सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाने का आश्वासन देती है तो वह अपनी भूख हड़ताल को खत्म करने पर विचार करेंगे। सोनम वांगचुक का यह पत्र मंगलवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बात आया।
सोनम वांगचुक ने अपने पत्र में लिख, 'कल रात अस्पताल में मुझसे मिलने और मेरा अनशन खत्म करने की आपकी ईमानदार अपील के लिए धन्यवाद। हमारी बातचीत के दौरान आपने मुझे भरोसा दिलाया कि सरकार उन छात्रों के परिवारों के लिए उचित मुआवजे पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी, जिन्होंने पेपर लीक होने के बाद आत्महत्या की थी।
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मंत्री के इस्तीफे पर विचार करने का आश्वासन मिला: सोनम
उन्होंने अपने पत्र में सरकार से मिले आश्वासन का भी जिक्र किया और कहा, 'यह भी भरोसा दिलाया गया कि जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा होगी, जिसमें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार करना भी शामिल है। मैं सरकार से सम्मानपूर्वक यह स्पष्ट आश्वासन चाहता हूं कि इस आंदोलन में भाग लेने वाले किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।'
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'आश्वासन नहीं मिला तो अनशन रहेगा जारी'
सोनम ने आगे कहा, 'उनका एकमात्र अपराध एक निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा प्रणाली के लिए आवाज उठाना है। अगर ऐसा आश्वासन दिया जाता है तो मैं इस विश्वास के साथ अपना अनशन समाप्त कर दूंगा कि सरकार ने न केवल मेरी अपील सुनी है, बल्कि लाखों युवा भारतीयों की आकांक्षाओं को भी सुना। ऐसे आश्वासन के अभाव में मैं अनिश्चित काल तक अपना अनशन जारी रखने पर मजबूर हो जाऊंगा। मुझे यह भी उम्मीद है कि आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस बल का अत्यधिक इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।'
