श्रद्धा, संशय, सन्नाटा। 'प्रेमानंदमय' वृंदावन में कुछ इसी मनोभाव से श्रद्धालु जूझ रहे हैं। दर्शन भी हो रहा है, ब्रज की धूल, वैसे ही लोगों के सिर चढ़ रही है, उत्सव भी है लेकिन इस उत्सव पर एक ऐसे सन्नाटे का साया है, जिसे लोग महसूस कर रहे हैं। 25 सितंबर को हुए एक हादसे ने सब बदल दिया है। अब जो श्रद्धालु हैं, उनके मन भी एक शंका घर कर चुकी है। एक संत, जिनके प्रवचनों में देश डूबा है, उनके आश्रम पर सवाल उठ रहे हैं। ये सवाल, श्रद्धालुओं को पीड़ा दे रहे हैं, संदेहवादियों को आशंका और यथार्थवादियों को सवाल कि यह हत्या है या आत्महत्या है, आश्रम में सब ठीक है?

प्रेमानंद के 'केलि कुंज आश्रम' में हुई एक मौत को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यहां गुरु कृपा कुंज आश्रम की चौथी मंजिल की छत से 25 सितंबर 2026 को प्रेमानंद के शिष्य रसिक दुलारी शरण ने कूदकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। उनका असली नाम दीपक लोधी था, 2 साल पहले उन्होंने प्रेमानंद से संन्यास की दीक्षा ली थी। उन्हें घायल हालत में सर्वोदय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्हें डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। वह जिस इमारत में वह रहे थे, वहां प्रेमानंद के 50 से ज्यादा परिकर रहते हैं। 

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सवाल, जो वृंदावन में गूंज रहे हैं

रसिक दुलारी शरण के कमरे में एक ग्राइंडर मिला। उनके प्राइवेट पर जख्म के निशान थे। प्राइवेट पार्ट काटने की कोशिश हुई थी। जो लोग आश्रम के आसपास हैं, वे दबी जुबान में कह रहे हैं कि वह छत से दौड़कर भागे थे, फिर नीचे गिरे। कोई अपना प्राइवेट पार्ट क्यों काटेगा, यह जानने पर भी कि इससे मौत भी हो सकती है। अगर उन्हें मरना था तो वह कोई और तरीका भी चुन सकते थे। एक संदेह लोगों के मन में यह भी है कि जैसे गुरमीत राम रहीम सिंह के डेरे में साधुओं को नपुंसक बनाने की बात कही जाती है, कहीं वैसे ही प्रेमानंद के आश्रम में भी तो नहीं हो रहा है। ग्राइंडर मिलने, प्राइवेट पार्ट कटने की बात किसी के गले से नीचे नहीं उतर रही है। 

 

पुलिस छत से कूदकर गिरने की बात कह रही है, यह भी कहा जा रहा है कि इसके साक्ष्य हैं लेकिन अभी तक वह वीडियो सार्वजनिक नहीं हुआ है,जिसमें वह कूदते दिख रहे हैं। जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें वह छत से गिरते हैं, जमीन पर पड़ जाते हैं। वहीं से प्रेमानंद का एक साधक साइकिल से गुजर रहा होता है, वह थोड़ी दूर जाकर साइकिल रोकता है। 

 

वृंदावन में केलिकुंज से लेकर केशी घाट तक तक, एक सवाल सबके मन में है कि कहीं आश्रम में किसी ने उनका प्राइवेट पार्ट काटा तो नहीं या विवाद के बाद उन्हें छत से नीचे तो नहीं फेंक दिया। क्या आश्रम में भी अपराध हो रहा है, जिसकी तरफ लोगों का ध्यान नहीं जा रहा है?

रसिक दुलारी कांड पर क्या कह रहे हैं प्रेमानंद के अनुयायी?

