भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राष्ट्रीय महासचिव और हरियाणा प्रभारी स्मृति ईरानी ने हरियाणा सरकार से राज्य के सभी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के जिला अध्यक्षों को दी गई सुरक्षा हटाने का अनुरोध किया है। शुक्रवार को पंचकूला में आयोजित बैठक में बीजेपी नेताओं की रीलबाजी पर स्मृति ईरानी भड़क गईं। उन्होंने बैठक में सवाल उठाया कि अगर जिला स्तर के नेता ही भारी सुरक्षा घेरे में रहेंगे तो आम जनता उनसे कैसे जुड़ेगी।
स्मृति ईरानी ने हाल ही में हरियाणा प्रभारी का पद संभाला है। प्रभारी बनने के बाद यह उनका पहला हरियाणा दौरा था। शुक्रवार को ही उन्होंने संदेश दिया है कि रीलबाजी नहीं चलेगी। अब बीजेपी से जुड़े सूत्रों का दावा है कि यही संदेश राष्ट्रीय स्तर पर भी जारी किया जाएगा। बीजेपी की तैयारी है कि चुनाव में खुद को हाई प्रोफाइल नेता नहीं, आम कार्यकर्ता और जनसेवक के तौर पर पदाधिकारी जाएं और जनता से संवाद करें।
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क्यों सख्त हुईं हैं स्मृति ईरानी?
बीजेपी नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि गुरुग्राम भारतीय जनता पार्टी के कई जिलाध्यक्ष सोशल मीडिया पर खूब रील बनाते हैं। उनकी कुछ तस्वीरें स्मृति ईरानी के पास पहुंची, जिस पर उन्होंने सख्ती जताई। कई और नेताओं की रीलबाजी भी उन तक पहुंची। इन नेताओं के आसपास सुरक्षा घेरा, पुलिसकर्मी मौजूद नजर आए। पंचकूला में जिलाध्यक्षों की बैठक में भी ऐसी ही रीलबाजी दोहराई जा रही थी।
स्मृति ईरानी के स्वागत को लेकर जिलाध्यक्ष बेताब नजर आ रहे थे। रील बनाने की तैयारी चल रही थी। अचानक वह नाराज हुईं और इस प्रथा पर आपत्ति जताई। उनका साफ संदेश है कि आम कर्यकर्ता की तरह आम लोगों से मिलें, बेवजह पुलिस और सुरक्षा की रीलबाजी ठीक नहीं है, जनता में गलत संदेश जाता है।
VIP कल्चर से नाराज हैं स्मृति ईरानी?
सूत्रों के मुताबिक हरियाणा बीजेपी की प्रदेश स्तरीय अहम बैठक से पहले गुरुग्राम के 'गुरुकमल' दफ्तर में पुलिस बल की स्थायी तैनाती से जुड़ी तस्वीरें और शिकायतें सामने आने पर भी प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने साफ कहा कि जनता और कार्यकर्ताओं का सेवक होने का दावा करने वाले नेताओं को अपने ही लोगों के बीच सुरक्षा घेरे की कोई जरूरत नहीं है। संगठन में वीआईपी संस्कृति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके तुरंत बाद राज्य भर के जिला अध्यक्षों के वाहनों से सुरक्षाकर्मी हटा दिए गए।
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संतुलन बना रहीं स्मृति ईरानी?
हरियाणा बीजेपी के नए प्रभारी के तौर पर स्मृति ईरानी की नियुक्ति को केंद्र द्वारा राज्य की सियासत में 'शक्ति संतुलन' साधने की एक नपी-तुली कवायद माना जा रहा है। वह संगठन में पकड़ मजबूत कर रहीं हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के मजबूत प्रभाव वाले प्रांतीय समीकरणों के बीच पार्टी ने एक ऐसे कद्दावर और निष्पक्ष चेहरे को कमान सौंपी है जो किसी भी स्थानीय गुटबाजी से पूरी तरह बेअसर है।
केंद्र का यह कदम जमीनी कार्यकर्ताओं और शीर्ष सत्ता के बीच संवाद का संतुलन बनाकर संगठन को मजबूत करने की कवायद है। दिल्ली से सीधे जुड़े एक प्रभावशाली राष्ट्रीय नेता की मौजूदगी के जरिए केंद्रीय नेतृत्व ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि सत्ता और संगठन के बीच कोई एक धड़ा हावी नहीं होगा, दोनों के बीच नियंत्रण और समन्वय की अंतिम डोर आलाकमान के हाथ में ही रहेगी।
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बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने पर जोर
अगले तीन महीनों के भीतर राज्य के प्रत्येक बूथ पर 11 सदस्यीय समितियों का गठन या पुनर्गठन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त पार्टी हर बूथ पर 'पन्ना प्रमुख' भी नियुक्त करेगी, जो मतदाता सूची के एक-एक पन्ने से जुड़े मतदाताओं से सीधा संपर्क बनाए रखते हैं।
किस समीकरण पर है बीजेपी का जोर?
पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी विभिन्न जिलों का दौरा कर कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे। जिलों में रात्रि प्रवास कर संगठन की गतिविधियों की समीक्षा करेंगे और पुराने व समर्पित कार्यकर्ताओं से दोबारा संपर्क साधेंगे।
