पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में बीते हफ्ते एक छात्रा के साथ कथित बलात्कार की शिकायत सामने आई। सोशल मीडिया पर खबर वायरल होने के बाद भारी हंगामा और छात्र प्रदर्शन हुआ। विश्वविद्यालय प्रबंधन की सफाई और इंकार के बावजूद मामला शांत नहीं हुआ। यह पहली बार नहीं है, कोलकाता के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक इंटर्न डाक्टर के साथ रेप के बाद उसकी हत्या का मामला अब भी लोगों के जेहन में ताजा है। 

 

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के आंकड़ों से पता चलता है कि यूनिवर्सिटी और कॉलेजों द्वारा रिपोर्ट किए गए सेक्सुअल हैरेसमेंट के मामलों में पिछले कुछ सालों में बहुत ज्यादा बदलाव आया है। UGC के साल 2022-23 के आंकड़ों के मुताबिक, यह संख्या 425 दर्ज की गई।   

 

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रिपोर्ट किए गए सेक्सुअल हैरेसमेंट के मामले

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के आंकड़ों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के जरिए रिपोर्ट किए गए सेक्सुअल हैरेसमेंट के मामलों में पिछले कुछ सालों में बहुत ज्यादा बदलाव देखा गया है। UGC के आंकड़ों के मुताबिक, 2015-16 में इंस्टीट्यूशन ने 160 मामले रिपोर्ट किए। 2016-17 में यह संख्या बढ़कर 257 हो गई, फिर 2017-18 में घटकर 49 हो गई।

 

इसके बाद 2019-20 में यह बढ़कर 294 हो गई, 2021-22 में घटकर 40 हो गई और फिर 2022-23 में तेजी से बढ़कर 425 हो गई। हालांकि, ये आंकड़े UGC डेटा में लिस्टेड यूनिवर्सिटी और कॉलेजों द्वारा रिपोर्ट किए गए मामलों को कवर करते हैं। ये भारत के हायर-एजुकेशन इंस्टीट्यूशन में सेक्सुअल हैरेसमेंट की हर घटना को नहीं दिखाते हैं।

 

निपटाए गए केस 

डेटा यह भी दिखाता है कि रिपोर्ट किए गए मामलों के निपटाए गए हिस्से में बढ़ोतरी हुई है। 2015-16 में 160 में से 107 केस निपटाए गए, जो करीब 66.9 प्रतिशत था, 2022-23 में इंस्टीट्यूशन ने रिपोर्ट किए गए 425 केस में से 423 केस निपटाए, जिससे यह दर लगभग 99.5 परसेंट हो गई।

 

बता दें कि UGC के कुल डेटा में हर केस का नतीजा या यह नहीं बताया गया है कि उसके कारण पुलिस या कोर्ट की कार्रवाई हुई या नहीं लेकिन 90 दिनों से ज्यादा समय से पेंडिंग केस की संख्या भी ऊपर-नीचे हो रही है। जांचे जा रहे आंकड़ों के मुताबिक, 2019-20 में यह बढ़कर 53 हो गई, जो 2022-23 में घटकर एक रह गई।

हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों की संख्या भी बढ़ी 

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के मामले ने फिर से कैंपस में महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को फोकस में ला दिया है। हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों की संख्या भी बढ़ रही है। ऐसे में इन मामलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में पूरे भारत में हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों की संख्या बढ़ी है।

 

2015-16 में जहां लगभग 18.6 लाख लड़कियां हॉस्टल में रहती थीं। 2023-24 तक, यह संख्या बढ़कर 25.2 लाख हो गई। यानी लगभग 36 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में जैसे-जैसे ज्यादा महिलाएं हायर एजुकेशन के लिए अपने परिवारों से दूर रहती हैं, कैंपस और हॉस्टल की सुरक्षा एक बड़ी चिंता बढ़ रही है। 

 

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कड़ी पाबंदियां फिर भी घटनाएं नहीं हुई हैं कम 

किसी भी कॉलेज में छात्राओं के हॉस्टल में कड़ी पाबंदियां होती हैं, जैसे वे कब तक बाहर रह सकती हैं, इसके नियम और कड़े कर दिए जाते हैं। इससे दुर्व्यवहार और हिंसा की घटनाएं कम नहीं हुईं। कोलकाता का आर. जी. कर कांड पहला नहीं था और शायद आखिरी भी नहीं। 

 

इससे पहले और बाद में भी कई घटानाएं दर्ज की गईं, बीते साल कोलकाता के ही एक लॉ कालेज में एक छात्रा के साथ रेप का मामला सामने आया था। वर्ष 2015 में ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में एक छात्रा ने सीनियरों पर रेप और ब्लैकमेल का आरोप लगाया था। इस मामले में दो छात्रों को 20-20 साल की सजा सुनाई गई थी। 

 

2019 में हैदराबाद के मल्ला रेड्डी इंजीनियरिंग कालेज की प्रयोगशाला में एक सहायक प्रोफेसर पर एक दलित छात्रा से रेप का आरोप लगा था। नवंबर, 2021 में पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में तूफानगंज कालेज में कक्षाएं चलने के दौरान ही परिसर में एक छात्रा के साथ रेप की घटना का मामला सामने आया।

 

2024 में चेन्नई की अन्ना यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की एक छात्रा से एक बाहरी व्यक्ति के रेप की घटना की शिकायत दर्ज की गई थी। ये ऐसे मामले हैं, जो दर्ज हुए हैं। कई मामले दर्ज तक नहीं किए जाते। लड़कियां केवल कैंपस के अंदर ही नहीं, बल्कि बस स्टॉप, हॉस्टल के आसपास और आने-जाने वाले रास्तों पर भी लगातार छेड़खानी का सामना करती हैं। 

कॉलेज में छात्राओं की सुरक्षा के नियम क्या हैं?

UGC के नियमों के मुताबिक, हर उच्च शिक्षण संस्थान में सेक्सुअल हैरेसमेंट की शिकायतों के लिए आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का होना जरूरी है। इस कमेटी में कम से कम आधी सदस्य महिलाएं होनी चाहिए। इसके साथ कॉलेज को छात्रों और स्टाफ को यह भी बताना होता है कि सेक्सुअल हैरेसमेंट की शिकायत कहां और कैसे की जा सकती है।

 

इसके अलावा, कैंपस की सुरक्षा के लिए पर्याप्त रोशनी, प्रशिक्षित सिक्योरिटी स्टाफ और महिला सुरक्षा कर्मचारियों की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है। बड़े कैंपस में हॉस्टल, लाइब्रेरी, लैब और दूसरे हिस्सों के बीच सुरक्षित और भरोसेमंद ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था की भी सुविधा देने की बात कही गई है।  

शिकायत कैसे कर सकती हैं?

सेक्सुअल हैरेसमेंट में युवती ICC को लिखित शिकायत दे सकती है। सामान्य तौर पर यह शिकायत घटना के 3 महीने के भीतर करनी होती है। इसके अलावा, अगर छात्रा खुद लिखित शिकायत देने की स्थिति में नहीं है, तो इस स्थिति में ICC की अध्यक्ष या कोई सदस्य शिकायत लिखने में उसकी मदद कर सकता है।

 

शिकायत मिलने के बाद ICC को जांच 90 दिनों के भीतर पूरी करनी होती है। जांच के दौरान शिकायतकर्ता और गवाहों की पहचान और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। इसके साथ, छात्रा पुलिस में शिकायत करना चाहती है तो ICC को उसे पुलिस में शिकायत दर्ज कराने में मदद करनी की सलाह दी जाती है।