केलि कुंज के आसपास टहलते कम से कम 10 संतों से खबरगांव ने बातचीत की कोशिश की। सबने बातचीत से इनकार किया। सख्ती इतनी कि कैमरा नीचे करने की बात कही। किसी ने सिर्फ 'राधा-राधा' से इतर कुछ नहीं कहा। कुछ परिकरों ने नाराजगी भी जाहिर की। उनका कहना था कि सवाल सिर्फ धर्म पर, राधा नाम पर पूछे जाएं, फालतू के प्रश्न नहीं। 


रामदास, प्रेमानंद को अपना गुरु मानते हैं। गृहस्थ हैं और केशी घाट पर एक ठेला लगाते हैं। ठेले पर किसी ईश्वर की नहीं सिर्फ प्रेमानंद की एक तस्वीर है। वह शिकंजी और चुस्की बेचते हैं। उनसे रसिक दुलारी कांड पर जब सवाल पूछा तो जवाब मिला, 'कुछ लोग बदनाम करने के लिए आते हैं। जिन्होंने लाखों लोगों की जिंदगी संवारी, राधा नाम की महिमा का प्रचार किया, मीट-मांस और शराब छोड़कर धर्म की राह दिखाई, उन्हें लोग बदनाम कर रहे हैं, यह महापाप है, लोगों को भोगना पड़ेगा।'

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केशी घाट के पास प्रेमानंद के अनुयायी राम। 

प्रेमानंद के दीक्षित संन्यासी रमण राद से जब यह सवाल किया तो उन्होंने कहा, 'राधे-राधे, क्या यह सवाल पूछ रहे हो? गुरुदेव भगवान राधा स्वरूप हैं, किशोरी जू की सखी हैं, उन पर सवाल उठाना महापातकी है, जिसका कोई प्रायश्चित नहीं है।'

बंशी अलि शरण:-
हम गंदी नाली के कीड़े थे, कम हो गए हैं। हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि गुरुदेव भगवान का नाम कैसे लेना है। हमारे संप्रदाय में गुरुदेव पर प्रश्न उठाना, उनका नाम लेना भी पाप है। प्रेमानंद के एक दीक्षित संन्यासी, कालिया घाट पर मिले। वह बातचीत को राजी हुए। उन्होंने कहा, 'मेरा नाम मत जानो, मैं गुरुदेव भगवान का दास हूं। क्या अवगुण नहीं थे मुझमें, गुरुदेव ने गुणवान बना दिया। कलियुग में लोग साधू-संतों को बदनाम करते हैं, हमारे गुरुदेव के भी बदनाम करने की कोशिश हो रही है। किसकी बदनामी नहीं हुई। भगवान राम को कहा जा रहा है कि पत्नी छोड़ दी, लाडले जू (कृष्ण) की सखियों पर सवाल उठाते हैं, सनातन द्रोहियों से और क्या आशा है। ईश्वर इस पाप का दंड जरूर देंगे।'

ब्रजवासी क्या कह रहे हैं?

कुछ ब्रजवासी प्रेमानंद की महिमा गाते हैं, कुछ के मन में उन्हें लेकर सम्मान लेकिन उनके परिकरों को लेकर असंतोष है। कई लोग मुखर होकर उनके व्यवहार की आलोचना कर रहे हैं। उनका कहना है कि महाराज की शिष्य मंडली संदेहास्पद हैं, कई लोग साधु बनकर आए है, जिनमें साधुओं के लक्षण नहीं हैं। उनके परिकरों का लाइसेंस और पुलिस वेरिफिकेशन होना चाहिए। 

बांकेबिहारी चौक के पास ही आकाश अधोपिया की दुकान है। उन्होंने कहा, 'किसी एक घटना से, किसी की सालों की साधना पर सवाल नहीं उठाते। अगर आश्रम में कुछ अनुचित होता तो महाराज की इतनी ख्याति नहीं होती। हम ब्रजवासी जानते हैं, महाराज हमारे लिए क्या हैं। उन्हें जब एहसास हुआ कि जब उनकी प्रभात फेरी से लोगों को असुविधा हो रही है, वह वृंदावन छोड़कर यमुना पार, बेलवन चले गए।'

रामसेवक, ब्रजवासी:-
असली संत सड़कों पर रहते हैं, उनके न तो आश्रम हैं, न आश्रमों में जगह मिलती है। दिनभर भिक्षा मांगते हैं, मधुकरी मांगते हैं। कुछ लोग फटकारते हैं, मारने दौड़ते हैं। प्रेमानंद के आसपास दिखावे वाले लोग हैं, हाथी के दांत हैं, दिखने के कुछ और असल में कुछ और। आप देख लीजिए वृंदावन के घाटों पर रात में लोग पड़े रहते हैं, भंडारे न हों तो वे लोग भूखे मर जाएं। कौन उनकी सुधि लेगा?

