देश के सांसदों और ज्यादातर राज्यों के विधायकों को अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास के कार्य कराने के लिए एक निश्चित निधि मिलती है। इसी को सांसद या विधायक निधि कहा जाता है। लोकसभा सांसदों की तरह ही उत्तर प्रदेश में भी विधायकों की निधि 5 करोड़ रुपये है। यह राशि विकास कार्यों पर खर्च की जाए तो कम पड़ जाती है। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश के कई विधायक ऐसे हैं जो पिछले 4 साल में से इस निधि का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाए। कई विधायक ऐसे भी रहे जिनकी विधायक निधि में से दो-दो तीन-तीन साल तक एक भी रुपये नहीं खर्च हुए। इस पर कुछ अधिकारियों का कहना है कि काम तो हुए हैं लेकिन पोर्टल पर डेटा अपडेट नहीं हो पाया है।

 

UP में विधायकों की संख्या 403 है इसलिए हर साल कम से कम 2015 करोड़ रुपये आवंटित होते हैं। कई बार पिछले साल की बची रकम भी इसी में जोड़ दी जाती है तो यह राशि और भी ज्यादा हो जाती है। इसी तरह साल 2024-25 में कुल 2338 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। हालांकि, अगर खर्च का अनुपात देखें तो यह कम दिखता है क्योंकि आधे काम तो पूरे ही नहीं हो पाते। पिछले चार साल में कुल 8042 करोड़ रुपये आवंटित किए गए लेकिन इसमें से भी 78 प्रतिशत पैसों का ही काम स्वीकृत हो पाया। इसका पूरा डेटा MLALDASUP डॉट इन पर मौजूद है। 

 

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उत्तर प्रदेश में विधायक निधि का इतिहास देखें तो 1998-99 में यह सिर्फ 50 लाख थी और पिछले 25 साल में यह 10 गुना बढ़कर 5 करोड़ रुपये हो गए है। 2000-2001 में इसे 75 लाख, 2012-13 में 1.5 करोड़, 2018-19 में 2 करोड़ (GST के लिए 40 लाख अतिरिक्त), 202-21 में 3 करोड़ और 2023-24 में कुल 5 करोड़ रुपये कर दिया गया।  

 

पैसे खर्च नहीं हुए या अपडेट नहीं किया? 

MLALADS पोर्टल पर मौजूद डेटा के मुताबिक, कुल 6 विधायक ऐसे हैं जो दो या तीन साल तक अपनी विधायक निधि से एक भी रुपये खर्च नहीं हुए। रोचक बात है कि जिन विधायकों की निधि में खर्च शून्य दिखाया गया है, उनमें पांच विधायक सत्ताधारी गठबंधन से हैं जिसमें से चार तो भारतीय जनता पार्टी से ही हैं। इन 4 विधायकों में एक नाम उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह का भी है। उनके अलावा, बीजेपी के ही अनिल कुमार सिंह, मयंकेश्वर शरण सिंह और राकेश गोस्वामी ऐसे नेता हैं जिनकी विधायक निधि में से खर्च शून्य दिखाया गया है। इन चारों के अलावा राष्ट्रीय लोकदल के प्रसन्न कुमार और और समाजवादी पार्टी के नाहिद हसन की विधायक निधि का खर्च भी कई साल तक शून्य ही दिखाया गया है।   

नाहिद हसन- कैराना विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक जेल से ही चुनाव जीते थे। बाद में उन्हें जमानत मिल गई। विधायक निधि खर्च करने के आंकड़े बताते हैं कि 2024-25, 2025-26 और 2026-27 में उनके फंड से एक भी रुपये खर्च नहीं हुए हैं। 2023-24 में उनकी विधायक निधि से कुल 5.91 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।

 

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प्रसन्न कुमार- राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के विधायक प्रसन्न कुमार चौधरी की विधायक निधि से 2023-24 में कुल 5.13 करोड़ खर्च हुए। उसके बाद से अभी तक उनकी विधायक निधि से एक भी रुपये का खर्च नहीं दिखाया गया है।

 

प्रसन्न कुमार चौधरी और नाहिद हसन की विधानसभा सीटें शामली जिले में आती हैं। हमने शामली जिले के प्रोजेक्ट डायरेक्टर कार्यालय से संपर्क किया तो पता चला कि विधायक निधि से काम तो हो रहे हैं लेकिन शायद किसी तकनीकी दिक्कत के कारण पोर्टल अपडेट नहीं हो रहा है। उन्होंने नाहिद हसन की ओर से रेकमेंड किए गए कामों ही लिस्ट भी भेजी। यह लिस्ट बताती है कि नाहिद हसन ने पिछले 4 साल में लगभग एक हजार कामों का सुझाव दिया है लेकिन 2024-25 से लेकर अब तक पोर्टल पर उनके कामों का ब्योरा पोर्टल पर दर्ज नहीं है।

