सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस को खुली छूट देने का निर्देश मांगा गया था। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि अदालत जानती है कि इनमें से कई प्रदर्शनकारी युवा छात्र हैं। उनके भविष्य और परिवारों का ध्यान रखना जरूरी है।

CJI सूर्यकांत ने कहा कि ये युवा छात्र हैं और अदालत को इनके माता-पिता को देखना है। उन्होंने कहा कि इनके सामने लंबा जीवन है और ये अदालती सुनवाइयों जैसी चीजों में न उलझें। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जिन पर कट्टर अपराधी होने या गंभीर अपराधों के आरोप हैं, उन्हें उसके पहले के आदेशों से मिली सुरक्षा का लाभ नहीं मिलेगा।

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'युवा छात्रों को अदालती कार्यवाही में उलझाना नहीं है'

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच न कहा कि प्रदर्शनों में शामिल युवा छात्रों का भविष्य और उनके अभिभावकों की चिंता भी देखनी होगी। CJI ने कहा कि ये युवा छात्र और प्रदर्शनकारी हैं, उन्हें लंबी अदालती कार्यवाही में नहीं उलझाना चाहिए। 

किसने दाखिल की थी यह याचिका?

याचिकाकर्ता एल रामनाथन ने दलील दी थी कि पुलिस स्वतंत्र और संप्रभु है, इसलिए उसके काम में न्यायिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। बेंच ने कहा कि यह मांगी गई राहत 1 सितंबर के उस आदेश की समीक्षा जैसी है, जिसमें जंतर-मंतर पर जुलाई के प्रदर्शनों से जुड़े छात्रों के खिलाफ एफआईआर रद्द की गई थीं।

 

 

10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले पाबंदियों पर भी याचिका

9 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक अलग याचिका दायर की गई। इसमें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 10 अक्टूबर के प्रदर्शनों से पहले लगाई गई पाबंदियों को चुनौती दी गई है। ये प्रदर्शन मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ घोषित किए गए हैं। याचिका में दिल्ली आने वाली ट्रेनें रद्द करने, मेट्रो स्टेशन बंद करने और इंटरनेट बंद करने पर सवाल उठाया गया है।

वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने बिना लिस्ट हुए मामले का उल्लेख किया और उसी दिन सुनवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि दिल्ली और निजामुद्दीन आने वाली कई ट्रेनें रद्द हैं। होटलों से मेहमानों को न ठहराने को कहा गया है। CJI ने पूछा कि दिल्ली हाईकोर्ट का रुख क्यों नहीं किया गया। सिब्बल ने बताया कि इंडियन यूथ कांग्रेस की ऐसी ही याचिका हाईकोर्ट में है, जिसकी सुनवाई सोमवार तक टल गई है।

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सुप्रीम कोर्ट ने कपिल सिब्बल से क्या पूछा?

सुप्रीम कोर्ट ने बेंच से पूछा कि क्या सिब्बल किसी प्रदर्शन आयोजक की ओर से पेश हो रहे हैं। सिब्बल ने कहा कि वे CPI(M) नेता एमए बेबी की ओर से हैं, जो आयोजक नहीं हैं। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि अनुमति के लिए आवेदन नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि अनुमति के बिना प्रदर्शन गैरकानूनी होगा। जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि कोर्ट पाबंदियों पर रोक लगा सकता है, लेकिन भीड़ जुटने पर भी रोक लगाएगा।

दिल्ली को छावनी में बदल दिया है?

वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि राजधानी में अभूतपूर्व इंतजाम किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक CAPF की 221 कंपनियां तैनात हैं और 10 डिटेंशन सेंटर तैयार किए जा रहे हैं। OYO होटलों को नई बुकिंग न लेने को कहा गया है। यूट्यूबर्स पर कार्रवाई हो रही है और मीडिया से पहचान पत्र साथ रखने को कहा गया है। वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने प्रभावित निवासियों की ओर से कहा कि कोर्ट को देखना होगा कि ये कदम अनुपात में हैं या नहीं।

अब अगली तैयारी क्या है?

वकील वृंदा ग्रोवर ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने CJP को प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी, लेकिन CJP इस आदेश को चुनौती नहीं दे रही। उन्होंने कहा कि तय जगह पर इतनी बैरिकेडिंग है कि कोई वहां पहुंच नहीं सकता। CJI ने कहा कि सोमवार तक मामला आंशिक रूप से निरर्थक हो जाएगा। कपिल सिब्बल और अन्य वकीलों ने दोपहर 2 बजे आयोजक की याचिका के साथ दोबारा आने की बात कही। CJI ने सुझाव दिया कि हाईकोर्ट से आज ही दोपहर 3 बजे मामला सुनने को कहा जा सकता है।