वृंदावन में भंडारे के इंतजार में बैठे साधु-संत।

रसिक दुलारी कांड के बाद प्रेमानंद की शिष्य मंडली ने क्या बदला?

ब्रज संत महिमा:-
केली कुंज में शिष्यों की वेशभूषा के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। नए नियमों के अनुसार अब हर कोई सफेद और पीला अचला नहीं पहन सकेगा। दुकान, ठेला या किसी अन्य व्यवसाय से जुड़े विरक्त व गृहस्थ शिष्यों के साथ-साथ महाराज जी अथवा केली कुंज की सेवा में लगे गृहस्थ शिष्यों के लिए भी अब सामान्य वस्त्र या कुर्ता-पायजामा पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। सफेद वस्त्र धारण करने की अनुमति केवल उन्हीं विरक्त शिष्यों को होगी जो सीधे तौर पर पूज्य महाराज जी की सेवा या केली कुंज की व्यवस्थाओं से जुड़े हैं; साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन व्यवस्थागत परिवर्तनों का असर भविष्य में दीक्षा लेने वाले और नए बनने वाले शिष्यों पर भी पड़ेगा।

दीक्षा कार्यक्रम पर क्या कहा गया है?

ब्रज संत महिमा के मुताबिक केली कुंज में दीक्षा उपस्थिति की प्रक्रिया को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। व्यवस्था संभाल रहे शिष्य परिकर की नए आश्रम में बैठक बुलाए जाने के कारण सुबह 5 बजे से कतार में खड़े कई भक्तों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा, जिसके बाद सुबह 8 बजे तक यह स्पष्ट कर दिया गया कि फिलहाल दीक्षा उपस्थिति पूरी तरह बंद रहेगी और इसके पुनः प्रारंभ होने का कोई निश्चित समय तय नहीं है। आश्रम प्रशासन ने दीक्षा के इच्छुक एवं वहां पहुंच चुके भक्तों से अपनी दिनचर्या इसी अनुसार व्यवस्थित करने तथा आगामी नई सूचनाओं और अपडेट्स पर ध्यान रखने की अपील की है।   

राधा केलि कुंज

प्रेमानंद के आलोचक क्या कह रहे हैं?

सीमा गोविंद, इन्फ्लुएंसर:-
जो महाराज कभी वृंदावन की रज न छोड़ने की कसमें खाते थे, आज वही सब छोड़कर बेलवन जा बैठे हैं, जहां धन और लक्ष्मी का वास माना जाता है। आश्रम और ट्रस्ट के नाम पर सिर्फ करोड़ों का आर्थिक खेल चल रहा है। अपने ही प्रवचनों को ताक पर रखकर संस्थाएं खड़ी की गईं और बाकायदा दरबार सजाए जाने लगे। आश्रम में वीआईपी संस्कृति हावी है, खास लोगों के आने पर बाकायदा कैमरे लगाकर क्लिप्स शूट की जाती हैं, यहां सब कुछ पहले से तय और प्लांटेड होता है। भक्ति और 'राधा' के नाम पर केवल आस्था का ढोंग रचा जा रहा है ताकि आम जनता को भ्रमित करके यह पूरा गोरखधंधा चलाया जा सके।

 

यमुनापार, बेलगांव में है प्रेमानंद का नया आश्रम। पुलिया न होने से 5 किलोमीटर की दूरी, 25 किलोमीटर की हो गई है।

शिवन सैनी, एक ट्रैवल एजेंट हैं लेकिन खुद भी ड्राइवर हैं। वह प्रेमानंद के आश्रमों में देश और विदेश से आए श्रद्धालुओं को पहुंचाते हैं। उन्होंने एक अलग ही कहानी सुनाई। उन्हें प्रेमानंद के शिष्य, आश्रम और उनके इर्द-गिर्द मौजूद लोगों पर संदेह है। ऐसा ही संदेह, वाराह घाट के आसपास मौजूद कुछ दुकानदारों, महिलाओं और आम लोगों ने भी जताया। 

 

