उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इंडिया गठबंधन के भीतर सियासी समीकरणों को लेकर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात के बाद इंडिया गठबंधन में शामिल होने की उम्मीद लगाए बैठे स्वामी प्रसाद मौर्य को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बड़ा झटका दिया है।

 

अखिलेश ने साफ कर दिया है कि स्वामी प्रसाद मौर्य और उनकी पार्टी इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने मौर्य को लेकर दो टूक अंदाज में कहा कि उन्हें नजरअंदाज करना चाहिए। अखिलेश के इस बयान से मौर्य की गठबंधन में शामिल होने की कोशिशों पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब सियासी निगाहें कांग्रेस के रुख पर टिकी हैं कि वह अखिलेश की नाराजगी के बावजूद मौर्य को अपने साथ जोड़ती है या फिर इस संभावना से दूरी बना लेती है।

शुक्रवार को लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव से स्वामी प्रसाद मौर्य के इंडिया गठबंधन में शामिल होने को लेकर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य उनके गठबंधन में शामिल नहीं हैं। अखिलेश ने कहा, ''इग्नोर करो, अवॉइड करो। साइलेंस इज गोल्ड। वो हमारी सीटों की गिनती में शामिल नहीं हो सकते।'' उनके इस बयान को मौर्य की गठबंधन में एंट्री की संभावनाओं पर सीधे तौर पर विराम लगाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

राहुल-प्रियंका से मुलाकात के बाद बढ़ी थीं उम्मीदें

दरअसल, स्वामी प्रसाद मौर्य ने अक्टूबर के पहले सप्ताह में दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की थी। इससे पहले उनकी कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम से भी बातचीत हुई थी। कांग्रेस नेताओं से मुलाकात के बाद मौर्य ने इंडिया गठबंधन में शामिल होने की घोषणा की थी।

 

उन्होंने कहा था कि वह विपक्षी गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहते हैं। कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, इस पर बाद में चर्चा की जाएगी। उन्होंने राहुल गांधी को देश का प्रधानमंत्री बनाने की इच्छा भी जताई थी। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई थी कि मौर्य अपनी जनता पार्टी को इंडिया गठबंधन में शामिल करा सकते हैं। यह संभावना भी जताई जा रही थी कि कांग्रेस मौर्य, उनके बेटे और बेटी को अपने चुनाव चिह्न पर मैदान में उतार सकती है।

 

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बसपा से बीजेपी और फिर सपा तक का सफर

स्वामी प्रसाद मौर्य का राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने बहुजन समाज पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था। बीजेपी के टिकट पर उन्होंने कुशीनगर की पडरौना विधानसभा सीट से चुनाव जीता और योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री बने। इसी दौरान बीजेपी ने उनकी बेटी संघमित्रा मौर्य को बदायूं लोकसभा सीट से टिकट दिया था, जहां से वह सांसद चुनी गईं।

 

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले मौर्य ने बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी का रुख कर लिया था। सपा ने उन्हें कुशीनगर की फाजिलनगर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद सपा ने उन्हें विधान परिषद भेजा।

रामचरितमानस विवाद के बाद सपा से भी तोड़ा नाता

समाजवादी पार्टी में रहते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य रामचरितमानस और अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर दिए गए बयान के कारण विवादों में घिर गए थे। उनके बयान का प्रदेश में विरोध हुआ और पार्टी के भीतर भी असहज स्थिति बनी। इसके बाद उन्होंने सपा से दूरी बना ली। फरवरी 2024 में उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया और अपनी जनता पार्टी के नाम से नया राजनीतिक दल बना लिया। तब से वह अपनी पार्टी के विस्तार और राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं।

 

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अब कांग्रेस के सामने गठबंधन का सियासी पेच

अखिलेश यादव के ताजा बयान के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य की इंडिया गठबंधन में शामिल होने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कांग्रेस मौर्य को अपने साथ जोड़ने के लिए अखिलेश यादव की नाराजगी मोल लेगी या फिर गठबंधन के भीतर एकजुटता बनाए रखने के लिए उनसे दूरी बनाएगी।

 

 राहुल और प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद जिस राजनीतिक संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं, अखिलेश के बयान ने उस पर नया सियासी पेच फंसा दिया है। फिलहाल मौर्य और कांग्रेस की ओर से अखिलेश के इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।