NET-JRF क्वालिफाई करके PhD करने वाली बुशरा बानो कुछ ही समय में प्रोफेसर और फिर SDM तक बन गई थीं। वह प्रोफेसर की नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी करने में जुटीं और फिर भारतीय पुलिस सेना यानी IPS की अधिकारी बनीं। अब वही IPS डॉ. बुशरा बानो एक वीडियो और फिर ट्रांसफर की वजह से चर्चा में हैं। कहा जा रहा है कि एक वीडियो में 'अस्सलामवलयकुम' 'इंशाअल्लाह' और 'जजा कल्लाह' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने की वजह से उनकी 'पनिशमेंट पोस्टिंग' कर दी गई। इस पर बुशरा बानो की कोई प्रतिक्रिया तो नहीं आई है लेकिन अब वह चर्चा का केंद्र बन गई हैं।
साल 2021 में IPS बनीं बुशरा बानो उत्तर प्रदेश के कन्नौज से ताल्लुक रखती हैं, महिला हैं, मुस्लिम हैं और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) शासित पश्चिम बंगाल में पोस्टेड हैं इसलिए यह चर्चा आग की तरह फैल गई है। अब विपक्ष के कई सांसद बुशरा बानो के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं और उनके ट्रांसफर पर बीजेपी को घेर रहे हैं। विपक्षियों ने सवाल उठाए हैं कि एक तरफ बीजेपी की केंद्र सरकार मुस्लिम राष्ट्राध्यक्षों का BRICS में स्वागत करती है और दूसरी तरफ सिर्फ अस्सलामवलयकुम जैसे शब्द बोलने की वजह से एक मुस्लिम IPS का ट्रांसफर कर दिया जाता है।
कहां से शुरू हुआ विवाद?
बुशरा बानो का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह कहती हैं, 'अस्सलामवलयकुम, मेरा नाम बुशरा बानो है। मैं IPS 2021 क्वालिफाइड हूं। वर्तमान में मैं खड़गपुर में अडिशनल एसपी के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हूं। AMU का जो रेजिडेंट कोचिंग एकेडमी है, पहले जो कोचिंग गाइडेंस सेंटर हुआ करता था, उसे सरकार ने खासतौर पर अल्पसंख्कों, महिलाओं और SC-ST के लिए एक स्पेशल कोचिंग भी बनाया। वह बहुत मददगार रहा। मेरी यात्रा में भी उसने काफी मदद की। जब मैंने सऊदी अरब से आने के बाद तैयारी शुरू की तो मैं तो सेल्फ स्टडी कर रही थी लेकिन वहां की लाइब्रेरी से बहुत मदद मिली। टेस्ट सीरीज वहां से की। मैं उम्मीद करती हूं कि AMU के ज्यादा से ज्यादा बच्चे इसका फायदा उठाएं। धन्यवाद, जजाकल्लाह।'
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अपने इस वीडियो में उन्होंने 'अस्सलामवलयकुम' 'इंशाअल्लाह' और 'जजा कल्लाह' जैसे तीन शब्दों का इस्तेमाल किया। इसी को लेकर उनकी ट्रोलिंग शुरू हो गई और उन्हें 'इस्लामिक IPS अफसर' कहा जाने लगा। इस ट्रोलिंग का असर यह हुआ कि समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के कई नेता बुशरा बानो के पक्ष में आवाज भी उठाने लगे। आखिर में बुशरा बानो का ट्रांसफर कर दिया गया। अब तक पश्चिमी मेदिनीपुर के खड़गपुर में अडिशनल एसपी के पद पर तैनात बुशरा बानो को अब स्टेट आर्म्ड फोर्स (SAP) की चौथी बटालियन में डिप्टी CO बनाकर भेज दिया गया है। उनकी जगह पर पार्थ घोष को खड़गपुर का अडिशनल एसपी बनाया गया है।
बुशरा के समर्थन में उतरे विपक्षी सांसद
बुशरा के समर्थन में समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने X पर लिखा है, 'क्या अब इस देश में मुस्लिम IAS और IPS अधिकारी “अस्सलामु अलैकुम” भी नहीं कह सकते? क्या “इंशाअल्लाह” बोलना भी गुनाह हो गया है? अगर किसी अधिकारी के अभिवादन और आस्था के शब्दों पर सवाल उठाकर उसका ट्रांसफर किया जाता है, तो यह सिर्फ़ एक अधिकारी के साथ अन्याय नहीं, बल्कि भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब और संवैधानिक मूल्यों पर चोट है। हमारा देश नफ़रत से नहीं, एकता, भाईचारे और संविधान से चलता है। सियासत के लिए नफ़रत की दीवारें खड़ी करना बंद कीजिए—भारत हर धर्म और हर नागरिक का है।'
