भारत ने छठी पीढ़ी के फाइटर जेट की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। केंद्र सरकार ने हाल ही में संसद को बताया कि भारत फ्रांस की अगुवाई वाले फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) कार्यक्रम में शामिल हो सकता है। यह खबर इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि भारत ने घरेलू स्तर पर अपना खुद का फाइटर जेट कार्यक्रम चला रखा है, लेकिन यह काफी देरी का सामना कर रहा है।
पड़ोसी चीन पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को तैनात कर रहा है और छठी पीढ़ी की दिशा में अहम सफलता हासिल की है। भारत के पास अभी 4.5 पीढ़ी का सबसे उन्नत विमान राफेल है और यह फ्रांस निर्मित है।
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भारत पांचवीं पीढ़ी का विमान खुद बनाना चाहता है। वहीं छठी पीढ़ी की दिशा में उसे ऐसे साझेदारों की तलाश है, जिनके साथ मिलकर आधुनिक फाइटर जेट कार्यक्रम चलाया जा सके, ताकि इंजन या किसी अन्य तकनीक के लिए अमेरिका पर निर्भरता न हो।
वैश्विक स्तर पर छठी पीढ़ी के फाइटर जेट के निर्माण के कई कार्यक्रम चल रहे हैं, लेकिन भारत ने अपनी दिलचस्पी फ्रांस की अगुवाई वाले कार्यक्रम पर उस वक्त दिखाई, जब इससे जर्मनी ने अपनी दूरी बना ली है। FCAS प्रोग्राम में अभी फ्रांस और स्पेन शामिल है। अगर भारत इसका हिस्सा बनता है तो वह कार्यक्रम में शामिल होने वाला तीसरा देश होगा। आइये समझते हैं कि फ्रांस का FCAS प्रोग्राम क्या है, भारत इसमें क्यों शामिल होना चाहता है और दुनिया में कितने और छठी पीढ़ी के फाइटर जेट प्रोग्राम चल रहे हैं।
मार्च में रक्षा मंत्रालय ने किया था इशारा
रक्षा मंत्रालय ने मार्च में जानकारी दी थी कि भारतीय वायुसेना छठी पीढ़ी के दो लड़ाकू विमान कार्यक्रम में से किसी एक में शामिल होने की इच्छुक है। शुक्रवार को रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने साफ कर दिया कि उसने फ्रांसीसी सरकार द्वारा शुरू किए गए कार्यक्रम एफसीएएस में सहयोगपूर्वक शामिल होने की कोशिश शुरू कर दी है।
क्या है FCAS प्रोग्राम?
फ्रांस का प्लान FCAS के तहत सिर्फ एक फाइटर जेट बनाने का नहीं है। वह फाइटर जेट के साथ 'सिस्टम ऑफ सिस्टम्स' विकसित करना चाह रहा है। यह फाइटर जेट आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के अलावा डेटा क्लाउड के माध्यम से अंतरिक्ष, समुद्र, जमीन और हवा में मौजूद अन्य विमानों और रडार स्टेशनों से जुड़ा होगा। लड़ाकू विमान में ही सैकड़ों अटैक ड्रोन होंगे। यह ड्रोन अकेले और झुंड दोनों में हमला करने की ताकत रखेंगे।
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प्लान के तहत यूरोफाइटर और राफेल विमान को भी इससे जोड़ा जाएगा। इसमें एआई, बिग डेटा, क्रिप्टोग्राफी और मानव-मशीन इंटरैक्शन का इस्तेमाल होगा। रडार और यूरोड्रोन ऑप्ट्रोनिक कैमरों सहित कई खुफिया, निगरानी और टोही स्रोत... हवा, जमीन और समुद्र से रियल टाइम में तेजी से हालात की जानकारी देंगे। इससे मिशन की सटीकता और सफलता तय होगी।
भारत को छठी पीढ़ी की जरूरत क्यों?
भारत के पास मजूबत और दुनिया की एक बड़ी सेना है। लेकिन फाइटर जेट के मामले में चीन बेहद आगे है। पीएलए की वायुसेना के पास जे- 20 और जे-35 जैसे पांचवीं पीढ़ी के विमान है। छठी पीढ़ी के विमान के दो प्रोटोटाइप की टेस्टिंग भी कर चुका है। खबर यह भी आई है कि जल्द चीन से पाकिस्तान को 40 जे-35 विमान मिलने वाले हैं। पाकिस्तान के पायलटों को चीन में अभी ट्रेनिंग दी जा रही है। चीन और पाकिस्तान के गठजोड़ ने भारत को नई पीढ़ी के विमान की दिशा में कदम बढ़ाने पर विवश किया, क्योंकि भारत के पास अभी तक पांचवीं पीढ़ी का भी विमान नहीं है।
कब तक मिलेगा पांचवीं पीढ़ी का विमान?
भारत स्वदेशी उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA) के तहत पांचवीं पीढ़ी का विमान बना रहा है। 2029 तक पहली उड़ान का लक्ष्य है। अगर भारत खुद के दम पर छठी पीढ़ी का विमान बनाता है तो उसे वर्षों लग जाएंगे। इंजन बनाने की तकनीक भारत के पास नहीं है। ऐसे में दूसरे देश पर निर्भर रहने से बेहतर है कि फ्रांस के साथ मिलकर छठी पीढ़ी का विमान विकसित किया जाए।
भारत ने फ्रांस को ही क्यों चुना?
भारत और फ्रांस के बीच मजबूत रक्षा संबंध है। भारत पहले भी जगुआर और राफेल जैसे विमान खरीद चुका है। 114 नए राफेल विमान खरीदने की दिशा में कदम बढ़ाया है। फ्रांस की कंपनी सैफरान और डीआरडीओ की गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRI) लड़ाकू विमान के इंजन बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।
दुनियाभर में चल रहे अगली पीढ़ी के फाइटर जेट प्रोग्राम
फ्रांस की ही तरह इटली, ब्रिटेन और जापान ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP) के तहत छठी पीढ़ी के फाइटर जेट बनाने में जुटे हैं। भारत के पास इसमें भी शामिल होने का विकल्प है। अभी तक रक्षा मंत्रालय ने सिर्फ फ्रांस की अगुवाई वाले फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम प्रोग्राम में शामिल होने पर दिलचस्पी दिखाई है।
अमेरिका स्वतंत्र तौर पर अपना छठी पीढ़ी का फाइटर जेट प्रोग्राम चला रहा है। बोइंग कंपनी एफ-47 विमान विकसित कर रही है। 2028 तक पहली उड़ान की संभावना है। अमेरिका की तर्ज पर चीन भी खुद के दम पर अपना अगली पीढ़ी का लड़ाकू विमान बना रहा है। अभी तक दो प्रोटोटाइप टेस्ट भी हो चुके हैं।
