सुबोध उनियाल का नाम सुना है? उत्तराखंड सरकार में वन मंत्री हैं। मेडिकल हेल्थ और एजुकेशन विभाग भी संभालते हैं, विधायी और संसदीय कार्य मंत्री भी हैं। करीब एक सप्ताह पहले तक इनका नाम, उत्तराखंड से बाहर के लोग कम जानते थे। अब हिंदी और पंजाबी गानों को पसंद करने वाला एक बड़ा तबका इन्हें जानने लगा है। वजह यह है कि इन्होंने मशहूर गायक दलेर मेहंदी को भरे मंच से जलील किया है। उनके समर्थकों ने तो दलेर मेहंदी से बदसलूकी करने पर तालियां बजाईं लेकिन पूरा बॉलीवुड और पंजाब इनके खिलाफ हो गया है।
दलेर मेहंदी के लाखों प्रशंसक ऐसे हैं जो सुबोध उनियाल पर भड़क गए हैं। ज्यादातर लोगों का कहना है अपनी सियासत चमकाने के लिए बाहर से आए कालाकार के साथ ऐसी बदसलूकी दिखा रही है कि उत्तराखंड सरकार के जन प्रतिनिधि, उनके साथ कैसा सलूक करते हैं। सुबोध उनियाल ने जो किया है, उसके खिलाफ आम लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर सक्रिय एक बड़ा तबका नाराज है। कुछ लोग अब लिख रहे हैं कि मध्य प्रदेश के एक गृहमंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा के भी ऐसे ही तेवर रहे, जिसकी वजह से उनकी सियासी जमीन तक खिसक गई।
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क्यों सुबोध उनियाल पर भड़के हैं लोग?
18 अक्तूबर को दलेर मेहंदी टिहरी जिले के नरेंद्र नगर में थे। वहां कुंजापुरी मेला लगा है। इसी मेले में दलेर मेहंदी का कार्यक्रम था। यहां वह लाइव शो कर रहे थे, तभी सुबोध उनियाल मंच पर चढ़ जाते हैं और माइक उठा लेते हैं। उनके साथ समर्थकों का एक समूह भी मौजूद रहता है। वह दलेर मेहंदी पर भड़क उठते हैं। हजारों लोगों के सामने खुले मंच पर वह कहते हैं-
इतना पैसा देके हमने आपको बुलाया। इसलिए बुलाया कि हमारे लोगों को, सर आप ध्यान से, आप हमको मतलब बेवकूफ बना रहे हैं बैठ के? मिक्सर के जरिए आवाज निकाल रहे हैं। गलत बात है, गलत बात है।बड़े नाम का, बड़े नाम का हमेशा आदर-सत्कार करना चाहिए। हम लोगों ने इसलिए बुलाया था कि आपका बड़ा नाम है। आपसे बोला तो जा नहीं रहा, गाना क्या गाएंगे? यह ठीक नहीं है।
दलेर मेहंदी हाथ जोड़ते नजर आते हैं। संगीत की दुनिया के लिए दलेर मेहंदी बडे़ नाम हैं। देश की चर्चित हस्ती हैं। देशभर के संगीत प्रेमी इस हरकत पर भड़क गए हैं। सोशल मीडिया पर पत्रकार, कलाकार और आम नागरिक लिख रहे हैं कि यह पंजाब, पंजाबियत और कला का अपमान है। ऐसा सलूक अगर उत्तराखंड सरकार का एक प्रतिनिधि करेगा तो फिर किस हक से लोग वहां जाएंगे। सबसे ज्यादा नाराजगी पंजाबी समुदाय में है।
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एक तो चोरी, दूसरे पर सीनाजोरी?
दलेर मेहंदी से बदसलूकी के बाद सुबोध उनियाल:-
दलेर मेहंदी साहब एक बहुत बड़ा नाम हैं, बहुत बड़े गायक हैं। यही कारण है कि हमने उन लोगों को बुलाया था। बुलाने के बाद जब मंच पर यह लगा कि वह केवल लिप-सिंकिंग कर रहे हैं, गाना नहीं गा रहे हैं तो लोगों ने कहा। मैं वहां का स्थानीय प्रतिनिधि भी हूं और मेला कमेटी का संरक्षक भी हूं, लोगों का दबाव था कि आखिर इनसे पूछिए।
सुबोध उनियाल ने कहा, 'मैंने एंकर को बुलाया। एंकर को कहा कि भाई हम लोग सारे लोग दलेर मेहंदी जी को सुनने आए हैं, उनकी टीम को सुनने नहीं आए हैं। क्योंकि टीमें तो हमारे यहां भी तमाम हैं। ऐसी स्थिति में मैंने कहा उनको कम से कम गाना अब यहां पर परफॉर्म करना चाहिए।
दलेर मेहंदी से बदसलूकी के बाद सुबोध उनियाल:-
थोड़ी देर के बाद जब एंकर से बात हुई तो एंकर ने सारे म्यूजीशियन को इशारे-इशारे में, पर्सनली सबके पास जाकर कहा कि हाथों से इशारे करते रहें। यही लगे कि गाया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर एक तबका लिख रहा है कि पहले सुबोध उनियाल ने गलती की। अब अपनी गलती मानने की जगह लीपा-पोती कर रहे हैं। अपनी सफाई में उन्होंने जो कहा है, उससे भी कहीं यह नहीं लग रहा कि अपने व्यवहार के लिए उन्हें कोई पछतावा है। लोग उनकी तुलना नरोत्तम मिश्रा से कर रहे हैं।
क्या कह रहे हैं लोग?