शिवन सैनी ने कहा, 'महाराज जी का नया आश्रम यमुना पार बेलवन में बना है। यह मुख्य वृंदावन से लगभग 20–25 किमी घूमकर पड़ता है। अगर सीधे जाएं तो दूरी 4 से 5 किलोमीटर की है। वहां के रहने वाले लोग ही नए आश्रम की ओर नहीं जाने पाते हैं। आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन बहुत कठिन हो गए हैं। कड़ी पूछताछ होती है, तगड़ी निगरानी रहती है, कैमरे और फोन पर वहां मौजूद परिकर भड़क जाते हैं। मैंने एक वीडियो बनाया था, जिसे हटाने का दबाव मुझे आश्रम की ओर से दिया गया।'

 

शिवन सैनी, ब्रजवासी, ट्रैवेल एजेंट:-
'रसिक दुलारी कांड पर पुलिस भी चुप है। यह मामला दब सकता है, बड़े लोगों की बात है, कोई अधिकारी, कुछ कहने से बच रहा है। मुझसे कई लोगों ने जो आश्रम से जुड़े हैं कह रहे हैं कि कुछ संदेहास्पद है। कौन इस तरह से खुद को नपुसंक बनाता है। कुछ तो राज उसके पास था जिसे दबाने के प्रयास में उसे संभवत: मार दिया गया है। पुलिस से बहुत उम्मीद नहीं है कि सच सामने आ सकेगा। आश्रम के ही कोई विवाद है, जिसे अनदेखा किया जा रहा है, मीडिया तक साधकों के बयान ही आने नहीं दिए जा रहे हैं।'

इन दिनों राधा केलि कुंज का हाल कुछ ऐसा है।

क्या चाहते हैं लोग?

संत इंदुलेखा और दिनेश फलहारी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने आश्रम के आसपास आपराधिक तत्वों की सक्रियता और संतों की आवाज दबाने के लिए 'लिफाफे' बांटने जैसे सनसनीखेज आरोप भी लगाए हैं। इन लोगों ने निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई न होने पर बड़े जनआंदोलन की चेतावनी दी है।

जमीन, सर्किल रेट और भूमाफियाओं के घेरे वाला एंगल क्या है?

राम केवट:-
'महाराज जी के इर्द-गिर्द रहने वाले लोग, ट्रस्ट और भू-माफिया उनके नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके नाम का इस्तेमाल करके जमीनों के दाम को मनमाने तरीके से बढ़ाया जा रहा है। प्रॉपर्टी और ब्लैकमनी का एंगल भी इसमें शामिल है। बड़े लोग महाराज के पीछे हैं, वह अब अपने लोगों के आसपास ऐसे घिरे हैं उनके संतत्व पर भी सवाल उठ रहे हैं। हमें भरोसा है कि महाराज का इसमें हाथ नहीं है लेकिन उनके आसपास के लोग बहुत साफ सुथरे छवि वाले नहीं है'

यमुना नदी के पास ध्यान में बैठे प्रेमानंद।

 

(यह नाम सुरक्षा वजहों से बदला गया है। जिस शख्स ने यह दावा किया है, वह प्रेमानंद के गेस्ट कॉर्डिनेशन से जुड़ा रहा है और प्रॉपर्टी डीलर भी है।)

प्रेमानंद पहले कृष्ण सोसाइटी में रहते थे। यह छटीकरा मार्ग पर था। साल 2021-22 से उनकी लोकप्रियता बढ़नी शुरू हुई। एकांतिक वार्ता वायरल होनी शुरू हुई। लोक प्रिय होने के बाद वह यहीं से पहले रात में पैदल परिक्रमा मार्ग की ओर जाते थे। कुछ दिनों बाद श्री राधआ हित केली कुंज की ओर शिफ्ट हुए। यहीं फिर दीक्षित शिष्यों के लिए गुरु कृपा कुंज बना। यहां से निकलकर वह अब बेलवन इलाके में चले गए हैं। बेलवन में नया आश्रम है, जहां प्रेमानंद एकांत साधना करते हैं, दीक्षित संतों से मिलते हैं, प्रवचन करते हैं।

