हरियाणा में फार्मासिस्ट्स की भारी कमी से सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। पिछले 5 साल में 1167 स्वीकृत पद में से 597 पद खाली पड़े हुए हैं। फार्मासिस्ट्स के रिटायर होने पर खाली पदों की संख्या बढ़ती जा रही है। इन खाली पदों को भरने के लिए एसोसिएशन ऑफ गवर्नमेंट फार्मासिस्ट्स ऑफ हरियाणा की तरफ से विभाग व सरकार को कई बार पत्र लिखा गया।
डीजी की तरफ से स्वीकृति मिलने के बाद भी इन पदों को नहीं भरा गया। हालात ये हैं कि अस्पतालों में मरीजों को अन्य स्टाफ दवाई देने को मजबूर है, जिस कारण उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। स्वीकृत पदों में से करीब आधे पद खाली होने से सरकारी अस्पतालों में व्यवस्था भगवान भरोसे ही चल रही है।
अस्पतालों में दवाई लेने आने वाले मरीजों को लंबी लाइनों में लगना पड़ता है। वहीं फार्मासिस्ट्स की कमी होने से अस्पतालों में कंपाउंडर या अन्य स्टाफ तक मरीजों को दवाएं दे रहे हैं। ऐसे में मरीजों के स्वास्थ्य से सीधा-सीधा खिलवाड़ हो रहा है। जबकि फार्मासिस्ट्स का होना अनिवार्य है।
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'डीजी की स्वीकृति पर भी संज्ञान नहीं'
एसोसिएशन ऑफ गवर्नमेंट फार्मासिस्ट्स ऑफ हरियाणा प्रधान जगदीप सिंह ने बताया कि एसोसिएशन की तरफ से डीजी हेल्थ, एसीएस हरियाणा, सीएम हरियाणा, स्वास्थ्य मंत्री हरियाणा से कई बार मुलाकात कर कई बार पत्र भी लिखा। करीब एक महीना पहले भी पत्र लिखा गया है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। उन्होंने बताया कि खाली पदों पर भर्ती को लेकर डीजी हेल्थ की तरफ से अप्रैल में स्वीकृति भी दी जा चुकी है। उसके बाद भी सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
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'ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट का उल्लंघन'
प्रधान जगदीप सिंह ने बताया कि प्रदेश की 70 से 80 प्रतिशत पीएचसी, सीएचसी में फार्मासिस्ट नहीं हैं। ऐसे में वहां पर आने वाले मरीजों को अन्य स्टाफ दवाई दे रहा है। जिस कारण मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जहां पर भी मरीजों को दवाइयां दी जाती हैं, वहां पर फार्मासिस्ट का होना अनिवार्य है। ये बात ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट में भी लिखी हुई है। उन्होंने बताया कि इसके बाद भी अस्पतालों में फार्मासिस्ट के स्थान पर अन्य स्टाफ के दवाई देने से इस एक्ट का भी उल्लंघन हो रहा है।
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रिकॉर्ड मेंटेन में परेशानी
प्रधान जगदीप सिंह ने बताया कि फार्मासिस्ट की कमी से सिर्फ दवा वितरण में दिक्कत नहीं आ रही, बल्कि दवाइयों का डेटा मेंटेन करने में भी परेशानी आ रही है। हर जिले में सरकारी अस्पतालों में कौन सी दवाई चाहिए, कौन सी दवाई खत्म हो रही है, कौन सी दवाई कब आएगी, कितनी दवाइयों का स्टॉक आया है व इनका बिलिंग प्रोसेस समेत कई प्रकार के रिकॉर्ड भी मेंटेन करने पड़ते हैं। ऐसे में फार्मासिस्ट की कमी से ये कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
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किस जिले में कितने पद खाली
| जिला |
स्वीकृत पद |
खाली पद |
|
अंबाला
|
63 |
50 |
| भिवानी |
60 |
26 |
| चरखी दादरी |
31 |
17 |
| फरीदाबाद |
34 |
12 |
| फतेहाबाद |
51 |
29 |
| गुरुग्राम |
47 |
22 |
| हिसार |
72 |
27 |
| झज्जर |
58 |
22 |
| जींद |
66 |
33 |
| कैथल |
49 |
18 |
| करनाल |
76 |
46 |
| कुरुक्षेत्र |
50 |
14 |
| नूंह (मेवात) |
38 |
16 |
| महेंद्रगढ़ |
53 |
35 |
| पलवल |
42 |
27 |
| पंचकूला |
54 |
12 |
| पानीपत |
47 |
28 |
| रेवाड़ी |
46 |
24 |
| रोहतक |
50 |
12 |
| सिरसा |
60 |
44 |
| सोनीपत |
67 |
20 |
| यमुनानगर |
53 |
36 |