भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने एक बार फिर अपने बयान से राजनीतिक और वैचारिक बहस छेड़ दी है। सोमवार को उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में उन्होंने दावा किया कि इस्लामिस्टों के संपर्क में आने के बाद लोग लेफ्टिस्ट बन जाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपनी वैचारिक यात्रा का भी जिक्र किया और कहा कि अब वह खुद को पहले की तरह मॉडरेट हिंदू नहीं, बल्कि जागरूक हिंदू के रूप में देखना चाहती हैं।
संसद के लिए रवाना होने से पहले रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में कंगना ने कहा कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कई हिंदू महिलाओं को देखा है लेकिन उनमें से अधिकतर की राजनीति या धर्म को लेकर कोई साफ विचारधारा नहीं होती है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी पसंद की विचारधारा अपनाने का संवैधानिक अधिकार है लेकिन समय के साथ लोगों की सोच बदलती रहती है।
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कंगना रनौत का पूरा बयान
शेयर किए गए वीडियो में कंगना रनौत ने कहा, 'हमने फिल्म इंडस्ट्री में कई हिंदू बेटियों और बहनों को करीब से देखा और जाना है। हम देखते हैं कि वे हिंदू तो होती हैं लेकिन राजनीति या धर्म को लेकर उनकी कोई खास विचारधारा नहीं होती। युवाओं में अक्सर ऐसा होता है, वे काफी न्यूट्रल रहते हैं। जैसे ही उनका रिश्ता, शादी, दोस्ती या किसी भी तरह का संपर्क इस्लामिस्ट सोच रखने वाले लोगों से होता है, उनकी सोच अचानक बहुत तयशुदा हो जाती है और वे लेफ्ट विचारधारा की तरफ चली जाती हैं।'
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उन्होंने आगे कहा, 'मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है, क्योंकि संविधान आपको यह आजादी देता है कि आप कोई भी धर्म या विचारधारा अपना सकते हैं। लेकिन दिक्कत तब होती है, जब बात हिंदू बेटियों की आती है।'
कंगना रनौत ने जागरूक हिंदू बनने की बात कही
कंगना रनौत ने अपने बयान में आगे बता कि हां, मैं पहले एक मॉडरेट हिंदू थी लेकिन अगर आज मैं खुद को डिफेंड करने लगूं तो न जाने कितनी बेटियां आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाएंगी। आज अगर लोग मुझसे तंज कसते हैं कि 'तुम कब से संघी बन गई?', तो मैं कहती हूं कि हां, मुझे संघी बनना है। मुझे BJP और RSS की विचारधारा अपनाकर एक जागरूक हिंदू बनना है। मुझे बदलना है। मैं क्यों नहीं बदल सकती?
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उन्होंने आगे कहा, 'समाज का यही दोहरापन है। जब बात हिंदू बेटियों की आती है तो समाज के ठेकेदार हमें अग्निपरीक्षा देने पर मजबूर कर देते हैं। कहते हैं, "तुम तो 10 साल पहले पार्टी करती थीं, तुम तो ऐसा करती थीं।" ठीक है मैं करती थी लेकिन अगर आज मैं बदलना चाहती हूं, एक तय सोच वाली और जागरूक हिंदू बनना चाहती हूं तो मेरे लिए वह रास्ता क्यों बंद होना चाहिए?'