बेलवन, प्रेमानंद का आश्रम इसी गांव में है।

रामकेवट:-
जहां पहले प्रेमानंद महाराज रहते थे, उसके आस पास की जमीनों का सौदा लाखों में था, अब करोड़ों में हैं। किसी से जमीन का सर्किल रेट पता कर लीजिए। VIP भक्तों के लिए ब्रज में सोसाइटियां बन रही हैं। जहां महाराज अब गए हैं, वह जमीन यमुना का क्षेत्र है, वहां तक बाढ़ का पानी आता है। जहां नया आश्रम है, वह यमुना का डूब क्षेत्र के भीतर आता है। पास में ही यमुना नदी का किनारा है। वहां की जमीनों को लोग कौड़ी के भाव नहीं पूछते थे, अब कीमत लाखों में जा रही है। यह हाल तब है, जब वहां स्थाई निर्माण को लेकर तमाम पर्यावरणीय और प्रशासनिक शर्तें हैं।

प्रेमानंद। Photo Credit: BhajanMarg

 

प्रेमानंद के अनुयायी कौन हैं?

केशी घाट से लेकर वराह घाट तक प्रेमानंद के परिकर घूमते दिख जाते हैं। एक-दो नहीं, सैकड़ों। एक सफेद गमछा, सफेद बनियान, जिसके ऊपर पीला अचला। प्रेमानंद, राधा वल्लभ संप्रदाय में दीक्षित हैं, उनके दो दीक्षा गुरु हैं। 

 

राधा वल्लभ संप्रदाय में शरणागत मंत्र की दीक्षा, श्री हित मोहित मराल गोस्वामी ने दी। उनके दूसरे गुरु, जिन्हें 'बड़े गुरु' के नाम से लोग जानते हैं, वे हैं श्री हित गौरांगी शरण। गौरांगी ने प्रेमानंद को सहचरी भाव और नित्य विहार रस की दीक्षा दी।

 

प्रेमानंद की कीर्ति, अपने गुरुओं की लोकप्रियता से कहीं ज्यादा दूर तक फैली है। उनके अनुयायियों में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा जैसे अनगिनत सितारे हैं। वह ऐसे शिष्य हैं, जिनकी वजह से उनके गुरु लोकप्रिय हुए हैं।


रॉयल इनफील्ड और रेंज रोवर वाली 'मधुकरी' पर क्या सवाल पूछते हैं लोग?

आचार्य अनुभव, वृंदावन, कथावाचक:-
मधुकरी संतों की भिक्षा की एक परंपरा है। मधुमक्खी जैसे खूब सारे फूलों का रस चूसकर शहद बनाती है, वैसे ही साधु भी बिना गृहस्थों पर भार बने, पका अन्न ब्रज वासियों से लेते हैं। ब्रज और वृंदावन के संत समाज में यह अत्यंत पावन मानी जाती है। इसका मकसद, अहंकार और स्वाद की आसक्ति मिटाकर केवल शरीर-निर्वाह करना और प्रभु-भजन में लीन रहना है।

UP66AN8484। वृंदावन में अब लोगों को इस गाड़ी का नंबर याद हो गया है। WWE रेसलर और प्रेमानंद के शिष्य रिंकू सिंह राजपूत इस गाड़ी से मधुकरी मांगते अक्सर दिख जाते हैं। उनका प्रेमानंद को घुमाते हुए एक वीडियो अक्सर वायरल होता है। कुछ लोगों का कहना है कि आश्रम के पास महंगी गाड़ियों का काफिला है, करोड़ों के नेटवर्थ वाले शिष्य है, ट्रस्ट है, करोड़ों में फंड आता है तो यह मधुकरी मांगने का नाटक क्यों किया जाता है। 

शिवन सैनी, ब्रजवासी, ट्रैवेल एजेंट:-
वृंदावन के जो संत हैं, संन्यासी हैं और विधवाएं हैं, उन्हें मधुकरी चाहिए। एक आदमी की भिक्षा देने की सीमित क्षमता होती है, अगर 'वीर महान' और प्रेमानंद के चर्चित परिकर ही मधुकरी लेंगे तो आम संतों का क्या होगा। ये लोग इतने क्षमतावान हैं कि पूरे वृंदावन को रोज भोजन चखा दें। 


प्रेमानंद की महिमा क्या है?

