चंडीगढ़ और पंजाब के मोहाली में किसान एक बार फिर बड़े विरोध-प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं। यह विरोध-प्रदर्शन 1 सितंबर से शुरू होकर 7 सितंबर तक चलेगा, SKM (संयुक्त किसान मोर्चा) ने इसका ऐलान किया है। बता दें कि SKM में कुल 32 किसान संगठन शामिल हैं। इनमें भारतीय किसान यूनियन (BKU) राजेवाल, BKU डकौंदा, कीर्ति किसान यूनियन, BKU शादीपुर और पंजाब किसान यूनियन आदि शामिल हैं। जम्हूरी किसान सभा, पंजाब ने भी इस मोर्चे में पूरी तरह शामिल होने का ऐलान किया है।

 

किसानों की मांग केवल MSP गारंटी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ-साथ कर्ज माफी, गन्ने के दाम में बढ़ोतरी, पंजाब के नदी-जल अधिकारों की बहाली जैसी कई अहम मांगें भी शामिल हैं। इन्हीं मांगों को लेकर 1 से 7 सितंबर के बीच चंडीगढ़ में बड़ी तादाद में किसानों के ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लेकर पहुंचने की उम्मीद है। 

 

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क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद किसानों की उन मांगों से जुड़ा है, जो लंबे समय से अधूरे हैं। एक बार फिर सरकार का ध्यान खींचने के लिए किसान चडीगढ़ और मोहाली में धरना शुरू कर रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने अपनी पुरानी मांगों को दोहराते हुए इस आंदोलन का ऐलान किया है। SKM की मांगों में सभी फसलों पर डॉ. स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों के अनुसार कानूनी रूप से गारंटीकृत MSP, किसानों और मजदूरों का पूरा कर्ज माफ करना, गन्ने का दाम 500 रुपये प्रति क्विंटल करना और किसानों के लिए 10,000 रुपये मासिक वृद्धावस्था पेंशन शामिल है। 

 

किसानों की मांग है कि SKM ने पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर राज्य के नदी-जल से जुड़े सभी पुराने समझौतों को रद्द किया जाए, भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) में पंजाब की हिस्सेदारी बहाल हो, डैम सेफ्टी एक्ट को रद्द करने और डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2024 को वापस लेने की मांग की है। 

क्यों हो रहा है यह आंदोलन? 

किसानों का कहना है कि सरकार ने उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगें नहीं मानी हैं, इसलिए वे 1 से 7 सितंबर तक चंडीगढ़-मोहाली में इकट्ठा होकर सरकार का ध्यान खींचना चाहते हैं ताकि उनकी आवाज सुनी जाए। उनकी मांग है कि सभी फसलों पर डॉ. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक कानूनी गारंटी वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मिले। किसान नदी जल समझौते रद्द करने, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में पंजाब की भागीदारी बहाल करने और डैम सेफ्टी एक्ट हटाने की मांग भी कर रहे हैं, ताकि राज्य का पानी पर अधिकार बना रहे। 

 

इसके अलावा, किसान अपना और मजदूरों का पूरा कर्ज माफ करवाना चाहते हैं। वह सड़क और लैंड पूलिंग नीति के तहत जमीन छीने जाने का विरोध कर रहे हैं, और बिजली बिल 2025, बीज बिल 2025 और अमेरिका-यूरोप के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौतों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इनके साथ गन्ने का उचित दाम, बुजुर्ग किसानों-मजदूरों के लिए पेंशन जैसी मांगें भी शामिल हैं। किसानों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है। 

कौन हैं इस आंदोलन में शामिल 

इस आंदोलन का नेतृत्व संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) कर रहा है, जो पंजाब के 32 किसान संगठनों (BKU राजेवाल, BKU डकौंदा, कीर्ति किसान यूनियन, BKU शादीपुर, पंजाब किसान यूनियन आदि) का साझा मंच है। रामिंदर सिंह पटियाला और बलबीर सिंह राजेवाल जैसे नेता लीड कर रहे हैं। इसके अलावा, जम्हूरी किसान सभा, पंजाब भी इस धरने में पूरी तरह शामिल हो रही है। दूसरी ओर BKU उगराहां इस धरने से अलग रहकर 17 जिलों में अपने खुद के धरने कर रहा है।

 

दूसरी ओर पंजाब सरकार और चंडीगढ़-मोहाली प्रशासन हैं, जो धरने की अनुमति और व्यवस्था संभाल रहे हैं। किसानों की कई मांगें जैसे MSP गारंटी, अमेरिका-यूरोप से मुक्त व्यापार समझौता, बिजली बिल और बीज बिल केंद्र सरकार से जुड़ी हैं।

कहां हो रहा है आंदोलन?

यह धरना प्रदर्शन चंडीगढ़ और मोहाली के सेक्टर 48-C में हो रहा है, जो IISER टी-पॉइंट से त्रिब्यून चौक जाने वाली सड़क, बेस्टेक स्क्वायर मॉल चौराहे से आगे करीब 2.5 से  2. 75 किमी की दूरी पर है। इस जगह का कुछ हिस्सा मोहाली में और कुछ चंडीगढ़ में आता है। पार्किंग के लिए सड़क का बायां हिस्सा, नजदीकी पार्क और मोहाली गोल्फ क्लब तय किए गए हैं। इसके अलावा, जगह भरने पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियां मोहाली रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाली न्यू एयरपोर्ट रोड (बावा लाइट हाउस रोड) पर पार्क होंगी। 

कब क्या हुआ? 

बता दें कि किसानों की MSP गारंटी की मांग दिसंबर 2021 के एक पुराने वादे से जुड़ी है, यह अब तक पूरा नहीं हुआ। SKM समय-समय पर चंडीगढ़ और मोहाली में धरने करता आया है। मार्च 2025 में भी किसान चंडीगढ़ जाने की कोशिश में थे, पुलिस ने रोक दिया और कई नेताओं को हिरासत में लिया। इसके बाद किसानों ने पंजाब विधानसभा तक मार्च निकाला था। 

 

पहले भी किसान राज्यपाल को अपनी मांगें सौंपने चंडीगढ़ आते रहे हैं और अब यह बड़ा धरना हो रहा है, जिसकी तैयारी पहले से ही शुरू हो गई थी। आंदोलन से पहले ही बैरिकेड लगे, खाने का इंतजाम हुआ और सड़कों पर रूट बदले गए। किसान अपना-अपना सामान लेकर धरना स्थल पर पहुंच रहे हैं।