केंद्र सरकार अब किसानों से जुड़ी योजनाओं को उन तक पहुंचाने के लिए डिजिटल तकनीकों का सहारा ले रही है। सरकार के डिजिटल कृषि मिशन के तहत निर्धारित समय से 5 महीने पहले ही 11 करोड़ फार्मर आईडी यानी किसान विशिष्ट डिजिटल पहचान बनाने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। देश के 11 करोड़ किसानों के पास अब यह आईडी है और इससे वे कई तरह के लाभ ले सकते हैं। किसानों के मन में सवाल है कि क्या यह आईडी उनके लिए आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे दस्तावेजों की तरह होगी।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक, एग्रीस्टैक फ्रेमवर्क के तहत जारी होने वाली यह 14 नंबरों की विशिष्ट आईडी किसानों, उनकी भूमि के रिकॉर्ड और फसलों के डेटा को एक साथ जोड़ती है। इसकी मदद से पीएम किसान, KCC लोन, फसल बीमा, आपदा राहत और MSP खरीद का लाभ बिना कागजों के चक्कर में फंसे मिलेगा और किसान आसानी से सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।
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किसानों की डिजिटल पहचान
फार्मर आईडी को आसान भाषा में समझें तो यह किसान की एक खास डिजिटल पहचान है। जैसे आधार कार्ड से किसी व्यक्ति की पहचान होती है और PAN कार्ड का इस्तेमाल वित्तीय कामों में किया जाता है, वैसे ही फार्मर आईडी का मकसद किसान और खेती से जुड़ी जानकारी को एक जगह जोड़ना है।
यह केंद्र सरकार के डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत बनाए जा रहे एग्रीस्टैक का हिस्सा है। इसमें किसान की पहचान को आधार और राज्य के भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा जाता है। इससे किसान की जमीन, खेती और सरकारी योजनाओं से संबंधित जानकारी को वेरिफाई करना आसान हो सकता है। इस व्यवस्था को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि किसान को हर योजना के लिए बार-बार अपनी पहचान और जमीन से जुड़े दस्तावेज जमा न करने पड़ें। मौजूदा समय में किसान को हर एक योजना का लाभ लेने के लिए अलग से दस्तावेज जमा करने होते हैं और कागजी कार्रवाई पूरी करनी होती है।
क्या आधार की तरह इस्तेमाल होगी यह आईडी?
सरकार की योजना फार्मर आईडी को खेती से जुड़ी सेवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण पहचान बनाने की है। जिस तरह से आधार कार्ड एक डिजिटल आईडी बन गया है और इससे हर काम आसान हुआ है, उसी तरह फार्मर आईडी बनाने का प्लान है। आधार व्यक्ति की पहचान के लिए और PAN कार्ड मुख्य रूप से कर तथा वित्तीय लेन-देन से जुड़े कामों के लिए इस्तेमाल होता है।
ऐसे ही किसान आईडी का इस्तेमाल किसान की पहचान और उसके कृषि संबंधी रिकॉर्ड के इस्तेमाल में किया जाएगा। किसानों की जमीन और अन्य जानकारियां इस यूनिक आईडी में सेव होंगी और जब भी किसान को किसी योजना के लिए अप्लाई करना होगा तो उसकी सारी जानकारी इसी आईडी से ली जाएगी। इससे किसानों के समय की बचत होगी और बार-बार होने वाली परेशानी खत्म होगी।
क्या-क्या होंगे फायदे?
फार्मर आईडी का सबसे बड़ा फायदा सरकारी योजनाओं के लिए अप्लाई करने और उसके बाद वेरिफिकेशन की प्रक्रिया में होगा। इस आईडी से वेरिफिकेशन और अप्लाई करना काफी आसान हो जाएगा। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, MSP पर फसल की खरीद, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और लोन जैसी सुविधाओं में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
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फर्जीवाड़े पर भी लगेगी लगाम
कृषि मंत्रालय के अनुसार,फार्मर आईडी आधारित व्यवस्था के जरिए अब तक 6 करोड़ से अधिक किसानों को विभिन्न योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ मिल चुका है। हर एक किसान का डिजिटल रिकॉर्ड होने के कारण एक ही व्यक्ति बार-बार एक ही योजना के लिए अप्लाई नहीं कर सकता। इस आईडी से गड़बड़ियों को रोकने और सही लाभार्थी की पहचान करने में मदद मिल सकती है
