अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनाव के नतीजों से संकेत मिल रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ है। इसे ट्रंप के फैसलों के खिलाफ जनता की नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। भारत में भी इन नतीजों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं ने तंज कसा है। इस पूरे घटनाक्रम पर सौरभ दास ने कहा कि दुनिया भर में तानाशाह बनने की कोशिश करने वाले नेताओं के लिए यह अच्छा समय नहीं है। वहीं, अभिजीत दीपके ने तंज कसते हुए कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार होते तो ट्रंप के साथ ऐसा नहीं होने देते।

 

CJP के नेताओं ने अमेरिका के चुनाव नतीजों को भारत की राजनीति से जोड़ते हुए सत्ताधारी पार्टी पर निशाना साधा। उनका कहना है कि अब दुनिया के तानाशाह नेताओं के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। इसकी शुरुआत ब्राजील से हुई, फिर सर्बिया और अब अमेरिका की बारी है।
 

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सौरभ दास का तंज

CJP नेता सौरभ दास ने ट्रंप को तानाशाह बता कर आए नतीजों पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में तानाशाह बनने की इच्छा रखने वालों के लिए अभी खराब समय चल रहा है। उन्होंने लिखा, 'तानाशाही रवैया रखने वाले ट्रम्प की पार्टी का अमेरिकी हाउस और सीनेट, दोनों पर से नियंत्रण खत्म हो गया है! ऐसा लगता है कि दुनिया भर में तानाशाह बनने की चाह रखने वालों के लिए बुरा दौर चल रहा है?'

 

 

आगे उन्होंने लिखा, 'लेकिन याद रखें, बात सिर्फ चुनावों पर खत्म नहीं होती। उस तानाशाह, उसके गुर्गों और हर उस एक व्यक्ति को सजा मिलनी चाहिए जिसने तानाशाह के कामों में मदद की या उन्हें बढ़ावा दिया।'

'ज्ञानेश कुमार ट्रंप के साथ ऐसा नहीं होने देते'

CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने तो यहां तक कहा दिया कि  मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ट्रंप के साथ ऐसा नहीं होने देते। उन्होंने लिखा, 'ज्ञानेश कुमार ने ट्रम्प के साथ ऐसा कभी नहीं होने दिया होता।' उन्होंने एक और पोस्ट किया जिसमें लिखा, 'लोग नफरत की राजनीति के खिलाफ वोट कर रहे हैं, और जवाबदेही, नौकरियों तथा किफायती जीवन-यापन के पक्ष में वोट दे रहे हैं।'

 

एक और पोस्ट किया जिसमें लिखा कि 2010 के बाद से दुनिया ने स्ट्रॉन्गमेन वाली राजनीति के प्रति एक नया आकर्षण देखा। उन्होंने लिखा, 'लोगों को यह विश्वास दिलाया गया कि लोकतंत्र तरक्की की रफ्तार को धीमा कर रहा है और एक ताकतवर नेता उनकी सभी समस्याओं का समाधान कर सकता है। उन्होंने ऐसे नेताओं पर भरोसा किया जो खुद को संस्थाओं से बड़ा मानते थे।' 

 

उन्होंने आगे लिखा, 'जिन्होंने देश को महान बनाने, समृद्धि लाने और दुनिया में दबदबा कायम करने का वादा किया था। लेकिन इसके बजाय, लोकतांत्रिक संस्थाओं का क्षरण हुआ, अधिकारों का दमन हुआ, युद्ध हुए और आर्थिक उथल-पुथल मची।'

 

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अमेरिका का हालिया घटनाक्रम और भारत में आ रही उस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं यह साफ करती हैं कि सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ लामबंदी अभी रुकने वाली नहीं है। साथ ही ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अभी राहत नहीं है।