5 अगस्त 2024 को छात्र आंदोलन की आड़ में बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को न केवल अपदस्थ किया गया, बल्कि देश छोड़ने पर भी मजबूर किया गया। पिछले दो साल से शेख हसीना ने भारत में अज्ञात स्थान पर शरण ले रखी है। बांग्लादेश ने हसीना को शरण देने पर कई बार आपत्ति दर्ज कराई और प्रत्यर्पण की मांग की।

 

दो साल बाद 5 अगस्त को शेख हसीना ने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की तो भारत और बांग्लादेश के बीच नया तनाव पैदा हो गया। 3 अगस्त को ही बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित न करने की गुहार लगाई थी, लेकिन भारत ने कहा कि यह एक निजी मीडिया क्रार्यक्रम पर है। उस पर भारत सरकार का कोई दखल नहीं है। 

 

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सबसे बड़ी परीक्षा बाकी

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम दोनों देशों के रिश्तों को और निचले स्तर तक ले जा सकता है। मगर सबसे बड़ी परीक्षा दिसंबर में तब होगी जब शेख हसीना दो साल चार महीने बाद ढाका लौटेंगी। 

 

शेख हसीना के बाद 8 अगस्त 2024 को मोहम्मद यूनुस को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का मुखिया बनाया गया। यूनुस ने भारत से रिश्ते बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। चीन यात्रा में पूर्वोत्तर जिक्र किया। पाकिस्तान और तुर्की से रिश्तों को बेहतर बनाने की हर मुमकिन कोशिश की। भारत विरोधी तत्वों को बढ़ावा दिया और भारत के खिलाफ नफरत को आम किया। शेख हसीना की वापसी तनाव की सबसे बड़ी वजह रही।   

भारत ने की रिश्तों को सुधारने की पहल

17 फरवरी 2025 को तारिक रहमान बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बने। उससे पहले उनकी मां खालिदा जिया के निधन पर भारत ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को तनाव के बीच ढाका भेजा था। तारिक रहमान और एस. जयशंकर के बीच मुलाकात भी हुई। इसे सुधारते रिश्तों की नींव की तरह देखा गया। लेकिन आज दो साल बाद बांग्लादेश और भारत के बीच रिश्ते उसी जगह पर पहुंच गए हैं, जहां मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार छोड़कर गई थी।

हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस से आई खटास

अपने चुनावी अभियान में तारिक रहमान ने कहा था कि उनकी विदेश नीति किसी देश के प्रति झुकी नहीं रहेगी। चीन, भारत और पाकिस्तान के साथ समान रिश्ते होंगे। यूनुस की तुलना में तारिक सरकार ने भारत के प्रति नरम रुख अपनाया। बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा थमी। भारत विरोधी हवा मंद पड़ी। नई दिल्ली में ढाका के साथ अच्छे रिश्तों की उम्मीद बढ़ने लगी, लेकिन शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने रिश्तों में नई नाराजगी पैदा कर दी है।

क्यों अलर्ट हुआ भारत?

तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पहुंचे थे। अप्रैल महीने में ही बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने नई दिल्ली का दौरा किया। भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को भी नई दिल्ली आने का न्योता भेजा था। अभी तक तारिक ने भारत का दौरन नहीं किया। उन्होंने अपनी पहली राजकीय यात्रा के तौर पर मलेशिया और चीन को चुना। तारिक रहमान की रणनीति को भारत को नजरअंदाज करने के तौर पर देखा गया।

 

दूसरी तरफ चीन और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारी बांग्लादेश पहुंचे। भारतीय सीमा से सटे इलाकों का भी दौरा किया। यही से भारत सतर्क हुआ। बंगाल में सीमा पर बाड़बंदी करने पर भी बांग्लादेश ने अड़ंगा लगाने की कोशिश की। असम और बंगाल से लौटते बांग्लादेशी नागरिकों के मुद्दे पर भी तनाव हुआ।

 

शेख हसीना की सरकार पहले इन मामलों में भारत के हितों को ध्यान में रखती थी। मगर यूनुस की अंतरिम सरकार और तारिक रहमान को इसकी कोई परवाह नहीं रही।

बांग्लादेश ने क्या चेताया?


हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस का असर यह हुआ कि बांग्लादेश में कई जगह हिंसा भड़की। ढाका में हसीना का पुतला जलाया गया। क्रिकेटर शाकिब अल हसन के घर पर पेट्रोल बम से हमला हुआ। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया में कहा कि इस प्रकार के आयोजन की अनुमति देने से भारत के साथ राजनयिक रिश्तों में तनाव आ सकता है। 

दिसंबर में असली चुनौती

आशंका है कि अगर शेख हसीना दिसंबर में ढाका लौटती हैं तो बांग्लादेश को एक और संकट का सामना करना पड़ सकता है। हसीना के विरोधी हिंसा का सहारा ले सकते हैं। अवामी लीग के कार्यकर्ताओं के साथ झड़प हो सकती है। तारिक रहमान सरकार पर हसीना के खिलाफ कार्रवाई करने का नैतिक दबाव बढे़गा। कार्रवाई करने पर भारत से रिश्ते बिगड़ेंगे और एक्शन नहीं लेने पर जनता और कट्टरपंथी नाराज हो सकते हैं।

 

शेख हसीना के सामने बड़ा जोखिम

विशेषज्ञों का मानना है कि शेख हसीना की वापसी न केवल अवामी लीग के सियासी भविष्य को तय करेगा, बल्कि अभी तक छिपे नेताओं और कार्यकर्ताओं में एक नया जोश भरेगा। कुछ का यह भी मानना है कि हसीना अपने जीवन का बड़ा दांव खेलने जा रही हैं। उन्हें अदालत से मौत की सजा मिली है। ऐसे में ढाका वापसी बेहद जोखिम भरी है।

भारत के सामने क्या चुनौतियां?

शेख हसीना की वापसी और बांग्लादेश में उथल-पुथल मचने की स्थिति में भारत के साथ ढाका के रिश्ते बिगड़ सकते हैं। दूसरा जोखिम यह है कि आम जनता में भारत के खिलाफ नफरत बढ़ सकती है। बांग्लादेश अभी तुर्की और पाकिस्तान के साथ रिश्तों को न केवल बेहतर कर रहा है, बल्कि रणनीतिक साझेदारी भी बढ़ा रहा है। भारत से रिश्ते बिगड़ने की स्थिति में यह दोस्ती और भी गहरी होने का खतरा है। भारत के सामने यह चुनौती है कि इन सभी मुद्दों को हल करते हुए शेख हसीना की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की है।

बांग्लादेश ने क्या आरोप लगाया?

 हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा, 'बांग्लादेश आक्रोशित है। हत्या की दोषी हसीना और उसके माफिया गिरोह को बांग्लादेश की राजनीति में कभी कोई स्थान नहीं मिलेगा।' मंत्रालय ने अपने बयान में आगे कहा कि भारत ने हसीना को अपनी धरती का इस्तेमाल करने की इजाजत देकर बांग्लादेश की संप्रभुता और जुलाई क्रांति के शहीदों का घोर अपमान किया है।

 

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शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार का इसमें किसी प्रकार का कोई दखल नहीं है। न ही सरकार इसमें व्यक्त किए गए किसी भी विचार का समर्थन करती है।

 

हमने इस कार्यक्रम के संबंध में अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर दिया था। मैं उस रुख को दोहरा रहा हूं। एक निजी मीडिया संगठन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। रणधीर जायसवाल, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय।

 

भारत के विरुद्ध बयानबाजी भी शुरू

जमात-ए-इस्लामी ने भारत पर राजनयिक मानदंडों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। यह एक ऐसा संगठन है, जिसका हमेशा ही भारत विरोधी रुख रहा है।

 

बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के महासचिव मिया गुलाम परवार ने कहा कि बांग्लादेश के बार बार अनुरोध के बावजूद भारत ने शेख हसीना को शरण देना जारी रखा। अब प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की अनुमति दी। आरोप लगाया कि नई दिल्ली ने शेख हसीना को वापस भेजने के बांग्लादेश के राजनयिक अनुरोध को कई बार नजरअंदाज किया। उन्होंने भारत पर राजनयिक मानदंडों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।

 

बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने भी हसीना पर बांग्लादेश में अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाया। इन बयानबाजी से साफ है कि आने वाले दिनों में भारत और बांग्लादेश के रिश्तों की असली अग्निपरीक्षा बाकी है।