तीन राज्यों की कुल 5 विधानसभा सीटों और एक राज्य की एक लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव मंगलवार को होना है। प्रचार खत्म हो चुका है और अब साइलेंट पीरियड जारी है। एक तरफ दक्षिण में तमिलनाडु की दो विधानसभा सीटों के लिए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय अकेले की दम पर सरकार चलाने की ओर बढ़ना चाहते हैं। दूसरी ओर लगातार बिखरती ममता बनर्जी को एक अदद जीत की दरकार है। पश्चिम बंगाल की एक सीट ऐसी भी है जो भविष्य में ममता बनर्जी और कांग्रेस को साथ लाने की सूत्रधार बन सकती है। असम की नौगांव लोकसभा सीट पर भी उपचुनाव है जहां कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच हाई वोल्टेज मुकाबले की उम्मीद है।
इन सभी सीटों के लिए मंगलवार यानी 6 अक्तूबर को वोटिंग होगी। इन चुनावों के नतीजे 9 अक्तूबर को होंगे। ये चुनाव तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन रंगास्वामी के साथ-साथ कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए भी बेहद अहम माने जा रहे हैं।
असम में हिमंत को टक्कर दे पाएगी कांग्रेस?
असम में बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुकी कांग्रेस के लिए खुद के पांव जमाने का एक और मौका है। नौगांव लोकसभा सीट से उसके दो बार के सांसद रहे प्रद्युत बोरदोलोई अब बीजेपी में जा चुके हैं और विधानसभा चुनाव जीतकर हिमंत बिस्व सरमा की सरकार में मंत्री बन गए हैं। उन्हीं के इस्तीफे के कारण खाली हुई इस सीट पर कांग्रेस ने शिवमनी बोरा को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं, बीजेपी ने देबाशीष सरमा को कैंडिडेट बनाया है जो पूर्व में अधिकारी रहे हैं। इस मुकाबले को और रोचक बनाने के लिए मौजूदा विधायक और AIUDF के मुखिया बदरुद्दीन अजमल भी चुनाव में उतर गए हैं। कांग्रेस के लिए थोड़ी राहत की बात है कि उसने अपने उम्मीदवार अब्दुल सलाम को यहां से वापस ले लिया है।
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आत्मनिर्भर होने की ओर हैं विजय?
धरापुरम: धरापुरम विधानसभा सीट पर पी सत्यभामा AIADMK के टिकट पर चुनाव जीती थीं। बाद में वह TVK में शामिल हो गईं और उपचुनाव में TVK ने उन्हें ही उम्मीदवार बनाया है। 2026 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर विजय की TVK तीसरे नंबर पर थी। अब सत्यभामा का मुकाबला DMK उम्मीदवार एस सुगन्या और AIADMK के उम्मीदवार के बानुमती से होना है।
मदुरंतकम: धरामपुरम की तरह ही मदुरंतकम सीट पर भी AIADMK की जीत हुई थी। लगातार दूसरा चुनाव जीतीं के मरागतम AIADMK छोड़कर TVK में शामिल हो गईं और अब वही उम्मीदवार हैं। वहीं, AIADMK ने पूर्व विधायक के एस कनिता संपत को तो डीएमके ने प्रनातमेन को उम्मीदवार बनाया है।
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इन दोनों ही सीटों पर हो रहे उपचुनाव के लिए विजय ने जमकर पसीना बहाया है। दरअसल, विजय की पूरी कोशिश है कि वह धीरे-धीरे ही सही लेकिन तमिलनाडु में अपने दम पर अपनी सरकार चला सकें। 234 विधानसभा सीटों वाले तमिलनाडु में बहुमत के लिए 118 विधायक चाहिए लेकिन विजय की TVK के 108 विधायक ही चुनाव जीते थे। बाकी की 10 सीटों के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी थी और ऐसे दलों का साथ भी लेना पड़ा जो पहले DMK के साथ थे।
यही वजह है कि तमिलनाडु में अब 7 विधानसभा सीटों के विधायक इस्तीफा दे चुके हैं। इसमें से एक सीट पहले से TVK के कब्जे में थी। बाकी की 6 सीटों के विधायक अब TVK में शामिल हो चुके हैं। अगर ये 6 फिर से जीतकर विधायक बन जाते हैं और TVK अपनी सीट बरकरार रखती है तो उसके विधायकों की संख्या 114 तक पहुंच जाएगी। चर्चा है कि ये नतीजे देखकर और भी विधायक पाला बदल सकते हैं। इस तरह विजय को बैसाखियों की जरूरत नहीं होगी और वे तमिलनाडु में अपने गठबंधन सहयोगियों की मर्जी पर चलने के बजाय अपनी मर्जी से सरकार चला सकेंगे।
