सरकार ने पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदने को लेकर नए और सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब कोई भी गाड़ी वाला या ग्राहक एक दिन में किसी भी पेट्रोल पंप से 200 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं खरीद पाएगा। यह बड़ा फैसला सरकार ने इसलिए लिया है ताकि पेट्रोल पंपों पर डीजल की जमाखोरी को रोका जा सके और आम लोगों को ईंधन आसानी से मिलता रहे। साथ ही, इसका उद्देश्य सरकारी तेल कंपनियों को हो रहे नुकसान को कम करना भी है।  

 

सरकार के नए नोटिफिकेशन के अनुसार, अब पेट्रोल पंप डीलर किसी भी गाड़ी या ग्राहक को एक दिन में 200 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं दे सकेंगे। इसके साथ ही, पंप से खरीदे गए डीजल को दोबारा बेचने यानी रीसेल करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। पेट्रोल पंप चलाने वालों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे डीजल सिर्फ गाड़ी की टंकी में या 'पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन' (PESO) से मंजूर किए गए कंटेनर में ही डालें। यह आदेश तुरंत लागू कर दिया गया है और यह अभी अगले 3 महीने यानी 90 दिनों तक प्रभावी रहेगा।  

 

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बड़े खरीदारों के लिए नई व्यवस्था

मॉल, अस्पताल, बड़ी फैक्ट्रियां, ट्रैवल एजेंसियां और निजी बस चलाने वाले जैसे थोक खरीदार अब रिटेल पेट्रोल पंपों से तेल नहीं खरीद पाएंगे। सरकार ने इन सभी संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अपनी जरूरत का डीजल सिर्फ अधिकृत 'बल्क सेल पॉइंट्स' यानी थोक बिक्री केंद्रों से ही लें। उन्हें पेट्रोल पंपों पर जाकर तेल लेने की इजाजत नहीं होगी।

 

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सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?

पेट्रोल पंपों पर डीजल का दाम और थोक में मिलने वाले डीजल के दाम में बहुत बड़ा अंतर है। उदाहरण के तौर पर, दिल्ली में रिटेल पंप पर डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है जबकि थोक में यह 134.50 रुपये प्रति लीटर है। इसी कीमत के अंतर का फायदा उठाने के लिए कई औद्योगिक खरीदार अपने थोक स्रोतों के बजाय आम पेट्रोल पंपों पर जाकर तेल लेने लगे थे। इससे पेट्रोल पंपों पर अचानक तेल की कमी होने लगी और तेल कंपनियों को राजस्व का बहुत नुकसान होने लगा।  

 

अगर कोई व्यक्ति या संस्था इन नए नियमों को तोड़ती है या डीजल की जमाखोरी करती है, तो उन पर 'आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955' के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम तेल के गलत इस्तेमाल और डायवर्जन को रोकने के लिए बहुत जरूरी था।