नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड यानी NDRF को लेकर 'कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल' (CAG) की एक रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, NDRF के लिए मंजूर 11,474 करोड़ रुपये में से करीब 6,118 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं हुए। यह फंड आपदा के समय राहत और जरूरी मदद से जुड़े खर्चों को पूरा करने के लिए होता है, जो 'स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड' (SDRF) की मदद करता है।
CAG की 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार, NDRF का 53 फीसदी से ज्यादा फंड का इस्तेमाल नहीं हुआ है। वह भी ऐसे समय में जब केरल और असम समेत कई राज्य विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान केंद्र सरकार से ज्यादा फंड की मांग कर रहे थे।
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CAG रिपोर्ट में क्या सामने आया?
हाल ही में संसद में पेश की गई CAG की 2024-25 की रिपोर्ट के मुताबिक, गंभीर आपदाओं के लिए राज्यों को NDRF के तहत कुल 11,474 करोड़ रुपये की मंज़ूरी दी गई थी। इसमें से राज्यों को केवल 5,356 करोड़ रुपये ही ट्रांसफर किए गए। बाकी बचे 6,117.97 करोड़ रुपये को CAG रिपोर्ट में बचत के तौर पर दिखाया गया है यानी 53 प्रतिशत से ज्यादा फंड का इस्तेमाल नहीं हुआ है। यह फंड 'स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड' (SDRF) को मदद देने के लिए होता है।
NDRF केंद्र सरकार का फंड होता है, जिससे बाढ़ और भूकंप जैसी बड़ी आपदाओं में राज्यों की मदद की जाती है। उस स्थिति में जब वह SDRF के दायरे से बाहर हो। SDRF हर राज्य का अपना फंड है, इसमें केंद्र और राज्य दोनों मिलकर इसमें पैसा डालते हैं, ताकि राज्य आपदाओं में तुरंत राहत कार्य के लिए खर्च कर सके। आसान भाषा में कहें तो SDRF राज्य का फंड होता है, जब आपदा बहुत बड़ी हो जाए और ज्यादा खर्च की जरूरत हो तब राज्य के SDRF को NDRF के तहत अलग से फंड दिया जाता है।
NDMF का पैसा भी नहीं किया गया ट्रांसफर
CAG ने 'राज्यों को ट्रांसफर' (Transfers to state) हेड के तहत इस बड़े अंतर को नोट किया है। इसमें 'नेशनल डिजास्टर मिटिगेशन फंड' (NDMF) से राज्यों को मिलने वाली मदद और विशेष सहायता भी शामिल है। बता दें कि NDMF का इस्तेमाल आपदा के जोखिम या असर को कम करने वाली योजनाओं को लागू करने के लिए किया जाता है। इसमें भी राज्यों का अपना SDMF होता है। CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, NDMF के तहत लगभग 75% फंड और राज्यों को दी जाने वाली विशेष सहायता का 83% से ज्यादा हिस्सा ट्रांसफर नहीं किया गया।
विशेष सहायता के लिए मंजूरी 20,000 करोड़ रुपये की थी, जिसमें से केवल 3,350 करोड़ रुपये ही खर्च हुए। NDMF के तहत राज्यों को मंजूर की गई 2,868 करोड़ रुपये की राशि में से केवल 719.72 करोड़ रुपये ही ट्रांसफर किए गए। इसके अलावा, केंद्र सरकार के पास 100 करोड़ रुपये का एक ग्रांट है जिसे 'प्राकृतिक आपदाओं के कारण राहत के लिए एडवांस सहायता के तौर पर लोन' के रूप में राज्यों को ट्रांसफर किया जा सकता है। सरकार ने इस खाते से एक पैसा भी खर्च नहीं किया है।
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राज्य लगातार कर रहे थे फंड की मांग
हाल ही में असम से कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि बाढ़ के दौरान राज्य ने जितनी NDRF सहायता मांगी थी, उसमें से केवल 2.4% ही मिली। 2023 में केरल ने वायनाड भूस्खलन के बाद पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार से NDRF के तहत 2221 करोड़ रुपये की मदद मांगी थी। एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद केंद्र ने सिर्फ 260.56 करोड़ रुपये मंजूर किए।
इसमें से पहली किस्त के तौर पर 76.16 करोड़ रुपये जारी हुए, उसके बाद बाकी रकम को लेकर राज्य और केंद्र के बीच विवाद खड़ा हो गया। मामला केरल हाई कोर्ट तक पहुंचा, जिसने राज्य से कहा कि वह यह साफ करने के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र दे कि पैसा कहां खर्च हुआ, और साथ ही केंद्र सरकार को भी याद दिलाया कि उसे सहकारी संघवाद यानी राज्यों के साथ मिलकर काम करने की भावना के साथ काम करना चाहिए।
2024 में सूखे से जूझ रहे कर्नाटक को भी मदद के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा। राज्य ने 18,000 करोड़ रुपये मांगे थे, लेकिन केंद्र ने केवल 3,499 करोड़ रुपये ही जारी किए। इसी तरह तमिलनाडु ने 2023 में चक्रवात 'मिचौंग' से हुए नुकसान की भरपाई के लिए 37,907.21 करोड़ रुपये की मांग की थी, लेकिन केंद्र ने इसके बदले में केवल 276 करोड़ रुपये ही मंजूर किए।
