बॉलीवुड अभिनेता वरुण धवन ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर बताया कि उन्होंने खेती के लिए जमीन खरीदी है। वरुण धवन ने कहा कि यह उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा अचीवमेंट है। एक्टर ने इंस्टाग्राम पर कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं, इन तस्वीरों में उनकी खुशी साफ जाहिर हो रही है। हालांकि, इसके साथ ही वरुण धवन ने मिट्टी की गिरती क्वालिटी और नेचुरल न्यूट्रिएंट्स के नुकसान पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा:-  

जब मैं अपने फार्म पर गया, तो किसानों ने मुझे बताया कि आज की मिट्टी में वे पोषक तत्व नहीं हैं, जो पहले हुआ करते थे। बीजों में भी अब जिंक और मैग्नीशियम जैसे जरूरी पोषक तत्व नहीं हैं। खेती में इस्तेमाल होने वाले केमिकल इन सब चीजों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। दुख की बात है कि हम यही खा रहे हैं, हर कोई यही खा रहा है। इससे मेरी रातों की नींद उड़ गई है। मैं खेती और प्रोड्यूसिंग से जुड़े लोगों से जानना चाहता हूं कि इसका समाधान क्या है, इससे निपटने का सही तरीका क्या है? वरुण धवन, एक्टर 

खेत की मिट्टी की बात, क्या बताते हैं सरकारी आंकड़े?

13 मार्च 2026 को भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत भारतीय मृदा एवं भूमि उपयोग सर्वेक्षण (Soil and Land Use Survey of India) ने अलग-अलग स्तर पर यानी 1:50,000 और 1:10,000 के पैमाने पर मिट्टी का डेटा तैयार किया है। इस डेटा से पता चलता है कि भारत की मिट्टी में पोटैशियम की मात्रा पर्याप्त है लेकिन नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की मात्रा अलग-अलग जगहों पर अलग है। 

 

इसके अलावा, सूक्ष्म पोषक तत्वों यानी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की बात करें तो बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में मिट्टी में जिंक की कमी मुख्य रूप से मिलती है। आयरन और बोरॉन की मात्रा भी भारत की अलग-अलग मिट्टियों में अलग-अलग है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद  ICAR से जुड़े वैज्ञानिकों के 2021 में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, 2014 से 2020 के दौरान 2,42,827 सतही मिट्टी के सैंपल के विश्लेषण में 36.5 फीसदी सैंपल में जिंक की कमी और 23.4 फीसदी सैंपल में बोरॉन की कमी पाई गई। यह सभी सैंपल 28 राज्यों के 615 जिलों से लिए गए थे। 

 

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मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए क्या कर रही सरकार?

सरकार ने मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) मिट्टी की जांच के आधार पर संतुलित और एक साथ कई तरह के पोषक तत्व देने की सलाह देती है। इसके अलावा ICAR ने पौधों को पोषक तत्व देने के लिए रासायनिक खाद के साथ जैविक स्रोतों, जैसे गोबर की खाद और जैव उर्वरक आदि के इस्तेमाल की सलाह दी है। इसके साथ ही मिट्टी और पानी को नुकसान से बचाने के लिए स्थानीय जरूरत के हिसाब से मिट्टी और जल संरक्षण के उपाय करने की भी सलाह दी गई है।  

 

इसके अलावा, सरकार सॉइल हेल्थ एंड फर्टिलिटी स्कीम भी चला रही है। इसके तहत राज्य सरकारों की मदद से देशभर के किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड (SHCs) दिए जाते हैं। इसके जरिए किसानों को मिट्टी की सेहत के अनुसार रासायनिक खाद का सही मात्रा में इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। साथ ही सेकेंडरी और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स वाली खाद के साथ जैविक खाद और जैव उर्वरक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जाता है। इसका तहत मिट्टी की सेहत और उसकी उपजाऊ क्षमता को बेहतर करना है।

 

इसके अलावा, 2014 से 15 से अब तक 25.89 करोड़  बनाए गए हैं और किसानों को संतुलित खाद इस्तेमाल की जानकारी देने के लिए 7.17 लाख प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसके अलावा 70,002 कृषि सखियों को प्रशिक्षण दिया गया है और स्कूलों में छात्रों के जरिए मिट्टी की जांच और सॉइल हेल्थ  तैयार कार्ड्स तैयार करने का कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। 

किस कारण मिट्टी में कम हो रहे हैं पोषक तत्व? 