 

राकेश कुमार गोस्वामी- महोबा विधानसभा के बीजेपी विधायक राकेश कुमार गोस्वामी की विधायक निधि से 2023-24 में कुल 4.81 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके बाद के तीन साल में उनकी विधायक निधि से एक भी रुपये खर्च नहीं हुए।

मयंकेश्वरण शरण सिंह- अमेठी की तिलोई विधानसभा सीट से बीजेपी के विधायक मयंकेश्वर शरण सिंह की विधायक निधि से 2023-24 में एक भी रुपये खर्च नहीं हुए। 2024-25 में 4.32 करोड़ और 2025-26 में 2.23 करोड़ रुपये खर्च करके काम करवाए। हालांकि, 2026-27 में एक भी रुपये नहीं खर्च हुए हैं।

 

अनिल कुमार सिंह- पुरवा से बीजेपी के विधायक अनिल कुमार सिंह की विधायक निधि से साल 2024-25 और 2025-26 में एक भी रुपये नहीं खर्च हुए।

 

पुरवा के विधायक अनिल कुमार सिंह की विधायक निधि के बारे में जानकारी के लिए हमने उन्नाव जिले के प्रोजेक्ट डायरेक्टर तेजवंत सिंह से फोन पर बात की। तेजवंत सिंह ने खबरगांव को बताया, 'विधायक निधि से काम तो हो रहा है लेकिन पोर्टल नया है तो शायद अपडेट नहीं हुआ।' उन्होंने कहा कि वह अपने दफ्तर में मौजूद दस्तावेज दिखा सकते हैं जिनमें विकास कार्यों का ब्योरा दर्ज है। तेजवंत सिंह ने यह भी बताया कि यह पोर्टल लखनऊ से अपडेट होता है और नया है तो अभी त्रुटिपूर्ण हो सकता है।

 

दया शंकर सिंह- यूपी सरकार में मंत्री और बलिया नगर से विधायक दया शंकर सिंह की विधायक निधि से 2023-24 में 45.63 लाख, 2024-25 में 26.58 लाख रुपये खर्च हुए। 2025-26 और 2026-27 में उनकी विधायक निधि से एक भी रुपये खर्च नहीं हुए।

 

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यहां हमने सिर्फ उन 6 विधायकों का ब्योरा दिया है जिनकी विधायक निधि से कम से कम दो या तीन साल में एक भी रुपये खर्च नहीं हुए। बिलग्राम-मल्लावा के विधायक आशीष कुमार सिंह, अमेठी की विधायक महाराजी प्रजापति, फूलपुर के विधायक दीपक पटेल और फूलपुर-पवई के विधायक रमाकांत यादव भी 4 में से एक साल अपनी विधायक निधि से एक भी रुपया नहीं खर्च कर पाए।

 

बड़े नेताओं का क्या हाल?

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2023-24 में 3.79 करोड़, 2024-25 में 5.70 करोड़ और 2025-26 में 2.90 करोड़ रुपये विधायक निधि से खर्च किए हैं। 2026-27 में अब तक उनकी विधायक निधि से पैसे नहीं खर्च हुए हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठख ने 2023-24 में 6.31 करोड़, 2024-25 में 3.62 करोड़, 2025-26 में 4.35 करोड़ रुपये खर्च किए हैं ।2026-27 में अब तक उनकी भी विधायक निधि से पैसे नहीं खर्च हुए हैं।

 

उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता विपक्ष और इटवा विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक माता प्रसाद पांडे विधायक निधि खर्च करने में काफी आगे हैं। उन्होंने 2023-24 में 4.5 करोड़, 2024-25 में 4.98 करोड़, 2025-26 में 3.84 करोड़ और 2026-27 में अभी तक 1.37 करोड़ रुपये खर्च करके काम करवाए हैं।

जमीन पर नहीं हो पाते आधे काम

विधायक निधि के तहत स्थानीय विधायक काम करने की अनुशंसा के लिए प्रशासन को पत्र लिखते हैं। अगर काम स्वीकृत होता है तब आगे की कार्रवाई की जाती है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले 4 साल में कुल 103490 काम अनुशंसित किए गए लेकिन अलग-अलग कारणों से इसमें से 85726 काम ही स्वीकृत हो पाए। रोचक बात है कि 6 अगस्त 2026 तक इसमें से 54431 काम ही पूरे हो पाए हैं। यह स्वीकृत हुए कामों का  63.49 प्रतिशत है। यानी अभी भी एक तिहाई से ज्यादा काम पूरे नहीं हुए हैं।

 

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अगर अनुशंसित काम और पूरे हुए काम का हिसाब देखें तो 2023-24 में कुल 23,916 काम अनुशंसित हुए लेकिन 23971 कामों को मंजूरी मिली। यानी प्रस्तावित काम से ज्यादा। इसमें से 19,172 काम ही पूरे हुए। इसी तरह, 2024-25 में मंजूर किए गए 28796 में 22,126, 2025-26 में 27354 में से 12789 और 2026-27 में अभी तक मंजूर हुए 5606 कामों में से सिर्फ 344 काम ही पूरे हुए हैं।

क्या काम करवाते हैं विधायक?

