भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने लंबे इंतजार के बाद सोमवार को अपनी संगठनात्मक टीम का ऐलान कर दिया। इस टीम में पंजाब से मनप्रीत सिंह बादल को जगह मिली है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। बीजेपी के लिए मनप्रीत बादल की नियुक्ति को पंजाब में पार्टी का राजनीतिक आधार मजबूत करने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। मनप्रीत बादल पंजाब की सत्ता पर कई दशकों तक राज करने वाले बादल परिवार से हैं और राजनीतिक रूप से वह काफी मजबूत माने जाते हैं। पंजाब की राजनीति में मनप्रीत बादल के प्रमोशन को जाट सिख वोट बैंक को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी पंजाब के आगामी विधानसभा चुनाव पूरी ताकत के साथ सभी सीटों पर लड़ने का मन बना रही है। ऐसे में पार्टी अलग-अलग जातिय और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश कर रही है। इसी कड़ी में पहले केवल सिंह ढिल्लों को पार्टी का प्रधान बनाया गया और अब मनप्रीत सिंह बादल को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। मनप्रीत सिंह बादल पंजाब में लंबे समय तक वित्त मंत्री रहे हैं और कांग्रेस और अकाली की सरकारों में काम कर चुके हैं।
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कौन हैं मनप्रीत सिंह बादल?
राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में मनप्रीत सिंह बादल का नाम नया है लेकिन पंजाब की राजनीति के वह पुराने खिलाड़ी हैं। उनका जन्म 26 जुलाई 1962 को पंजाब के मुक्तसर जिले में हुआ। वह पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के भतीजे हैं। उनके पिता गुरदास सिंह बादल भी पंजाब की राजनीति में सक्रिय रहे। यानी मनप्रीत का राजनीतिक सफर ऐसे परिवार से शुरू हुआ, जिसकी पंजाब की सियासत में कई दशकों से मजबूत पकड़ रही है।
उन्होंने राजनीति की शुरुआत भी अपने परिवार की पार्टी शिरोमणि अकाली दल से की और 1995 में गिद्दड़बाहा विधानसभा सीट से पहली बार विधायक बने। इसके बाद 1997, 2002 और 2007 में भी इसी सीट से विधानसभा पहुंचे। 2007 में प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली अकाली-भाजपा सरकार में उन्हें वित्त मंत्री बनाया गया। हालांकि, बाद में राजनीतिक मतभेदों के चलते उन्होंने अकाली दल छोड़ दिया और अपनी पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब बनाई।
मनप्रीत बादल की पार्टी का बाद में कांग्रेस में विलय हो गया और वह कांग्रेस का हिस्सा बन गए। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बठिंडा अर्बन सीट से जीत हासिल की और कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार में एक बार फिर वित्त मंत्री बने। इस तरह वह पंजाब की राजनीति में उन नेताओं में शामिल हो गए जिन्हें वित्त विभाग की जिम्मेदारी लंबे समय तक संभालने का अनुभव रहा। पंजाब के वित्त मंत्री के तौर पर उन्होंने कई बार राज्य का बजट पेश किया। उनकी पहचान आर्थिक और वित्तीय मामलों पर पकड़ रखने वाले नेता के तौर पर बनी। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें बठिंडा अर्बन सीट से हार का सामना करना पड़ा। जनवरी 2023 में उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दिया और उसी दिन बीजेपी में शामिल हो गए।
बीजेपी के लिए मनप्रीत बादल क्यों जरूरी?
भारतीय जनता पार्टी का संगठन पंजाब में काफी कमजोर है और मनप्रीत सिंह बादल को अकाली दल, कांग्रेस के साथ-साथ अपनी खुद की पार्टी चलाने का भी अनुभव है। इसके साथ ही उनकी राजनीति बीजेपी के समीकरणों में फिट बैठ रही है। मनप्रीत बादल की राजनीतिक पकड़ मुख्य रूप से बठिंडा और गिद्दड़बाहा क्षेत्र में रही है। ये इलाके मालवा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पंजाब की राजनीति में मालवा का खास महत्व है क्योंकि विधानसभा की सबसे ज्यादा 69 सीटें इसी क्षेत्र में आती हैं और इस क्षेत्र से बीजेपी के पास मजबूत नेताओं की कमी है।
इसके साथ ही इस इलाके में जाट सिख मतदाताओं की भी बड़ी हिस्सेदारी है। बीजेपी लंबे समय से जाट सिख वोट को अकाली दल और आम आदमी पार्टी से अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रही है। ऐसे में मनप्रीत बादल की नियुक्ति को इसी दिशा में एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि बादल का राजनीतिक अनुभव और मालवा में उनकी पहचान बीजेपी को इस समुदाय के बीच पहुंच बनाने में मदद कर सकती है।
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गिद्दड़बाहा का किला
गिद्दड़बाहा कभी अकाली दल का अभेद किला माना जाता था लेकिन बाद में इस किले में कांग्रेस पार्टी ने फतेह की। जिस व्यक्ति ने 2012 में अकाली दल से यह सीट छिनी वह आज पंजाब कांग्रेस का प्रधान है लेकिन 2024 में हुए उपचुनाव में इस सीट पर आम आदमी पार्टी ने बाजी मार ली। अब यह सीट सबसे होट सीटों में से एक है। इस सीट पर आगामी विधानसभा चुनाव में मुकाबला रोचक होने की संभावना है। बीजेपी को इस सीट से एक मजबूत चेहरा मनप्रीत बादल के रूप में मिल गया है जिसका आसपास की सीटों पर भी अच्छा प्रभाव है। भले ही मनप्रीत बादल इस सीट से चुनाव हार चुके हैं लेकिन मालवा क्षेत्र के समीकरण साधने के लिए मनप्रीत सिंह बादल से बेहतर कोई और चेहरा पार्टी के पास नहीं है।
