दिल्ली में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका को जेल से रिहा करने का आदेश दिया है। दोनों को दो दिन की नयायिक हिरासत के बाद SEM कोर्ट में पेश किया गया था। कोर्ट में पेश होने के बाद उनकी रिहाई का फैसला सुनाया गया। आरोप है कि दोनों नेता जंतर मंतर पर तिरंगा लहराया था। यह जगह, धरना प्रदर्शन के तौर पर गैर अधिसूचित है। पुलिस ने यहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू किया है।

दिल्ली पुलिस ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत में 3 दिन और न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की थी। अदालत ने पुलिस का अनुरोध मानने से इनकार कर दिया। तीनों नेताओं को रिहा किया गया है। आशुतोष रांका और सौरभ दास को बुधवार को ही मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। सुनवाई के दौरान उनके जमानतदारों ने दस्तावेज भी जमा किए हैं।

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क्यों पुलिस ने गिरफ्तार किया था?

जंतर-मंतर अब धरनास्थल नहीं है। पुलिस ने इसे धरनास्थल के तौर पर गैरअधिसूचित कर दिया। इस फैसले के खिलाफ आशुतोष रांका और सौरभ दास अपने समर्थकों के साथ तिरंगा लहराने पहुंच गए और लोगों से यहां पहुंचने की अपील की। पुलिस ने आरोप लगाया कि दोनों ने सशर्त जमानत की शर्तों को तोड़ा है। 

14 अक्टूबर को शुरुआत में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में उन्हें भेजा था। अदालत ने 3 दिन और ज्यादा हिरासत बढ़ाने की अपील की थी। अदालत ने 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी गई थी। यह अवधि बुधवार को ही खत्म हो रही थी।

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हाई कोर्ट क्यों गया था मामला?

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को ही आशुतोष रांका और सौरभ दास की न्यायिक हिरासत के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया कि स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने तय सुनवाई के नतीजे का इंतजार करें। कोर्ट ने कहा कि अगर वहां से अनुकूल फैसले नहीं आते हैं तो हाई कोर्ट आ सकते हैं।