पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के निशाने पर थे। यह खुलासा पश्चिम बंगाल पुलिस की एसआईटी ने एक संदिग्ध आतंकी की गिरफ्तारी के बाद किया है। जांच में सामने आया है कि इस मॉड्यूल के निशाने पर शुभेंदु के अलावा कई अन्य नेता भी थे। इन्हें पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों से निर्देश मिल रहे थे।
आरोपी ने पुलिस की वर्दी में दिल्ली के जंतर-मंतर में तोड़फोड़ और बवाल मचाने की भी साजिश रची थी। बंगाल एसटीएफ के महानिरीक्षक (IG) गौरव शर्मा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान हमीम मंडल के तौर पर हुई। एक दिन पहले यानी शुक्रवार को उसे पूर्वी बर्धमान जिले से पकड़ा गया था। कोलकाता में आरोपी से पूछताछ की गई। जांच में खुलासा हुआ कि हमीम पाकिस्तानी आकाओं के इशारे पर काम कर रहा था।
यह भी पढ़ें: पाकिस्तान में भी Gen Z प्रोटेस्ट, हजारों की भीड़ सड़कों पर; आजादी के लगे नारे
सीएम पर नजर रखने का सौंपा गया था काम: एसटीएफ
आईजी गौरव शर्मा ने कहा, 'सीएम उसके निशाने पर थे। हमीम को पाकिस्तान में बैठे आकाओं ने सीएम की गतिविधियों पर नजर रखने का काम सौंपा था। उसे उन स्थानों की जानकारी जुटाने को भी कहा गया था, जहां मुख्यमंत्री बिना सुरक्षा के मौजूद हो सकते थे।'
कैसे करता था पाकिस्तानी आकाओं से बात?
आईजी के मुताबिक सीएम शुभेंदु अधिकारी के अलावा कई अन्य नेता और पुलिस अधिकारी निशाने पर थे। आरोपी इंस्टाग्राम पर संपर्क बनाने के बाद व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप के माध्यम से पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलरों से बातचीत करता था। उसकी सोशल मीडिया चैट और मोबाइल फोन से चिंताजनक जानकारी मिली है।
एसटीएफ के मुताबिक आरोपी हमीम मंडल पाकिस्तान में बैठे 'राणा', 'उजैर', 'आबिद जट्ट 333' और 'हमाद' नाम के हैंडलर के संपर्क थे। शक है कि यह आतंकी मॉड्यूल पाकिस्तान के शाहजाद भट्टी गैंग से जुड़ा है।
यह भी पढ़ें: 'ईरान का भरोसा नहीं, हालात बिगड़ सकते', अमेरिका ने अपने नागरिकों को किया अलर्ट
छात्रों का आंदोलन भी था निशाने पर
जंतर-मंतर में छात्रों का प्रदर्शन भी पाकिस्तान के निशाने पर था। आईजी गौरव शर्मा ने बताया, 'पुलिस की वर्दी किसी तरह हासिल कर जंतर-मंतर पर हाल में हुए प्रदर्शन में तोड़फोड़ करने की साजिश थी। इसके अलावा कई पुलिस अधिकारियों और नेताओं को भी निशाना बनाने का षड्यंत्र था।
कैसे हुआ मॉड्यूल का भंडाफोड़?
कुछ दिन पहले हावड़ा में एक बड़े नेता के बेटे को हनीट्रैप में फंसाकर अपहरण करने की साजिश रची गई थी। बदले में नेता से फिरौती वसूलने का प्लान था। मगर इसकी जानकारी एसटीएफ को लगी तो मामले की जांच शुरू की गई।
आईजी ने बताया, 'कुछ दिन पहले हमें जानकारी मिली कि हावड़ा के एक वरिष्ठ नेता से फिरौती मांगने और उनके बेटे का 'हनी ट्रैप' के जरिए अपहरण करने की साजिश रची गई है। हमें बताया गया कि इसके पीछे एक संगठन है। इसी सुराग से हम साहिबगंज के एक सोशल मीडिया अकाउंट तक पहुंचे। इसका संचालन अर्पिता सरकार नाम की महिला कर रही थी। अर्पिता सरकार के सोशल मीडिया अकाउंट की जांच की गई। इसी दौरान अधिकारियों की निगाह हमीम मंडल पर गई। दोनों पिछले चार साल संपर्क में थे।'
