अगर आप सामाजिक व्यक्ति हैं, सघन आबादी में रहते हैं, आपकी दोस्ती बेहतर है, लोगों से घुल-मिलकर रहते हैं, बातें करते हैं तो आपके आत्महत्या करने की आशंका कम होगी। आर्थिक सर्वे 2025-26 की रिपोर्ट का इशारा कुछ इसी ओर है। सर्वे में कहा गया है कि सामाजिक संबंध और दोस्ती, मानसिक सेहत की रक्षा करनी है। 

आर्थिक सर्वे में यह दावा किया गया है कि दोस्तों के साथ आमने-सामने की मुलाकातें और अच्छे समाजिक संबंध व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी हैं। जिन लोगों का सामाजिक जुड़ाव ज्यादा होता है, उनका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है और आत्महत्या की घटनाएं भी कम होती हैं।

आर्थिक सर्वे में फेसबुक सोशल कनेक्टेडनेस इंडेक्स (SCI) का इस्तेमाल करके देश के अलग-अलग राज्यों और जिलों में सोशल कनेक्शन का अध्ययन किया गया। इस डेटा से पता चला कि जिले के अंदर ही मजबूत समाजिक संबंधों वाले इलाकों में आत्महत्या की दर (SDR) कम है। वहीं, जहां लोग ज्यादा ऑनलाइन जुड़े रहते हैं और मिलना-जुलना कम हो गया है। वहां आत्महत्या की दर ज्यादा देखी गई है।

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राज्यों का सुसाइड डेथ रेट क्या है?

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में फेसबुक आधारित सोशल कनेक्टेडनेस इंडेक्स (SCI) के जरिए राज्यों में सामाजिक जुड़ाव और आत्महत्या दर का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट कहती है कि जिन राज्यों में लोगों के बीच स्थानीय स्तर पर सामाजिक जुड़ाव अधिक है, वहां आत्महत्या दर अपेक्षाकृत कम पाई गई।

केरल में सुसाइड डेथ रेट (SDR) करीब 30.6 फीसदी है। तेलंगाना में 27.8  प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 26.1 प्रतिशत और तमिलनाडु में 25.3 प्रतिशत है। उत्तराखंड में 8.3, झारखंड में 5.2 प्रतिशत, यूपी में 4.2 प्रतिशत और बिहार में 0.7 प्रतिशत। जिन राज्यों में एक-दूसरे पर निर्भरता ज्यादा है, वहां खुदकुशी के मामले भी कम देखे जाते हैं। 

छत्तीसगढ़ का जिले के भीतर सोशल कनेक्टेडनेस इंडेक्स (SCI) सबसे ज्यादा, करीब 11.8 करोड़ है। यूपी दूसरे स्थान है, जहां SCI करीब 9.6 करोड़ है। बिहार में SCI करीब 6.2 करोड़ है, जहां आत्महत्या दर करीब 0.7 प्रतिशत है। केरल में SCI 20 लाख है, जबकि आत्महत्या दर 30.6 प्रतिशत है। तेलंगाना में SCI 70 लाख है, आत्महत्या दर 27.8 प्रतिशत है।  

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बिहार और यूपी में खुदकुशी की दर कम क्यों है?

बिहार और उत्तर प्रदेश में जिलों के भीतर मजबूत और सीमित सामाजिक संबंध हैं, एक-दूसरे के बारे में जानने के लिए सोशल मीडिया का सहारा नहीं लेना पड़ता। यहां के लोग,अपने स्थानीय दोस्तों, रिश्तेदारों या परिवारों पर निर्भर हैं। इन राज्यों में आत्महत्या की दर बहुत कम है। बिहार में 0.7 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 3.9 प्रतिशत। 

केरल और तमिलनाडु में ज्यादा क्यों है?

केरल और तमिलनाडु में जिले के बीच समाजिक संबंध सघन नहीं हैं। दूर-दूर के लोग जुड़े हैं लेकिन पास के लोग दूर हैं। ऐसे राज्यों में आत्महत्या की दर चिंताजनक है। केरल में आत्महत्या दर 30.6 प्रतिशत और  तमिलनाडु में 25.3 प्रतिशत है। सोशल कनेक्टेडनेस इंडेक्स (SCI) में कहा गया है कि मजबूत व्यक्तिगत सामाजिक संगठन, मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं। 

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सोशल मीडिया के किस खतरे पर अलर्ट होने की जरूरत है?

सर्वे में डिजिटल एडिक्शन को बढ़ती समस्या बताया गया है। युवाओं में स्मार्टफोन और इंटरनेट की लत नींद, मूड, ध्यान और आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर रही है। दुनिया भर में कई देशों ने इसके खिलाफ कदम उठाए हैं। आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगा दिया है। दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों में भी गेमिंग और स्क्रीन टाइम पर पाबंदियां हैं। 

भारत क्या कर रहा है?

भारत में भी सरकार ने कई उपाय किए हैं। टेली-मानस हेल्पलाइन, NIMHANS का SHUT क्लिनिक, स्कूलों में डिजिटल सेफ्टी गाइडलाइंस और हाल ही में पास हुआ ऑनलाइन गेमिंग रेगुलेशन एक्ट 2025 इन उपायों में शामिल है। सर्वे में कहा गया है कि स्कूलों में डिजिटल वेलनेस कोर्स, ऑफलाइन एक्टिविटीज, पैरेंट्स को ट्रेनिंग और डिजिटल डिटॉक्स जैसी पहल बढ़ाई जाएं। सर्वे का कहना है कि टेक्नोलॉजी को पूरी तरह रोकना नहीं है, बल्कि संतुलन बनाना है। ऑफलाइन दोस्ती और सोशल कनेक्शन को बढ़ावा देकर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखा जा सकाता है।