इसके पीछे कई वजह हैं, जैसे खेती का तरीका, एक ही जमीन पर बार-बार फसल लेना, खाद का असंतुलित इस्तेमाल, मिट्टी में जैविक पदार्थ की कमी और मिट्टी का कटाव आदि। इन सभी कारणों से मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व प्रभावित हो रहे हैं। दरअसल, एक ही जमीन पर लगातार खेती करने से फसल हर बार नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम और सूक्ष्म पोषक तत्व मिट्टी से लेती है। बाद में इनकी अगर सही भरपाई न हो तो कमी बढ़ती है। 

 

इसके अलावा यूरिया और डीएपी जैसी खाद का जरूरत से ज्यादा या असंतुलित इस्तेमाल भी मिट्टी का पोषक संतुलन बिगाड़ता है। वहीं गोबर की खाद, कम्पोस्ट, हरी खाद और फसल अवशेषों का कम इस्तेमाल मिट्टी में जैविक पदार्थ घटाता है। बारिश या सिंचाई से मिट्टी का कटाव होने पर उपजाऊ ऊपरी परत और पोषक तत्व निकल कर बह जाते हैं। एक बड़ी समस्या यह भी है कि हर खेत की मिट्टी अलग होने के बावजूद बिना मिट्टी की जांच के खाद देना भी समस्या बढ़ाता है। 

इसका समाधान क्या है?  

  • सबसे पहले मिट्टी की जांच कराएं, इसके लिए Soil Health Card की मदद लें और इसी के आधार पर खाद की मात्रा तय करें।
  • संतुलित खाद डालना है जरूरी, केवल यूरिया या DAP पर निर्भर न रहें, मिट्टी की जरूरत के हिसाब से NPK और सूक्ष्म पोषक तत्व दें।
  • जैविक खाद बढ़ाने से सुधरेगी मिट्टी की सेहत, इसके लिए गोबर की खाद, कम्पोस्ट और हरी खाद का इस्तेमाल करें।
  • फसल के अवशेष खेत में मिलाएं, आमतौर पर लोग इन्हें जला देते हैं लेकिन जलाने या पूरी तरह हटाने के बजाय मिट्टी में वापस मिलाएं।
  • फसल चक्र अपनाएंगे तो होगा फायदा, एक ही फसल लगातार उगाने के बजाय अलग-अलग फसल उगाएं।
  • खेत को मिट्टी का कटाव से बचाएं, इसके लिए कवर क्रॉप, जुताई और अन्य दूसरे तरीके अपनाएं जा सकते हैं।  
  • जरूरत के अनुसार माइक्रोन्यूट्रिएंट डालें, साथ ही जिंक, बोरॉन, आयरन आदि की कमी होने पर मिट्टी की जांच के आधार पर पूर्ति करें।
  • रासायनिक और जैविक खाद का इस्तेमाल बैलेंस करें 

मिट्टी की जांच कराने का तरीका भी जान लीजिए

बता दें कि भारत सरकार के सॉइल हेल्थ कार्ड के तहत मिट्टी की जांच करा सकते हैं। इसके लिए आपको नजदीकी कृषि विभाग, या मृदा जांच प्रयोगशाला या संबंधित कृषि कार्यालय से संपर्क करना होगा। कार्ड नहीं भी है तो आप यहां जाकर जरूरी जानकारी देते हुए मिट्टी की जांच करा सकते हैं। यहां से सैंपल पर कोड या लेबल लगाकर लैब में भेजा जाता है। वहां मिट्टी की जांच होती है। 

 

इसके लिए लगभग 12  पैरामीटर देखे जाते हैं, इनमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, सल्फर, जिंक, आयरन, कॉपर, मैंगनीज, बोरॉन, पीएच, इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी और ऑर्गेनिक कार्बन शामिल हैं। जांच से पता चल जाता है कि मिट्टी में कौन-सा पोषक तत्व कम या पर्याप्त है और किस फसल के लिए कितनी खाद और कौन-सा मिट्टी सुधारक इस्तेमाल करना चाहिए।

 

सैंपल लेने का तरीका भी समझिए, इसके लिए खेत के चारों कोनों और बीच से करीब 15 से 20 सेंटीमीटर गहराई की मिट्टी ली जाती है। फिर मिट्टी को अच्छी तरह मिलाकर सैंपल तैयार कर लिया जाता है। ध्यान रहे जहां छाया पड़ रही हो वहां की मिट्टी न लें। सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार, सैंपल आम तौर पर रबी और खरीफ फसल की कटाई के बाद या जब खेत में कोई खड़ी फसल न हो, तब लिया जाता है।