प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना यानी PM-KMY को अब सात साल पूरे हो चुके हैं। इस योजना की शुरुआत 12 सितंबर 2019 को हुई थी। बता दें कि इस योजना के तहत छोटे किसानों को बुढ़ापे में हर महीने 3,000 रुपये पेंशन के तौर पर मिलते हैं। फरवरी 2026 तक, देश भर में 24.96 लाख से ज्यादा किसान इस योजना से जुड़ चुके हैं। इसमें सबसे आगे हरियाणा है, जहां लगभग 5.75 लाख किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इसके बाद बिहार का नंबर आता है, जहां 3.46 लाख से ज्यादा किसान जुड़े हैं।
बता दें कि 2019 से लेकर फरवरी 2026 तक इस योजना को लागू करने और लोगों तक पहुंचाने के लिए सरकार ने 540.66 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं। हालांकि, आंकड़ों पर नजर डालें तो जिन राज्यों में छोटे और सीमांत किसानों की संख्या ज्यादा है, वहां रजिस्ट्रेशन बेहद कम हुए हैं। उत्तर प्रदेश इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
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प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (PM-KMY) है क्या?
आसान भाषा में कहें तो उन किसानों के लिए एक पेंशन योजना है, जिसमें छोटे और सीमांत किसान जुड़ सकते हैं। यानी ऐसे किसान जिनके पास 2 हेक्टेयर (करीब 5 एकड़) से कम जमीन है, वह इसका हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, इसके अलावा भी कई शर्तें हैं। जैसे 18 से 40 साल की उम्र के किसान इसमें शामिल हो सकते हैं। इस योजना के तहत किसान को हर महीने थोड़ा पैसा जमा करना होता है। उम्र के हिसाब से 55 रुपये से 200 रुपये तक, इसमें सरकार भी उतना ही पैसा अपनी तरफ से जमा करती है।
जब किसान की उम्र 60 साल हो जाती है, तो उसे हर महीने 3,000 रुपये पेंशन मिलने लगती है। आप अपनी मर्जी के हिसाब से इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। बता दें कि LIC (जीवन बीमा निगम) इस पेंशन फंड को संभालती है। किसान इसमें कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) जाकर या राज्य सरकार के जरिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इसका एक फायदा यह भी है कि अगर कोई किसान बीच में योजना छोड़ देता है, तो उसका जमा पैसा ब्याज के साथ वापस मिल जाता है।
दरअसल, खेती से कमाई कम और अनिश्चित होती है, खासतौर से छोटे किसानों की। इस योजना का मकसद है कि बुढ़ापे में इन किसानों के पास कमाई का एक पक्का जरिया हो, ताकि वे किसी पर निर्भर न रहें।
टॉप 10 राज्य जहां सबसे ज्यादा हुए रजिस्ट्रेशन
इस लिस्ट में टॉप पर है हरियाणा, जहां सबसे ज्यादा 574510 रजिस्ट्रेशन हुए, बिहार में 346326, झारखंड में 253459, उत्तर प्रदेश में 252528, छत्तीसगढ़ में 202913, ओडिशा में 157785, जम्मू और कश्मीर में 127019, मध्य प्रदेश में 117738, तमिलनाडु में 110669 और महाराष्ट्र में 80,769 रजिस्ट्रेशन हुए।
जहां सबसे ज्यादा किसान वहां कितनी पहुंची योजना?
सरकारी आंकड़ों को साथ रखकर देखें तो PM-KMY में फरवरी 2026 तक हरियाणा 5.75 लाख रजिस्ट्रेशन के साथ राज्यों में सबसे ऊपर है। वहीं उत्तर प्रदेश में करीब 2.53 लाख किसान इस योजना से जुड़े हैं लेकिन 2015-16 के आधिकारिक कृषि जनगणना आंकड़े के राज्यवार आंकड़ों के मुताबिक छोटे और सीमांत किसानों की संख्या उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा लगभग 2.21 करोड़ है।
इसके मुकाबले हरियाणा में ऐसे किसानों की संख्या करीब 11.16 लाख है। यानी रजिस्ट्रेशन की संख्या में हरियाणा आगे है, जबकि छोटे और सीमांत किसानों के संभावित आधार के मामले में उत्तर प्रदेश काफी आगे है।
बता दें कि PM-KMY के लिए सिर्फ छोटे और सीमांत किसान होना पर्याप्त नहीं है। इसमें 18 से 40 वर्ष की उम्र, 2 हेक्टेयर तक की खेती योग्य जमीन और राज्य के भूमि रिकॉर्ड में पात्रता जैसी शर्तें हैं। साथ ही NPS, ESIC, EPFO जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े किसान, आयकरदाता, सरकारी कर्मचारी और कुछ अन्य श्रेणियां भी योजना से बाहर हैं। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में कम रजिस्ट्रेशन के पीछे जागरूकता की कमी या दूसरे कारण भी हो सकते हैं।
आंकड़े यह दिखाते हैं कि सबसे ज्यादा छोटे-सीमांत किसानों वाले राज्यों में PM-KMY के रजिस्ट्रेशन की संख्या एक जैसी नहीं है। यूपी में करीब 2.21 करोड़ छोटे-सीमांत किसान (2015-16) के मुकाबले 2.53 लाख PM-KMY रजिस्ट्रेशन हैं, जबकि हरियाणा में 11.16 लाख छोटे-सीमांत किसानों के मुकाबले करीब 5.75 लाख रजिस्ट्रेशन हुए हैं।
