भारत में भूजल में यूरेनियम प्रदूषण को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही है। इसके ताजा आंकड़े इस चिंता को और गहरा करते हैं। हाल ही में दिल्ली और बिहार में यूरेनियम चर्चा का विषय बना हुआ है। बिहार में माताओं के दूध में यूरेनियम की मौजूदगी का दावा करने वाली एक रिपोर्ट सामने आने के बाद चिंता और बढ़ गई। कुछ समय पहले राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) की 'वार्षिक भूजल रिपोर्ट 2025' के हवाले से बताया कि पंजाब के 62.5 फीसदी पानी के नमूनों में यूरेनियम तय सुरक्षित सीमा से ज्यादा मिला है, जो पूरे देश में सबसे ज्यादा दर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2024 में यह आंकड़ा सिर्फ 32.6 फीसदी था, यानी एक ही साल में प्रदूषण में 91.7 फीसदी की भयावह बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
सतनाम सिंह संधू इसे संसद में सीधे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी करार दिया और चेतावनी दी कि यह जहरीला पानी आने वाली पीढ़ियों में कैंसर और किडनी की बीमारियों का खतरा बढ़ाएगा। ऐसा नहीं है कि केवल पंजाब के पानी में यूरेनियम मिला ज्यादा मात्रा में मिला है। देश के कई और राज्यों के भूजल में भी यूरेनियम का स्तर खतरे से ज्यादा है। ऐसे में आइए समझते हैं यूरेनियम है क्या।
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क्या होता है यूरेनियम?
बता दें कि यूरेनियम एक प्राकृतिक रेडियोधर्मी तत्व है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से परमाणु ऊर्जा बनाने में होता है। इसके अलावा, यह ग्रेनाइट और फॉस्फेट जैसी चट्टानों में खूब मिलता है। हालांकि, बारिश और चट्टानों के धीरे-धीरे टूटने से इसकी थोड़ी मात्रा भूजल में मिल जाती है। PIB की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर मामलों में भूजल में यूरेनियम आने की मुख्य वजह प्राकृतिक भूगर्भीय संरचना ही है। हालांकि कुछ इंसानी गतिविधियां इस प्रक्रिया को और तेज करने का काम करती हैं। जैसे-
- यूरेनियम युक्त चट्टानों से प्राकृतिक रिसाव होना
- भूजल स्तर में लगातार गिरावट होना
- खनन लगातार होना
- कुछ इलाकों में फॉस्फेट चट्टानों का पानी में घुलना
- जरूरत से ज्यादा भूजल निकालना, जिससे जमीन के अंदर गहराई का पानी इस्तेमाल में आने लगता है
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब में सिंचाई के लिए भूजल का बहुत ज्यादा इस्तेमाल हुआ है। इसकी वजह से पानी का स्तर तेजी से नीचे गिर गया है। इससे जमीन के अंदर की चट्टानों की परतें बदल जाती हैं और वहां मौजूद यूरेनियम पानी में घुलने लगता है। अब इतनी गहराई से पानी निकाला जा रहा है कि वो पुराने चट्टानी स्रोतों तक पहुंच गया है, जहां यूरेनियम प्राकृतिक रूप से मौजूद है।
इससे पीने के पानी में यूरेनियम की मात्रा तय सीमा से कई गुना ज्यादा पाई गई है, जिससे किडनी की बीमारी और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। फॉस्फेट खाद और फ्लाई ऐश जैसे कारण भी इसमें थोड़ा योगदान देते हैं लेकिन असली वजह भूजल का बेतहाशा दोहन ही माना जाता है।
दूसरे राज्यों का हाल
- पंजाब के बाद हरियाणा देश में दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है। यहां मानसून - पूर्व 10 15% नमूने प्रदूषित मिले, जो मानसून के बाद बढ़कर करीब 23.75 फीसदी हो गए।
- दिल्ली में करीब 13 से 15.66 फीसदी नमूनों में यूरेनियम तय सीमा से ज्यादा पाया गया, जो देश में तीसरे नंबर पर है।
- कर्नाटक में लगभग 6 से 8 फीसदी नमूने प्रभावित पाए गए, खासकर कोलार जैसे इलाकों में, जहां ग्रेनाइट-गनीस चट्टानों की मौजूदगी के कारण यूरेनियम का स्तर ऊंचा रहा है।
- उत्तर प्रदेश में भी कुछ इलाकों में यूरेनियम प्रदूषण दर्ज हुआ है, हालांकि यह पंजाब-हरियाणा जितना गंभीर नहीं है।
बता दें कि ज्यादातर पूर्वी और दक्षिणी राज्य फिलहाल सुरक्षित सीमा के भीतर हैं लेकिन उत्तर-पश्चिम भारत खासतौर से पंजाब और हरियाणा का पैटर्न विशेषज्ञों के लिए चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है।
क्या है सेफ लिमिट?
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने पेयजल में यूरेनियम की अस्थायी सुरक्षित सीमा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर 30 µg/L या 0.03 mg/L है। भारत के भारतीय मानक ब्यूरो ने भी पेयजल मानकों में यही सीमा अपनाई है। दूसरी ओर 2024 में पंजाब में सिर्फ 32.6 फीसदी नमूने प्रदूषित थे, 2025 में यह बढ़कर 62.5 फीसदी हो गया।
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कैसे शरीर में जाता है यूरेनियम?
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि यूरेनियम शरीर में मुख्य रूप से चार तरीके से प्रवेश कर सकता है। पहला पीने के पानी से, दूसरा खाने से, तीसरा हवा यानी धूल के रूप में चौथा खनन या उद्योगों में व्यावसायिक संपर्क से। बता दें कि इसमें से सामान्य लोगों के लिए सबसे बड़ा स्रोत पीने का पानी माना जाता है। पीने के पानी में मौजूद यूरेनियम का प्रमुख जोखिम उसकी केमिकल पॉइजनिंग है।
लंबे समय तक अधिक मात्रा में यूरेनियम युक्त पानी पीने से गुर्दों को नुकसान, नेफ्राइटिस, हड्डियों पर असर, आंतरिक अंगों को नुकसान और लंबे समय में स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते है। WHO और CGWB दोनों बताते है कि पीने के पानी के माध्यम से शरीर में प्रवेश करने वाला यूरेनियम मुख्य रूप से किडनी को प्रभावित करता है।