सीनियर अभिनेता अनुपम खेर, सुबोध उनियाल की इस हरकत पर भड़क गए। उन्होंने कहा, 'हो सकता है उसने लिप-सिंक किया हो, लेकिन किसी को भी किसी से इस तरह बात नहीं करनी चाहिए। वह भी पब्लिक फोरम पर, यह सही नहीं है। किसी पर इस तरह आरोप लगाना गलत है। मुझे लगता है कि हमारी इंडस्ट्री को इस बारे में बात करनी चाहिए। अपने भाई का बचाव करना सिर्फ मीका सिंह की जिम्मेदारी नहीं है। हम सभी को उन लोगों के लिए स्टैंड लेना चाहिए जिन्हें हम जानते हैं।'
अनुपम खेर, अभिनेता:-
मुझे बुरा लगा और मैं आपको बताना चाहता हूं, दलेर जी, कि मुझे आपके जजमेंट, प्रोफेशनलिज्म और आपकी महानता पर भरोसा है और भगवान आपको आशीर्वाद दें और आप जल्दी ठीक हो जाएं। मुझे दुख है कि आपको इससे गुज़रना पड़ा।
राजपाल यादव ने कहा, 'दलेर पाजी को मैं जानता हूं। वह शराब नहीं पीते हैं। एक सम्मानित मंत्री, हजारों लोगों के सामने, एक ऐसे सिंगर जिसकी आवाज ने दशकों से लोगों की सेवा है, ऐसे अशोभनीय शब्द कह रहे थे, माननीय मंत्री यह शोभा नहीं देता है। ऐसा लगा कि आपने कला खरीद ली हो। कला एक जीवन है, जीवन का सम्मान कीजिए। आपकी जानकारी के लिए बता दूं, शराब नहीं पीते हैं। उनका स्वास्थ्य खराब चल रहा है।'
राजपाल यादव, अभिनेता:-
पद आते हैं जाते हैं, कला का पद हजारों वर्षों से है, कला का सम्मान कीजिए।
कपिल शर्मा ने कहा, 'दलेर पाजी की एक सीरियस सर्जरी हुई है जिसके बारे में लोगों को पता नहीं है। हमें बस एक-दूसरे के प्रति थोड़ा और नरम होने की जरूरत है। हमें नहीं पता कि कोई किस दौर से गुजर रहा है।'
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दलेर पाजी के भाई मीका सिंह ने क्या कहा?
मीका सिंह ने कहा, 'दलेर मेहंदी के साथ स्टेज पर जैसा बर्ताव हुआ, वह निराशाजनक था। एक इज्जजतदार मिनिस्टर स्टेज पर आए और उन पर शराब पीने का आरोप लगाया। ऐसे दावे पब्लिश करने से पहले, क्या हमें तथ्यों को नहीं जांचना चाहिए और आर्टिस्ट को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं देना चाहिए? क्या कोई कोल्डप्ले जैसे इंटरनेशनल बैंड के साथ ऐसा बर्ताव करने की हिम्मत करेगा?'
नरोत्तम मिश्रा जैसी गलती दोहरा रहे हैं सुबोध उनियाल?
जैसे सुबोध उनियाल, उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता बने हुए हैं, कुछ वैसी ही राजनीतिक हैसियत मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की थी। मध्य प्रदेश का दतिया उनका गढ़ था। साल 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र भारती ने हरा दिया था। 2023 के बाद साल 2026 में दतिया पर उपचुनाव भी हुए। वह खुद के लिए प्रचार कर रहे थे, माहौल बना रहे थे लेकिन पार्टी ने उन्हें भाव ही नहीं दिया।
जब वह गृहमंत्री थे, भारतीय जनता पार्टी के लिए आफत बन गए थे। उन्होंने कई फैसले ऐसे लिए, जिस पर सवाल उठे। वह अपने गृहमंत्रालय के फैसलों की बात कम करते, कभी उनका ध्यान शूटिंग रोकने पर होता, कभी फिल्मों में हिरोइनों के पहनावे पर। उनके कार्यकाल में बॉलीवुड निर्देशकों के लिए मध्य प्रदेश में शूटिंग करना मुश्किल हो गया था।
नरोत्तम मिश्रा और बॉलीवुड का पंगा क्या था?
