संसद का पिछला सत्र जब चल रहा था तभी चर्चा थी कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़े स्तर पर बदलाव हो सकता है। उसी संसद सत्र के दौरान दो मंत्रियों ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा भी दिया लेकिन विस्तार नहीं हो सका। फिर संसद सत्र के बाद विस्तार या फेरबदल की चर्चा थी लेकिन संसद सत्र खत्म हुए लगभग 2 महीने होने वाले हैं लेकिन अभी तक कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस बीच उत्तर प्रदेश में हो रहे राज्यसभा चुनाव के लिए आई भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवारों की लिस्ट ने संकेत दिए हैं कि कम से कम दो और मंत्रियों की भी छुट्टी हो सकती है। इनमें कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह पुरी और राज्य मंत्री बी एल वर्मा का नाम शामिल है। इससे पहले, इसी तरह रवनीत सिंह बिट्टू और जार्ज कुरियन भी मंत्रिमंडल से बाहर हो चुके हैं।
इन चारों ही नेताओं को राज्यसभा नहीं भेजा गया। रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब में विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी करने के लिए लौट गए हैं। वहीं, जार्ज कुरियन फिर से संगठन के काम में लगे हैं। अब इसी लिस्ट में हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का नाम भी शामिल होता दिख रहा है। इन दोनों ही नेताओं का राज्यसभा का कार्यकाल नवंबर के आखिर में खत्म हो रहा लेकिन उन्हें राज्यसभा नहीं भेजा जा रहा है। ये मंत्री बिना किसी सदन का सदस्य रहे भी 6 महीने तक मंत्री रह सकते हैं लेकिन इस बात की उम्मीद कम ही है कि उन्हें फिर से मंत्री बनाया जाएगा।
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अगर और राज्यसभा के चुनावों के बारे में देखें तो अभी हो रहे चुनावों के अलावा 2027 में कुल 4 सीटों पर चुनाव होने हैं। इनमें से 3 सीटें केरल की और एक सीट पुडुचेरी की है। हालांकि, पुडुचेरी की सीट अक्तूबर 2027 में खाली होगी। ऐसे में ये नेता उस सीट से तो राज्यसभा नहीं जा पाएंगे। केरल में बदली परिस्थितियों के बाद वहां कांग्रेस अपने उम्मीदवारों को जिताने में कामयाब होगी और लेफ्ट के दो और राज्यसभा सांसद कम हो जाएंगे।
हरदीप सिंह पुरी का क्या होगा?
मोदी कैबिनेट में बचे एकमात्र सिख चेहरे हरदीप सिंह पुरी राज्यसभा के सदस्य हैं लेकिन अब उन्हें इस सदन में फिर से नहीं भेजा जा रहा है। पहले सरकारी सर्विस में रहे हरदीप सिंह पुरी संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधि करते रहे हैं। सितंबर 2017 में पहले तो उन्हें आवास और शहरी मामलों का मंत्री बना गया। इसके बाद वह जनवरी 2018 में पहली बार राज्यसभा के सदस्य बने थे। 2019 में बनी मोदी सरकार में उन्हें सिविल एविएशन मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार दिया गया। 2021 में वह पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री बने और अभी भी यही पद संभाल रहे हैं।
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2019 में वह अमृतसर से लोकसभा का चुनाव भी लड़े थे लेकिन गुरजीत सिंह औजला से हार गए थे। एप्स्टीन फाइल्स में नाम आने के बाद से ही चर्चा है कि उन्हें कैबिनेट से बाहर किया जा सकता है। अब उनकी उम्र 74 साल हो चुकी है ऐसे में माना जा रहा है कि इस लिहाज से भी उन्के नाम पर विचार नहीं किया गया है।
B L वर्मा को नई जिम्मेदारी मिलेगी?
2020 में राज्यसभा के सांसद बने बी एल वर्मा बीजेपी के संगठन से जुड़े नेता माने जाते हैं। 2021 में उन्हें सहकारिता मंत्रालय और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया। बाद में जब 2024 में तीसरी बार नरेंद्र मोदी की सरकार बनी तब उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ-साथ सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाया गया। केंद्र की राजनीति में आने से पहले बी एल वर्मा संगठन में ही काम करते रहे हैं। वह दिवंगत हो चुके पूर्व सीएम कल्याण सिंह के भी करीबी रहे और बदायूं से आते हैं। अब चर्चा है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में उतारा जा सकता है।
गौरतलब है कि वह उत्तर प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष बनने की रेस में भी थे लेकिन आखिरी वक्त में पंकज चौधरी बाजी मार गए। बाद में जब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी टीम बनाई तब उसमें भी बी एल वर्मा को कोई पद नहीं दिया गया। अब उन्हें राज्यसभा भी नहीं भेजा जा रहा है तो माना जा सकता है कि उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ाकर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय करने की तैयारी है।
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3 और मंत्री छोड़ चुके पद
पिछली बार जब राज्यसभा के चुनाव हुए तो दो मंत्रियों का नाम उस लिस्ट में नहीं था। पहले थे जार्ज कुरियन और दूसरे थे रवनीत सिंह बिट्टू। पंजाब से आने वाले रवनीत सिंह बिट्टू ने तो साफ कहा है कि वह अपने राज्य जा रहे हैं। पूरी चर्चा है कि वह किसी अहम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। ऐसे में उन्हें केंद्र की जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है। इसी तरह जार्ज कुरियन को भी राज्यसभा नहीं भेजा गया तो उन्हें भी मंत्री पद छोड़ना पड़ा। इन दोनों के अलावा, शिक्षा मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान भी इस्तीफा दे चुका हैं और शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी संभाल रहे हैं।
अभी इस लिस्ट में और भी नाम शामिल हो सकते हैं। इसकी वजह है बीजेपी का एक व्यक्ति एक पद का सिस्टम। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी और मंत्री हर्ष मल्होत्रा भी इस लिस्ट में जल्द ही शामिल हो सकते हैं। ये दोनों ही लोकसभा के सांसद हैं। पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी तो हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि जब भी मंत्रिमंडल में बदलाव होगा तो इन दोनों को भी उसमें जगह नहीं मिलेगी।
इस तरह से कुल 3 मंत्री अपना पद छोड़ चुके हैं। 2 का कार्यकाल खत्म हो रहा है और 2 और मंत्रियों को दूसरे बड़े पद दिए गए हैं तो उनका इस्तीफा होना भी तय माना जा रहा है। हालांकि, इस सबके बीच मंत्रिमंडल विस्तार अटका हुआ है। माना जा रहा है कि नेशनल डेमोक्रैटिक अलायंस (NDA) में पहले से शामिल दलों और अब शामिल होने की कोशिश में जुटे दलों को लेकर संयोजन नहीं बन पा रहा है। इसके अलावा, कुछ मंत्रियों के इस्तीफा देने से इनकार कर देने की चर्चा है। ऐसे में यह देखना होगा कि अब खाली हुए पदों को कैसे भरा जाता है और क्या यह मंत्रिमंडल का बदलाव सच में 2029 की तैयारियों को ध्यान में रखकर होगा या फिर यह सिर्फ खानापूर्ति भर रह जाएगा।
