NEET -UG पेपर लीक केस में नरेंद्र मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। दिल्ली के जंतर मंतर से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब शहर-शहर फैल रहा है। दिल्ली से लेकर बिहार और पश्चिम बंगाल तक लोग सड़कों पर उतर आए हैं। सबकी एक मांग है कि धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें। निशाने पर सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृहमंत्री अमित शाह तक है।

जंतर मंतर पर ही प्रदर्शनकारियों के हाथ में कई शुक्रवार को भी नजर आईं। तख्तियों में गृहमंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा और नितिन गडकरी के खिलाफ भी लोगों में वैसा ही गुस्सा नजर आया। लोग भारतीय जनता पार्टी की टॉप लीडरशिप से इस्तीफा मांग रहे हैं। जंतर मंतर पर मौजूद युवा, वजहें भी गिना रहे हैं कि क्यों मंत्रियों को इस्तीफा देना चाहिए। किन-किन नेताओं के खिलाफ प्रदर्शनकारियों में गुस्सा है, क्या चाहते हैं प्रदर्शनकारी, वजह क्या है, आइए समझते हैं- 

यह भी पढ़ें: क्या है Gen Z 'वास्तेगुना हुइयां ट्रेंड', जिससे जंतर मंतर पर परेशान हो गई पुलिस?

धर्मेंद्र प्रधान: अगर इस्तीफा नहीं तो प्रदर्शन रहेगा जारी 

धर्मेंद्र प्रधान देश के शिक्षा मंत्री हैं। NEET पेपर लीक केस में उनके खिलाफ प्रदर्शनकारी सबसे ज्यादा भड़के हैं। कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में हो रहे विरोध प्रदर्शन में सारी तकरार उन्हें लेकर ही है। उनकी वजह से बीजेपी के दूसरे नेताओं के खिलाफ भी आवाज उठ रही है। पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कभी ऐसा गुस्सा नहीं देखा गया, जैसा अब देखने को मिल रहा है।

शहर-शहर पीएम मोदी के खिलाफ आक्रोश है और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। मई से शुरू हुआ यह ऑनलाइन आंदोलन, अब व्यापक आदोलन का रूप ले चुका है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान NEET समेत कई परीक्षाओं के पेपर लीक होने, तकनीकी गड़बड़ियों और परीक्षाएं रद्द होने की वजह से छात्रों के गुस्से का शिकार हो रहे है। गुस्सा सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ नहीं है, बीजेपी के और भी मंत्री लोगों के निशाने पर हैं।

Photo Credit: Abhay Sharma

अमित शाह का भी इस्तीफा मांग रहे प्रदर्शनकारी

दिल्ली के जंतर मंतर पर गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भी गुस्सा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस की लाठीचार्ज और सख्त कार्रवाई में सैकड़ों छात्र घायल हुए। दल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है। प्रदर्शनकारी और विपक्ष ने अमित शाह से संसद में बयान देने और जवाबदेही तय करने की मांग की है। प्रदर्शनकारी पुलिस की बर्बरता और शांतिपूर्ण प्रदर्शन को कुचलने का आरोप लगाते हुए शाह की इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं। 

नितिन गडकरी, एथेनॉल और सड़कों पर बुरे फंसे हैं 

नितिन गडकरी के खिलाफ भी लोगों में गुस्सा है। पहले उन्हें लोग 'हाइवे मैन ऑफ इंडिया' बुलाते थे, अब उन पर भी सवाल उठ रहे है। लोगों का कहना है कि जो सड़कें हाइवे के नाम पर बनीं, उनके गड्ढा बन जा रहा है, जिन परियोजनाओं में लाखों करोड़ फूंके गए, वहां बारिश के दिनों में जमीन धंस जा रही है।

नितिन गडकरी एथेनॉल E20 ब्लेंडिंग को लेकर निशाने हैं। E20 पेट्रोल लागू होने के बाद लोग शिकायत कर रहे हैं कि माइलेज काफी कम हो गया है। कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि उनकी गाड़ियों का माइलेज 6 से 10 प्रतिशत कम हो गया है। पुरानी गाड़ियों और मोटरसाइकिलों में इंजन खराब हो रहा है, सर्विसिंग महंगी पड़ रही है। 

