बिहार की बांकीपुर विधानसभा में 30 जुलाई को उपचुनाव होना है लेकिन उससे पहले ही यह सीट बीजेपी के लिए विवादों में पड़ गई है। यहां से नामांकन करने के एक दिन बाद ही बीजेपी उम्मीदवार अभिषेक कुमार 'बंटी' ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। बंटी के उम्मीदवारी वापस लेते ही सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं तैरने लगी हैं। इसी सिलसिले में अभिषेक बंटी के परिवार का नाम बिहार के चर्चित 'चारा घोटाले' में सामने आया है।

 

ऐसे में चर्चा है कि चारा घोटाले में नाम सामने आने के बाद बीजेपी को नाकारात्मक जानकारी लोगों के बीच फैलने का डर सता रहा था, इसलिए अभिषेक बंटी के नामांकन वापस लेकर नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बना दिया गया है। बता दें कि इस सीट से खुद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पांच बार विधायक रहे हैं। 

 

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अभिषेक बंटी ने लिखा पत्र

नामांकन वापस लेने के बाद अभिषेक बंटी ने बिहार बीजेपी अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा, 'मुझे भारतीय जनता पार्टी ने बांकीपुर विधानसभा उप चुनाव में एनडीए प्रत्याशी बनाया उसके लिए केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व के प्रति आभार प्रकट करता हूं। विनम्रता के साथ आपको आग्रह करना चाहता हूं कि मैं पारिवारिक कारण से विधानसभा उप चुनाव लड़ने में असमर्थ हूं।' हालांकि, उन्होंने कहा कि वह कार्यकर्ता के तौर पर बीजेपी के लिए काम करते रहेंगे।

नामांकन वापस लेने की असल वजह क्या?

समाचार एजेंसी पीटीआई ने नाम ना छापने की शर्त पर एक बीजेपी नेता के हवाले से बताया है कि अभिषेक कुमार बंटी के परिवार के एक सदस्य को चारा घोटाले में दोषी ठहराया गया था। बीजेपी को डर था सता रहा था कि अगर जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर इस मामले को चुनाव में उठा सकते थे। दरअसल, इससे पहले किशोर ने आरोप लगाते हुए कहा था कि 'बीजेपी खुद मान रही है कि वह भ्रष्ट लोगों को चुनावी मैदान में उतार रही है।'

 

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इस घटना में एक और बात सामने आ रही है कि चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में अभिषेक बंटी के पिता और मां का नाम भी सामने आया था। बीजेपी शीर्ष नेतृत्व को इस बात की जानकारी नहीं थी, मगर सच्चाई सामने आने के बाद बांकीपुर में उम्मीदवार ही बदल दिया गया।

अभिषेक बंटी के पिता का बयान

इस बारे में अभिषेक बंटी के पिता रविंद्र प्रसाद ने कहा है कि 'माता - पिता के गुनाहों की सजा बेटा भुगत रहा है। सिर्फ 11 लाख का मामला था, जिसमें उन्हें सजा हुई थी।'