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इसी तरह TMC की सांसद महुआ मोइत्रा ने लिखा है, 'एक बीजेपी सरकार BRICS सम्मेलन में 'प्रेयर रूम' बनाकर खुद को सेक्युलर दिखा रही है और दूसरी तरफ एक मुस्लिम महिला आईपीएस अधिकारी बुशरा बानो को सिर्फ अस्सलामवलयकुमर और जजाकल्लाह कहने की वजह से ट्रांसफर कर दिया जा रहा है। यह गोदी मीडिया टीवी की फैलाई नफरत का असर है। हम आपके साथ हैं बुशरा।'
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और अल्पसंख्यक मोर्चे के अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी ने भी इस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा है, 'ब्रिक्स सम्मेलन में दुनिया भर से आए हुए मुस्लिम राष्ट्राध्यक्षों को बांहें फैलाकर गले लगाने वाले मोदी जी की पश्चिम बंगाल की राज्य सरकार ने खड़गपुर में तैनात IPS बुशरा बानो का महज़ इसलिये ट्रांसफर कर साइड लाइन कर दिया क्योंकि एक वीडियो संदेश के ज़रिये युवाओं से संवाद करते हुए उन्होंने इंशाअल्लाह और जज़ाकअल्लाह कह दिया था जिसका अर्थ बड़ा सामान्य सा है। एक नफ़रती TV चैनल ने पहले वह वीडियो सनसनीख़ेज़ बनाकर पोस्ट किया और महिला IPS की ऑनलाइल ट्रोलिंग करवाई गई, राज्य सरकार ने उनका साथ देने के बजाय अगले दिन उनका ट्रांसफ़र कर दिया। ये कैसा भारत बना रहे हैं नरेंद्र मोदी जी आप?'
कैसा रहा बुशरा बानो का करियर?
बुशरा बानो का करियर बताता है कि वह पढ़ाई-लिखाई में काफी अव्वल रही हैं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन की चुनौतियों को भी शानदार तरीके से लिया और उन सबसे उबरकर अभी सर्विस में हैं। उनकी कहानी 2021 में IPS बनने से काफी पहले ही प्रेरणादायक बन चुकी थी। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़ी बुशरा ने NET-JRF पास करके मैनेजमेंट में PhD की है। इसी के बाद उनका असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर करियर शुरू हुआ। पहले उन्होंने भारत में ही पढ़ाया और फिर दुबई चली गईं। हालांकि, सिविल सर्विस में जाने का मन था तो भारत लौट आईं और विदेश की नौकरी छोड़ दी।
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अपने करियर के बारे में एक बार उन्होंने बताया था, 'मेरी शादी 2014 में हुई। उससे पहले मैंने MBA और PhD कर रखी थी और मैं आगरा में असिस्टेंट प्रोफेसर थी। शादी के बाद जहां मेरे हस्बैंड थे, वहीं जजान यूनिवर्सिटी सऊदी अरब में मेरा भी हो गया था। फिर मुझे लेकिन UPSC करना था और मैंने अपने हस्बैंड से कहा तो उनका कहना था कि ठीक है हम लोग रिजाइन करते हैं। हम दोनों रिजाइन करके भारत आ गए। मैंने तैयारी शुरू की। उसी दौरान मेरा कोल इंडिया में हो गया था। एक बार मैं IRTS में बनी, PCS की परीक्षा पास की और अभी IPS हूं।'
पहली बार साल 2018 में ही UPSC पास करने वाली बुशरा की रैंक तब 277 थी और उन्हें इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस मिली। दूसरी बार 2021 में उनकी रैंकी 234 आई और वह IPS बनने में कामयाब हुईं। इससे पहले वह, उत्तर प्रदेश PCS की परीक्षा पास करके SDM बनीं और कुछ वक्त के लिए फिरोजाबाद में काम भी किया। बताया जाता है कि जब उनका UPSC का इंटरव्यू था तब वह गर्भवती थीं और दूसरी बा मां बनने वाली थीं। हालांकि, उन्होंने निजी जीवन की इन चुनौतियों का हावी नहीं होने दिया और सबको पार करते हुए आगे बढ़ती रहीं।
