दिल्ली हाई कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए तीखी टिप्पणी की है। कोर्ट ने पार्टी के नेताओं पर प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और बिना इजाजत बैरिकेड तोड़ने पर नाराजगी जताई। अदालत ने साफ कहा है कि सुरक्षा नियमों को तोड़कर कोई भी प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। साथ ही दोनों नेताओं की उम्र पर भी टिप्पणी कर कहा कि दोनों ही GenZ की श्रेणी में नहीं आते हैं।
कोर्ट ने सौरव दास और आशुतोष रांका की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस की कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने जमानत बॉन्ड रद्द करने की कानूनी प्रक्रिया का सही तरीके से पालन न करने पर पुलिस से जवाब मांगा है।
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मामला क्या है?
10 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया था। इसके बाद 50-50 हजार रुपये के बेल बॉन्ड पर रिहा किया गया था। 11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाई कर दिया। इसके बावजूद वहां प्रदर्शन का आह्वान करने और शांति भंग की आशंका के चलते 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने दोनों नेताओं की हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी थी। इसे अब हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूछा कि जब 11 अक्टूबर को दोनों नेताओं के बेल बॉन्ड स्वीकार कर लिए गए थे तो उसके उल्लंघन के बाद कानूनी प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया? कोर्ट ने कहा कि बॉन्ड टूटने पर जमानत राशि जब्त करने जैसी तय प्रक्रिया अपनाने के बजाय, ऐसा लगता है कि प्रशासन नया नोटिस देकर राहत देने की कोशिश कर रहा है।
कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के रवैये पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन करने और बैरिकेड्स तोड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती। सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरिकेड्स को तोड़ना कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है। इससे अन्य अप्रिय घटनाएं भी हो सकती हैं।
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'GenZ' पर कोर्ट की चुटकी
सुनवाई के दौरान जब नेताओं की उम्र, सौरव 27 साल और आशुतोष 32 साल, बताई गई तो कोर्ट ने हल्की-फुल्की टिप्पणी करते हुए कहा कि 1997 के बाद जन्मे लोग 'GenZ' कहलाते हैं। इसलिए ये दोनों उस श्रेणी में नहीं आते हैं। जज ने CJP नेताओं के वकील से पूछा कि वे सीधे हाई कोर्ट आने के बजाय पहले निचली अदालत क्यों नहीं गए? कोर्ट ने मजाकिया लहजे में पूछा, 'क्या आप अपनी मुख्य दलीलें आज ही इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि कानूनन इसकी अभी जरूरत नहीं हो सकती है?'