नरोत्तम मिश्रा के कई विवाद रहे। शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण की फिल्म 'पठान' के गाने 'बेशरम रंग' गाने पर उन्हें दीपिका की भगवा बिकनी पसंद नहीं आई थी। उन्होंने कहा था कि गाने में कलाकारों के कपड़ों के हरे और भगवा रंग को ठीक किया जाना चाहिए। उनके बयान के बाद इस फिल्म पर मध्य प्रदेश में हंगामा बरप गया था।
नरोत्तम मिश्रा (26 दिसंबर 2021):-
कुछ विधर्मी लगातार हिंदू भावनाओं को आहत कर रहे हैं। 'मधुबन में राधिका नाचे' ऐसा ही कुत्सित प्रयास है। मैं सनी लियोनी जी व शारिब तोशी जी को हिदायत दे रहा हूं कि समझें और संभलें। अगर तीन दिन में दोनों ने माफी मांगकर गाना नहीं हटाया तो हम उनके खिलाफ एक्शन लेंगे।
नरोत्तम मिश्रा फिल्मों और उनके सीन पर आपत्ति जताते रहे हैं। उन्हें आदिपुरुष पर भी गुस्सा आया था। उन्होंने केस दर्ज कराने की धमकी भी दी थी। उन्होंने फिल्मकार लीना मणिमेकलई की डॉक्यूमेंट्री काली के पोस्टर पर विवाद के बाद FIR दर्ज कराने का निर्देश दिया था। उन्होंने स्वरा भास्कर को पाकिस्तानी और टुकड़े-टुकड़े गैंग बता दिया था।
नरोत्तम मिश्रा का हुआ क्या?
मध्य प्रदेश के गृह मंत्री रहते हुए नरोत्तम मिश्रा ने 'सांस्कृतिक पहरेदार' का तमगा तो ले लिया लेकिन उनकी राजनीति खराब हो गई। मध्य प्रदेश से लेकर देशभर में उनकी खराब छवि बनी। बात-बात पर वह टीवी डिबेट में शामिल होते, माइक-कैमरा से घिरे रहते। उनके बयानों की खूब आलोचना हुई। यह आक्रामक पहचान उनके राजनीतिक आधार को नहीं बचा सकी।
फिल्मों और सितारों पर मुखर होकर उन्होंने सोशल मीडिया और हेडलाइंस में तो खूब सुर्खियां बटोरीं, मगर उनके इस रुख ने स्थानीय जमीनी मुद्दों, सत्ता-विरोधी लहर और दतिया विधानसभा सीट के क्षेत्रीय जातीय समीकरणों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
नतीजा यह रहा कि 2023 के विधानसभा चुनाव में जहां बीजेपी ने प्रदेश भर में प्रचंड बहुमत हासिल किया, वहीं बॉलीवुड से भिड़ने वाले नरोत्तम मिश्रा खुद अपने ही गढ़ दतिया से कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती से हार गए। युवाओं ने भी उनसे कन्नी काट ली। आलोचकों का कहना है कि बीजेपी ने भी विवादित चेहरा होने की वजह से उन्हें अभी तक हाशिए पर रखा है। सुबोध उनियाल इसी रास्ते पर जाते नजर आ रहे हैं।
सुबोध उनियाल की राजनीति क्यों दांव पर?
पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। अब यह मुद्दा पंजाब अस्मिता का बन गया है। पंजाबियों ने सबसे ज्यादा सुबोध उनियाल की हरकत पर नाराजगी जाहिर की है। सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि पंजाब में अब बीजेपी के नेता वोट कैसे मांगेंगे। पंजाब में बीजेपी पहले से ही राजनीतिक तौर पर हाशिए पर है। सुबोध उनियाल न माफी मांग रहे हैं, न ही अपनी गलती मान रहे हैं।
दलेर मेहंदी पंजाब की सांस्कृतिक पहचान और वैश्विक स्तर पर सम्मानित चेहरे माने जाते हैं। उन पर सार्वजनिक मंच से नशे और लिप-सिंक के गंभीर आरोप लगाकर फटकार लगाने से पंजाब के लोगों, कलाकारों और सामाजिक हलकों में नाराजगी फैली है। अब उत्तराखंड में भी सुबोध उनियाल के गुस्से वाले कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जब उन्हें आम लोगों ने भी फटकारा है। एक वीडियो में वह बूथ में जाते दिख रहे हैं, लोग उनसे तीखे सवाल कर रहे हैं।
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए बीजेपी पहले से ही किसान आंदोलनों और स्थानीय समीकरणों के चलते राजनीतिक रूप से जमीन तलाशने में जुटी है। विपक्षी दल और जनता पंजाबी मान-सम्मान पर प्रहार के तर पर इस प्रचारित कर रही है। अब न सिर्फ सुबोध उनियाल की अपनी राजनीतिक साख को सवालों के घेरे में है, बल्कि पंजाब में पार्टी के चुनावी भविष्य और जनसंपर्क अभियान के सामने भी नया संकट पैदा हो गया है।
