उत्तर प्रदेश के रायबरेली में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की PDA रथयात्रा के दौरान बुलडोजर से हुआ स्वागत अब सियासी चर्चा का विषय बन गया है। जिस बुलडोजर को लेकर समाजवादी पार्टी लंबे समय से बीजेपी सरकार पर निशाना साधती रही है, उसी बुलडोजर को अखिलेश यादव के स्वागत के लिए खड़ा किया गया। बुलडोजरों से फूल बरसाए गए और बड़ी फूल-मालाओं से स्वागत किया गया।

24 सितंबर को अखिलेश यादव ने रायबरेली से अपनी PDA रथयात्रा की शुरुआत की। लखनऊ से रायबरेली जाते समय मोहनलालगंज और बछरावां समेत कई जगहों पर सपा कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। बछरावां में बुलडोजरों के जरिए अखिलेश यादव पर पुष्पवर्षा की गई और उन्हें फूल-मालाएं पहनाई गईं।

 

अखिलेश ने बस से ही कार्यकर्ताओं का अभिवादन स्वीकार किया।कुछ जगहों पर बुलडोजर पर डॉ. भीमराव आंबेडकर और मुलायम सिंह यादव की तस्वीरें भी लगाई गई थीं। इस वजह से यह स्वागत सिर्फ एक सामान्य स्वागत कार्यक्रम न रहकर राजनीतिक प्रतीक के तौर पर भी चर्चा में आ गया।

 

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सपा करती रही है हमला, वही बना स्वागत का जरिया

 

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुलडोजर पिछले कई वर्षों से एक बड़ा राजनीतिक प्रतीक रहा है। बीजेपी सरकार की कार्रवाई के संदर्भ में सपा और अन्य विपक्षी दल बुलडोजर के इस्तेमाल पर सवाल उठाते रहे हैं। अखिलेश यादव भी पहले बुलडोजर को लेकर बयान देते रहे हैं।अब 2027 विधानसभा चुनाव से पहले PDA रथयात्रा में बुलडोजर का इस तरह इस्तेमाल चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, सपा की ओर से इसे बुलडोजर नीति का समर्थन बताने के बजाय स्वागत और राजनीतिक संदेश के संदर्भ में देखा गया है।

अखिलेश बोले- अब 'वोट का बुलडोजर' चलेगा

रायबरेली में अखिलेश यादव ने बुलडोजर को लेकर खुद भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि इस बार 'वोट का बुलडोजर' चलेगा। उनके मुताबिक यह चुनाव बीजेपी बनाम PDA होगा। उन्होंने बीजेपी पर बुलडोजर के इस्तेमाल को लेकर भी निशाना साधा और कहा कि PDA के लोग आरक्षण, संस्कृति और लोगों के अधिकारों के लिए खड़े हैं।इस बयान के बाद सपा कार्यकर्ताओं की ओर से बुलडोजर से किया गया स्वागत और भी ज्यादा चर्चा में आ गया।

 

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2027 से पहले सियासी प्रतीकों की नई लड़ाई

अखिलेश यादव की PDA रथयात्रा को 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। सपा इस यात्रा के जरिए पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी PDA सामाजिक आधार के बीच संपर्क बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में बुलडोजर जैसे बेहद चर्चित राजनीतिक प्रतीक का इस्तेमाल यात्रा के दौरान होना सियासी तौर पर अलग संदेश के रूप में देखा जा रहा है।रायबरेली में बुलडोजर से स्वागत की तस्वीरों ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि जिस बुलडोजर को सपा की राजनीति में लंबे समय तक बीजेपी सरकार की कार्रवाई के प्रतीक के तौर पर निशाना बनाया गया, वही अब अखिलेश यादव के स्वागत का हिस्सा कैसे बन गया? चुनावी माहौल में इस प्रतीक की राजनीति आने वाले दिनों में तय होगी।