लोगों का कहना है कि नितिन गडकरी के बेटों की एथेनॉल वाली कंपनियों में भारी मुनाफा हुआ है, जिसकी वजह से उन पर उन्हें मुनाफा पहुंचाने के आरोप लग रहे हैं। लोग मांग कर रहे हैं कि E10 उपलब्ध कराओ, E20 सस्ता करो, शुद्ध पेट्रोल सस्ते दाम पर दो। कुछ लोग उनका इस्तीफा भी मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि दूसरे मंत्रियों की तरह नितिन गडकरी ने भी व्यक्तिगत हित के लिए लोगों को धोखा दिया। नितिन गडकरी ने इसे साजिश बताया है। 

यह भी पढ़ें: जंतर मंतर पर पुलिसकर्मी भी पिटे, किन धाराओं दर्ज हो सकता है केस, क्या होगी सजा?

हर प्रदर्शनकारी कुछ न कुछ रिकॉर्ड कर रहा है। Photo Credit: Khabargaon

जेपी नड्डा के खिलाफ गुस्सा क्यों?

जेपी नड्डा सरकार का पक्ष, प्रदर्शनकारियों के सामने रख रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधि उनसे मुलाकात कर रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा इस मुद्दे पर सरकार की तरफ से मुख्य चेहरा बनकर सामने आए हैं। उन्होंने घायल छात्रों से अस्पताल में मुलाकात की, CJP के प्रतिनिधियों से बैठक की और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सरकार संसद में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है  लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। 

विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर जेपी नड्डा और सरकार पर हमला बोल रहा है। सोशल मीडिया पर कई लोग कह रहे हैं कि स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते जेपी नड्डा को शिक्षा के मुद्दे पर बोलने का अधिकार नहीं है। इस गुस्से की असली वजह शिक्षा व्यवस्था में लगातार हो रही गड़बड़ियां हैं। लोग इसे बीजेपी सरकार की नाकामी मान रहे हैं। 



जंतर मंतर पर कुछ प्रदर्शनकारी देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर जेपी नड्डा के भी इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों और अस्पताल बेड्स की कमी, ग्रामीण इलाकों में सुविधाओं की कमी जैसी पुरानी समस्याएं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। राजस्थान के अस्पतालों में दवाइयों की वजह से लोगों की अस्पतालों में हो रही मौत को लेकर भी वह जनता के निशाने पर हैं। लोगों का कहना है कि केंद्रीय मंत्री होने के नाते उनकी जिम्मेदारी है कि ऐसी अनियमितता कहीं भी हो, वह तत्काल कार्रवाई करें। वह सरकार की तरफ से संवाद कर रहे हैं, इसलिए उनके भी इस्तीफे की मांग बढ़ी है। 

यह भी पढ़ें: 'पुलिस वाले बाबू डंडा तो लगा दो...', जंतर मंतर पर बने कई गाने, मीम की आई बाढ़

निर्मला सीतारमण के खिलाफ गुस्सा क्यों है?

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने NEET की परीक्षा पर कहा था कि नीट पेपर लीक वजह से लोगों को ज्यादा तैयारी का वक्त मिल गया। लोगों ने उनके बयान को असंवेदनशील माना और उनके पोस्टर भी जंतर मंतर पर लहराने लगे। लोगों का कहना है कि निर्मला सीतारमण की वजह से देश में महंगाई बढ़ रही है, उन्हें भी इस्तीफा देना चाहिए। 

 

अश्विनी वैष्णव के खिलाफ भी है लोगों में गुस्सा

अगर धर्मेंद्र प्रधान पर गाज गिरती है तो अश्विनी वैष्णव भी निशाने पर आएंगे। रेलवे में भी पेपर लीक की खबर सामने आई थी। बीते कुछ वर्षों में कई बड़ी रेल दुर्घटनाओं की वजह से रेलवे पर सवाल उठे है। बालासोर ट्रेन हादसा और कंचनजंगा एक्सप्रेस दुर्घटना के बाद रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव लगातार विपक्ष और आम जनता के निशाने पर हैं। 

लोग रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं और स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली 'कवच' के धीमे क्रियान्वयन, रेलवे में खाली पड़े हजारों पदों तथा ट्रेनों में बढ़ती भीड़ और सुविधाओं की कमी को लेकर नाराजगी जताते रहे हैं। लोगों की मांग है कि रेलवे बोर्ड और मंत्रालय से तत्काल सुधार हो, ट्रेनें लेट न हों, भर्ती प्रक्रिया तेज की जाए।