ममता बनर्जी को आखिरी चोट की तैयारी
पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। पहली बार ऐसा हो रहा है कि नाम तो ममता बनर्जी की पार्टी का नाम बचा है और ना ही निशान बचा है। पार्टी के असली कब्जे को लेकर हुए विवाद के चलते ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के नाम और निशान को चुनाव आयोग ने फ्रीज कर दिया है। ममता बनर्जी का धड़ा अब ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम से चुनाव मैदान में है। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी वाले धड़े का नाम डेमोक्रैटिक तृणमूल कांग्रेस हो गया है।
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नंदीग्राम: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के कारण खाली हुई नंदीग्राम विधानसभा सीट पर ममता बनर्जी ने अपना उम्मीदवार वापस ले लिया है और कांग्रेस को समर्थन दिया है। कांग्रेस के मिलन प्रधान गिरफ्तार होने के बाद जमानत पर आ गए हैं। उनका मुकाबला बीजेपी की उम्मीदवार हसिरानी रथ से है। हसिरानी रथ शुभेंदु अधिकारी के पीए रहे चंद्रनाथ रथ की मां हैं। ऋतब्रत बनर्जी की पार्टी ने यहां से एहतेश्मुल हक को उतारा है। वहीं, सीपीआई ने शांति गोपाल गिरी को टिकट दिया। इस सीट से लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके शुभेंदु अधिकारी के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का सवाल है। वहीं, ममता बनर्जी के लिए खोई हुई प्रतिष्ठा वापस पाने का।
रेजीनगर: TMC से निकाले जाने के बाद आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) बनाने वाले हुमायूं कबीर दो सीटों से चुनाव जीते थे। उन्होंने अपने बेटे गुलाम नबी आजाद को ही यहां से उतारा लेकिन प्रचार नहीं किया। बीजेपी ने यहां से शंखराव सरकार को उतारा है। ममता बनर्जी के धड़े ने इसी सीट से तीन बार विधायक रहे रबीउल आलम चौधरी को टिकट दिया है। इन दोनों ही सीटों पर ममता बनर्जी की पार्टी चुनाव हारी है। रबीउल कांग्रेस में भी रहे हैं और उनका दावा मजबूत भी माना जा रहा है। अगर हुमायूं कबीर ने आखिरी दिन किसी एक पक्ष का समर्थन कर दिया तो इस सीट पर बड़ा खेल हो सकता है।
अगर रेजीनगर में ममता बनर्जी की पार्टी चुनाव जीतती है तो यह उसके लिए संजीवनी जैसा होगा। लगातार टूट रही पार्टी और खतरे में पड़े नाम-निशान के बीच यह जीत अलग माहौल बना सकती है। इसके अलावा, अगर कांग्रेस को नंदीग्राम में जीत मिलती है तो पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और ममता बनर्जी के साथ आने का रास्ता भी खुल सकता है।
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पुडुचेरी की एक सीट पर उपचुनाव
पुडुचेरी की एक विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव हो रहे हैं। मुख्यमंत्री एन रंगास्वामी दो सीटों से चुने गए थे। उन्हें थत्तनचावड़ी सीट को छोड़कर मंगलम अपने पास रखी। अब थत्तनचावड़ी में उपचुनाव हो रहे हैं। सीएम रंगास्वामी की AINRC ने यहां से अशोक आनंद को उतारा है। अशोक आनंद इसी सीट से दो बार विधायक भी रह चुके हैं। कांग्रेस ने यहां से इस बार वैदलिंगम की जगह उन विनयगम को उतारा है जो पिछला चुनाव NMK के टिकट पर लड़े थे और दूसरे नंबर पर रहे थे। कांग्रेस से गठबंधन टूटने के चलते DMK ने पिछले चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी रहे के सेतुसेल्वम को अपना उम्मीदवार बनाया है।