विधायकों की ओर से करवाए गए काम का ब्योरा देखने पर पता चलता है कि सबसे ज्यादा काम सड़क के बगल में लाइट लगवाने, इंटरलॉकिंग रोड बनवाने, सीसी रोड बिछवाने और पीने के पानी का इंतजाम करने से जुड़े थे। कुछ विधायकों ने असाध्य रोगों से पीड़ित लोगों की आर्थिक सहायता, सोलर लाइट और सीवर के काम पर भी विधायक निधि खर्च की।

 

कुछ विधायकों ने एंबुलेंस खरीदने, लैपटॉप, नाला या नाली ब नवाने, शवदाह या कब्रिस्तान बनवाने, शेड बनवाने, बारात घर, चौपाल या रैन बसेरा बनवाने और तालाबों का जीर्णोद्धार कराने पर भी विधायक निधि के पैसे खर्च किए हैं।  

बता दें कि विधायक निधि के तहत करवाए जाने वाले कामों में एक शर्त होती है कि कोई भी एक काम 25 लाख रुपये से ज्यादा की लागत का नहीं होना चाहिए। उदाहरण के लिए अगर कोई काम करवाने के लिए 50 लाख रुपये लगने हैं तो उसे विधायक निधि से नहीं किया जा सकता है। विशेष परिस्थिति में संबंधित विभाग  के मंत्री के अनुमोदन पर 25 लाख से ज्यादा की राशि जारी की जा सकती है।

सबसे ज्यादा विधायक निधि खर्च करने वाले विधायक

जहां कुछ विधायक अपनी विधायक निधि खर्च करने में काफी पीछे हैं। वहीं, कुछ ऐसे भी हैं काम करवाने में काफी आगे हैं। बस्ती जिले की कप्तानगंज विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक कवींद्र चौधरी ने पिछले 4 साल में मिली 20 करोड़ की विधायक निधि में से 17.89 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। 2026-27 में वह अभी तक 1.31 करोड़ रुपये खर्च कर चुके हैं जबकि वित्त वर्ष के 4 महीने ही बीते हैं।

 

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इसी तरह प्रयागराज उत्तरी से बीजेपी के विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी ने 17.60 करोड़ रुपये, चकिया से बीजेपी के विधायक कैलाश खरवार ने 17.67 करोड़ रुपये, पटियाली से समाजवादी पार्टी की विधायक नादिरा सुल्तान ने 17.40 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। विधायक निधि अच्छे से खर्च करने में मेरठ के विधायक रफीक अंसारी, मीरगंज के विधायक डी सी वर्मा, फतेहपुर सीकरी के विधायक बाबूलाल, गढ़मुक्तेश्वर के विधायक हरेंद्र सिंह, हँड़िया के विधायक हाकिल लाल बिंद और हर्रैया के विधायक अजय सिंह भी काफी आगे हैं।

 

 

पोर्टल अपडेट नहीं होता?

WHOIS के जरिए चेक करने पर पता चलता है कि MLALDASUP डॉट इन वेबसाइट 15 मार्च 2024 को शुरू की गई है। यही वजह है कि इस वेबसाइट पर 2023-24 के बाद का ही डेटा उपलब्ध है। इस वेबसाइट को आखिरी बार 1 मार्च 2026 को अपडेट किया गया था यानी तब तक डेटा दुरुस्त होना चाहिए। हालांकि, तीन अलग-अलग अधिकारियों से बातचीत के आधार पर हमने पाया कि कई विधायकों की ओर से रेकमेंड किए गए कामों, उनकी स्थिति और उन पर हुए खर्च का ब्योरा कई साल से अपडेट नहीं हुआ है।

 

इस पोर्टल पर 'वार्षिक रिपोर्ट अंग्रेजी' और 'वार्षिक रिपोर्ट हिंदी' के सेक्शन भी दिए गए हैं लेकिन कोई भी वार्षिक रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है। इसी तक 'पॉकेट बुक हिंदी और अंग्रेजी' के सेक्शन हैं। उसमें भी सिर्फ हिंदी सेक्शन में एक पीडीफ है, वह भी साल 2024 की है। प्रोफाइल सेक्शन में विधायकों का नाम, विधानसभा क्षेत्र की जानकारी, जिले का नाम, फोन नंबर और सीयूजी नंबर दिए गए हैं। इस लिस्ट में भी सिर्फ 162 विधायकों की जानकारी ही उपलब्ध है। यानी यह लिस्ट भी अधूरी है।