कामकाज में दखल नहीं दे सकता। 

 

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SIR पर विपक्ष ने क्या कहा?

विपक्ष के नेता SIR पर कोर्ट का दखल चाहती है। साथ ही CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग कर रही है। कांग्रेस चाहती है कि इस मामले पर कोर्ट संज्ञान ले और फैसला दें।  ऐसा कहा जा रहा है विपक्ष के नेता 13 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में पहले से सूचीबद्ध SIR मामलों के साथ अपनी नई याचिका भी दाखिल कर सकते हैं। इस पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत सुनवाई होगी। मई 2026 में सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ ने चुनाव आयोग द्वारा SIR कराने के अधिकार की वैधता को बरकरार रखा था। इसके अलावा CEC के फैसलों से जुड़ी अन्य याचिकाओं पर भी कोर्ट में सुनवाई जारी है।