 'बिहारी और किशोरी जू' के बाद अगर कोई एक तस्वीर हर दुकान, हर स्टॉल और कुंज गलियों में दिखती है तो वह तस्वीर प्रेमानंद की है। एक तस्वीर, जिसके साथ एक मंत्र लिखा है, 'कृष्णाय वासुदेवाय, हरये परमात्मने, प्रणत: क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः।'

 

वृंदावन में कई प्रसिद्ध हस्तियां है, कथा वाचक हैं लेकिन सबकी कीर्ति-यश को प्रेमानंद पार कर चुके हैं। लोग उनके आधिकारिक चैनल 'भजन मार्ग' पर करोड़ों की संख्या में जुड़े हैं। करोड़ों लोग वीडियो-ऑडियो सुनते हैं। उनके लाखों भक्त हैं। हर धर्म के लोग उनकी तारीफ करते हैं, वह सामाजिक सौहार्द, तप, सदाचार और भक्ति की बात करते हैं। लोगों को संयम और ब्रह्मचर्य सिखाते हैं। 

प्रेमनंद के बारे में ब्रजवासी सांवरी देवी बताती हैं, 'महाराज जी काशी से जब ब्रज आए तो अपने सहज अंदाज से लोगों के मन में बैठने लगे। हम उन्हें कई साल से जानते हैं। जब वह वीडियो-फोटो में नहीं आते थे तब से। वह सच्चे संत हैं। उनका काम लोगों का जीवन संवारना है, वह वही कर रहे हैं।'

जिन प्रेमानंद की दुनिया दीवानी, उनकी कहानी क्या?

प्रेमानंद का संन्यास के बाद नाम प्रेमानंद गोविंद शरण पड़ा। उनका असली नाम अनिरुद्ध कुमार पांडेय है। उनका जन्म 30 मार्च 1971 को कानपुर जिले के सरसौल ब्लॉक के अखरी गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। पिता शंभू पांडेय भक्ति-साधना में लगे रहते थे। माता रमा देवी साधु-संतों की सेवा करती थीं। 

13 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया और ब्रह्मचारी की दीक्षा लेकर वाराणसी चले गए। वहां वह गंगा घाटों पर रहे और ध्यान, शास्त्र अध्ययन और भिक्षा पर जीवन बिताया। बाद में वह वृंदावन पहुंचे और राधा वल्लभ संप्रदाय से जुड़े। उनका कहना है कि उन्हें शिव ने राधा भक्ति की प्रेरणा दी। उन्होंने गुरु श्री हित गौरांगी शरण जी महाराज से दीक्षा ली और श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण नाम अपनाया। 

प्रेमानंद राधआ केलि कुंज से लोकप्रिय हुए। उनके केलि कुंज में कुछ महीने पहले तक रोज सत्संग और एकांतिक वार्तालाप होता था। वह लोगों से मिलते थे, उनके प्रश्नों का समाधान करते थे। साल 2020 के बाद से उनके प्रवचन यूट्यूब जैसे मंचों पर लोकप्रिय हुए और युवाओं का बड़ा वर्ग उनसे जुड़ा। अब उनका कामकाज ट्रसट देखता है, जिसका काम रोज के भंडारे, मुफ्त चिकित्सालय और कपड़े बांटने जैसे सेवा कार्य करना है।

किस हाल में हैं प्रेमानंद?

प्रेमानंद, ऑटोसोमल डोमिनेंट पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज यानी ADPKD से जूझ रहे हैं। यह आनुवंशिक बीमारी है। वह बताते हैं कि 15 से 20 साल पहले उनके दोनों गुर्दों ने काम करना बंद कर चुके दिया था। वह डायलिसिस कराते हैं। इसके बावजूद उन्होंने प्रवचन की दिनचर्या लंबे समय तक जारी रखी है, अब भी वह प्रवचन करते दिखते हैं। कई भक्तों ने गुर्दा दान करने की पेशकश की लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया। उन्होंने कहा कि अपनी जान बचाने के लिए वे किसी दूसरे को कष्ट नहीं देना चाहते हैं। वृंदावन में इन दिनों उनकी महानता के चर्चे तो हैं लेकिन इस नए बवाल की आंच, उनकी शिष्य मंडली पर आ गई है, जिस पर लोगों का संदेह गहरा रहा है।