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ई-साक्ष्य से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तक, हरियाणा पुलिस ने कैसे बदली जांच की तस्वीर?

तीन नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की दिशा में हरियाणा पुलिस ने विशेष उपलब्धियां हासिल की हैं। हरियाणा में ई-साक्ष्य और ई-समन ऐप का कर्मियों को प्रशिक्षण देकर रेवेन्यू, ईंधन और समय की बचत बढ़ी।

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हरियाणा पुलिस मुख्यालय व इनसेट में पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल। Photo Credit- AI Generated

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तीन नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में हरियाणा पुलिस ने विशेष उपलब्धियां हासिल की हैं। भारतीय न्याय संहिता, 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 को 1 जुलाई, 2024 से लागू किया गया था। इसके बाद हरियाणा देश का पहला राज्य बना, जिसने इन तीनों नए आपराधिक कानूनों को पूर्ण रूप से लागू किया है। सितंबर 2026 में हरियाणा ने नए आपराधिक कानूनों के डैशबोर्ड पर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।


हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि पुलिस इन कानूनों को केवल कानूनी प्रावधानों के रूप में लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके माध्यम से जांच की गुणवत्ता सुधारने, साक्ष्यों को मजबूत करने और न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। जांच अधिकारियों की सुविधा के लिए नए कानूनों के विशिष्ट प्रावधानों पर 14 द्विभाषी दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।

 

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56 हजार पुलिस कर्मियों का हुआ रजिस्ट्रेशन

हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने बताया कि हरियाणा पुलिस के शत-प्रतिशत पुलिस कर्मियों को नए आपराधिक कानूनों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 56 हजार पुलिस कर्मियों का IGOT पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन किया गया है, जिनमें से 34,500 कर्मियों ने पोर्टल पर उपलब्ध एआई आधारित पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।


हरियाणा में ई-साक्ष्य और ई-समन ऐप सफलतापूर्वक लागू किए गए हैं। सभी जांच अधिकारियों को ई-साक्ष्य ऐप पर आॅडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अपलोड करने का प्रशिक्षण दिया गया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 176(3) के तहत अपराध स्थल की फॉरेंसिक जांच की रिकॉर्डिंग में इस ऐप का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।

निर्धारित प्रावधानों के अंतर्गत 99.2 प्रतिशत फॉरेंसिक जांच रिकॉर्डिंग ई-साक्ष्य ऐप के माध्यम से की जा रही हैं। इसी प्रकार, हरियाणा में 78.13 प्रतिशत समन इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्राप्त हो रहे हैं। इससे कागजी कार्रवाई में कमी आई है तथा संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के समय, आवागमन और ईंधन की बचत हुई है।

 

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अदालतों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हो रहे 70 प्रतिशत पुलिसकर्मी

उन्होंने बताया कि न्यायिक प्रक्रिया में डिजिटल माध्यमों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए पुलिस थानों, फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं, न्यायालयों, जेलों और बैंकों में कुल 2,145 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग क्यूबिकल स्थापित किए गए हैं। इनके माध्यम से गवाहों और संबंधित व्यक्तियों की आॅडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पेशी एवं परीक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

 

वर्तमान में लगभग 70 प्रतिशत पुलिसकर्मी अदालतों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हो रहे हैं, जबकि 81.78 प्रतिशत आरोपी विभिन्न अदालतों में इसी माध्यम से पेश किए जा रहे हैं। इससे जेलों से अदालतों तक कैदियों को लाने-ले जाने के लिए जेल वैन और अन्य वाहनों के उपयोग में कमी आई है। परिणामस्वरूप ईंधन की बचत के साथ-साथ वाहनों के रखरखाव पर होने वाला खर्च भी कम हुआ है।

 

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फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में स्वीकृत पदों की बढ़ाई संख्या

उन्होंने बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 176(3) के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत सात वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों में अपराध स्थल पर फॉरेंसिक विशेषज्ञ की विजिट और साक्ष्य एकत्रित करने की प्रक्रिया की इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से रिकॉर्डिंग सुनिश्चित की जा रही है। हरियाणा ने सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में अपराध स्थलों पर फॉरेंसिक टीम की शत-प्रतिशत विजिट का लक्ष्य हासिल किया है। इसके अतिरिक्त, सात वर्ष से कम सजा वाले अपराधों में भी फॉरेंसिक टीमों की विजिट सुनिश्चित की जा रही है।

 

अपराध स्थलों पर फॉरेंसिक टीमों की उपस्थिति की नियमित निगरानी की जा रही है, ताकि साक्ष्यों के आधार पर जांच को अधिक मजबूत बनाया जा सके। फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में स्वीकृत पदों की संख्या 351 से बढ़ाकर 1,044 कर दी गई है, जो लगभग 197.4 प्रतिशत की वृद्धि है। कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों की संख्या भी 167 से बढ़कर 470 हो गई है। इनमें 290 नियमित कर्मचारी, 65 ओएसपी-कक, 86 एचकेआरएनएल और 29 एनआईसीएसआई के माध्यम से तैनात कर्मचारी शामिल हैं। 563 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया सक्रिय रूप से जारी है। वर्तमान में प्रत्येक जिले में कम से कम एक मोबाइल फॉरेंसिक वैन कार्यरत है, जबकि बड़े जिलों में दो वैन तैनात की गई हैं। 

 

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जीरो एफआईआर की साप्ताहिक समीक्षा

हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने बताया कि नागरिकों को त्वरित राहत प्रदान करने के उद्देश्य से जीरो एफआईआर की निगरानी के लिए मानक संचालन प्रक्रिया जारी की गई है। जिला पुलिस अधीक्षकों द्वारा जीरो एफआईआर की साप्ताहिक समीक्षा की जा रही है। हरियाणा में जीरो एफआईआर को सामान्यत: 48 घंटे के भीतर नियमित एफआईआर में परिवर्तित करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। इससे शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई और जांच प्रक्रिया में तेजी लाने में मदद मिल रही है।

 

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वीडियो कॉन्फ़्रेंस से कैदियों की पेशी

उन्होंने बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 303 के तहत राज्य सरकार द्वारा सामान्य आदेश जारी कर कुछ श्रेणियों के कैदियों को जेल से अदालत तक ले जाने की आवश्यकता को सीमित किया गया है। इसके परिणामस्वरूप 84.49 प्रतिशत आरोपी जेलों से ही वीडियो कॉन्फ़्रेंस के माध्यम से अदालतों में पेश हो रहे हैं। इससे सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव कम करने के साथ-साथ परिवहन, ईंधन और अन्य संसाधनों की बचत भी हो रही है।

 

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डिजिटल सेवाओं का विस्तार, पुलिस सेवाओं को बना रहा पारदर्शी 

उन्होंने बताया कि हरियाणा पुलिस द्वारा नागरिकों को अधिक सरल और पारदर्शी सेवाएं प्रदान करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। इनमें वाहन चोरी के मामलों में ई-एफआईआर की सुविधा, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम तथा हिट-एंड-रन मामलों में मुआवजे से संबंधित सूचनाएं संबंधित अधिकारियों को ई-मेल के माध्यम से भेजना, पुलिस थाना लोकेटर और जांच के प्रत्येक चरण में नागरिकों को एसएमएस अलर्ट भेजना शामिल है। इन पहलों से पुलिस सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा रहा है।

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