कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने दिवाली पर अपनी सास और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के घर 1 सफदरजंग रोड में मनाए गए त्योहार की यादें साझा कीं। उन्होंने रविवार को फेसबुक, इंस्टा और एक्स पर एक वीडियो शेयर किया है। वीडियो में वह घर के बगीचे में बेटी प्रियंका गांधी और नातिन मिराया वाड्रा से बात करती दिख रही हैं।
सोनिया गांधी ने कहा कि दिवाली पर पूरा घर दीयों से रोशन रहता था। त्योहार के समय घर में कश्मीरी खाना बनता था। वीडियो के साथ उन्होंने लिखा कि वे दिवाली की शुरुआती यादें, परंपराएं और छोटे-छोटे पल फिर से याद कर रही हैं।
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'गणेश जी की मूर्ति के पास जलता था पहला दिया'
सोनिया गांधी ने बताया कि पहले दीये गणेश जी की मूर्ति के पास जलाए जाते थे। उन्होंने कहा कि उस समय छोटी रंगीन लाइटें नहीं होती थीं, लेकिन तालाब के आसपास, छत, बरामदे और रास्ते पर हर जगह दीये होते थे, यह बहुत सुंदर लगता था।
'प्रियंका गांधी चांदनी चौक से खरीदती थीं पटाखे'
प्रियंका ने भी अपने पिता राजीव गांधी के साथ इंदिरा गांधी के सरकारी आवास पर त्योहार मनाने की यादें साझा कीं। उन्होंने बचपन की परंपरा याद करते हुए कहा कि पापा पटाखे खरीदने के लिए उन्हें चांदनी चौक ले जाते थे। मां-बेटी ने यह भी याद किया कि उन दिनों मौसम सुहावना रहता था और आसमान साफ और नीला दिखता था।
पटाखों और फुलझड़ी की बातें
सोनिया ने प्रियंका गांधी की बेटी मिराया से कहा कि उस जमाने में लोग पटाखों को लेकर बहुत उत्साहित रहते थे। उन्होंने बताया कि उन्हें खासतौर पर फुलझड़ी जैसी आतिशबाजी पसंद थी। सोनिया की किताब 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' चर्चा में है। किताब 10 नवंबर को बाजार में आने वाली है।
अतीत के जख्मों को कुरेदती है सोनिया गांधी की किताब
द गार्डियन में छपे किताब के संपादित अंश में सोनिया ने 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या के बाद के भावुक पलों का जिक्र किया है। इंदिरा गांधी को उनके अंगरक्षकों ने 1 सफदरजंग रोड स्थित आवास पर गोली मारी थी। उस समय राजीव गांधी पश्चिम बंगाल में एक राजनीतिक रैली में थे। उन्हें दिल्ली में गंभीर घटना की सूचना मिली। वे दिल्ली लौटे और करीब 3.30 बजे पहुंचने के बाद सीधे अस्पताल ले जाए गए।
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कैसा था सोनिया गांधी का रिएक्शन, जब सुना वह बनेंगे प्रधानमंत्री?
सोनिया गांधी ने लिखा कि अस्पताल में मुलाकात के दौरान वे कुछ पल पति के साथ अकेले रहना चाहती थीं। जल्द ही उन्हें समझ आया कि राजीव कुछ ऐसा कहने वाले हैं, जो वह सुनना नहीं चाहती थीं। राजीव गांधी ने उनसे कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने को कहा गया है। सोनिया के मुताबिक यह सुनकर उन्हें गहरे गुस्से और पीड़ा ने घेर लिया। उन्हें डर था कि राजीव भी निशाना बन सकते हैं।
