उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के ऊंचाहार में 11 सितंबर से शुरू होने जा रही भव्य श्री शिव महापुराण कथा अब सिर्फ धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रह गई है। कैबिनेट मंत्री और ऊंचाहार विधायक मनोज कुमार पांडे की पहल पर होने वाले इस आयोजन में जनसत्ता दल के अध्यक्ष राजा भैया यानी रघुराज प्रताप सिंह को आमंत्रित किए जाने की चर्चा ने सियासी हलकों का ध्यान खींच लिया है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी आयोजन का निमंत्रण स्वीकार कर चुके हैं। ऐसे में शिव कथा के मंच पर संभावित वीआईपी जमावड़ा आने वाले समय के राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चा को जन्म दे रहा है।

ऊंचाहार के चढ़रई चौराहा, टोल प्लाजा के पास 11 से 17 सितंबर तक अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा (सीहोर वाले) शिव महापुराण कथा सुनाएंगे। आयोजन के लिए करीब 100 बीघा क्षेत्र में विशाल पंडाल और जर्मन हैंगर तैयार किया जा रहा है। श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग, पेयजल, शौचालय और अस्थायी चिकित्सा व्यवस्था समेत व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। 10 सितंबर को कथा से पहले भव्य कलश यात्रा भी प्रस्तावित है। आयोजकों के मुताबिक, इसमें करीब 10 हजार महिलाएं शामिल होंगी और हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की भी तैयारी बताई गई है। कथा स्थल पर लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई गई है।

राजा भैया की मौजूदगी से राजनीतिक हलचल

इस आयोजन को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा अब राजा भैया के निमंत्रण को लेकर है। इस कार्यक्रम में मनोज पांडे ने राजा भैया से आत्मीय मुलाकात कर शिव महापुराण कथा मेें आने के लिए निमंत्रण दिया। राजा भैया ने निमंत्रण स्वीकार कर आने का भरोसा दिया है।राजा भैया पूर्वांचल और अवध की राजनीति में प्रभाव रखने वाले प्रमुख क्षेत्रीय नेताओं में गिने जाते हैं। ऐसे में अगर वह कथा के मंच पर पहुंचते हैं तो यह तस्वीर निश्चित तौर पर राजनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि राजा भैया की मौजूदगी किसी नए राजनीतिक गठजोड़ का संकेत है लेकिन एक ही मंच पर अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि के प्रभावशाली नेताओं की मौजूदगी स्वाभाविक रूप से नए समीकरणों की चर्चा को जन्म दे सकती है।

 

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CM योगी ने स्वीकार किया न्योता

मंत्मरी नोज पांडे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर उन्हें कथा में शामिल होने का निमंत्रण दे चुके हैं और रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री ने निमंत्रण स्वीकार किया है। इसके अलावा, आयोजकों की ओर से कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों, केंद्रीय और राज्य मंत्रियों, संत-महात्माओं, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जुड़े विशिष्ट लोगों को भी आमंत्रित किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इन सभी के नाम और उनकी अंतिम उपस्थिति की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि धार्मिक आयोजन के मंच पर प्रदेश और देश की राजनीति के कौन-कौन से बड़े चेहरे एक साथ नजर आते हैं।

धार्मिक मंच से निकलेगा कोई नया राजनीतिक संदेश?

मनोज पांडे के लिए यह आयोजन कई मायनों में महत्वपूर्ण है। वह कभी समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में रहे और 2024 में बीजेपी में शामिल हुए। अब वह योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।वहीं 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। ऊंचाहार सीट पर भी चुनावी मुकाबले और जातीय समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है। हालिया राजनीतिक विश्लेषणों में मनोज पांडे की स्थिति, सपा-कांग्रेस गठबंधन और स्थानीय जातीय समीकरणों को चुनावी चुनौती के रूप में देखा गया है।


ऐसे समय में हजारों-लाखों लोगों की संभावित मौजूदगी वाला धार्मिक आयोजन राजनीतिक रूप से भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

ब्राह्मण-ठाकुर समीकरण को साधने की कोशिश?

मनोज पांडे की पहचान एक प्रभावशाली ब्राह्मण नेता के रूप में है जबकि राजा भैया की राजनीति में ठाकुर मतदाताओं और क्षेत्रीय प्रभाव की चर्चा लंबे समय से होती रही है। ऐसे में दोनों नेताओं का एक धार्मिक मंच पर साथ दिखाई देना निश्चित रूप से राजनीतिक संदेश के तौर पर पढ़ा जा सकता है लेकिन इसे अभी सीधे तौर पर 'ब्राह्मण-ठाकुर एकता का अभियान' कहना जल्दबाजी होगी। आयोजन को लेकर सार्वजनिक तौर पर इसे धार्मिक और सामाजिक आयोजन बताया गया है। खुद मनोज पांडे ने इसे पूरे ऊंचाहार क्षेत्र, जनप्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं, कथा समिति और श्रद्धालुओं के सामूहिक प्रयास का आयोजन बताया है।

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क्या पूर्वांचल में असर पड़ सकता है?

पूर्वांचल की राजनीति में सामाजिक समीकरण हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं। ब्राह्मण और ठाकुर दोनों ही राजनीतिक रूप से प्रभावशाली सामाजिक समूह माने जाते हैं। पिछले वर्षों में इन दोनों समुदायों के बीच राजनीतिक दूरी या नजदीकी को लेकर लगातार बहस होती रही है। ऐसे में किसी बड़े धार्मिक मंच पर दोनों प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों की संभावित मौजूदगी सामाजिक संवाद और राजनीतिक दूरी कम करने का प्रतीकात्मक संदेश जरूर दे सकती है।

 

आयोजन का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि मंच धार्मिक होगा लेकिन उस पर दिखाई देने वाले राजनीतिक चेहरे 2027 की राजनीति की चर्चा को जरूर हवा दे सकते हैं। एक तरफ मनोज पांडे बीजेपी के मंत्री और ऊंचाहार के विधायक, दूसरी तरफ राजा भैया पूर्वांचल-अवध की राजनीति में प्रभाव रखने वाला क्षेत्रीय चेहरा और साथ में बीजेपी के बड़े नेताओं की संभावित मौजूदगी।