गुजरात के वडोदरा में मंगलवार को 'नमो फॉर विकसित भारत' कार्यक्रम आयोजित हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम को संबोधित करने पहुंचे तो बहुत कुछ बदला-बदला नजर आया। आमतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्टेज पर बगल से एंट्री करते हैं लेकिन इस बार उनके स्टेज के सामने रैंप बनाया गया था। वह युवाओं के बीच से चलते हुए और उनका अभिवादन करते हुए स्टेज तक गए। इस दौरान युवाओं के हिसाब से हाई एनर्जी वाला म्यूजिक बजता रहा। इसे अब GenZ के जुड़ने के प्रयासों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जोरदार प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री ने खुद भी वर्टिकल वीडियो बनाने शुरू किए हैं और अब एक और तकीका अपनाया है।
इस तरीके की चर्चा की एक और वजह है। तमिलनाडु में चमत्कारिक तरीके से सत्ता तक पहुंचे जोसेफ विजय उर्फ थलपति विजय , राहुल गांधी , आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी और अभिषेक बनर्जी जैसे नेता भी जनता से जुड़ने के लिए इस तरीके का इस्तेमाल कर चुके हैं। इसमें मंच पर दर्जनों लोगों को बिठाने के बजाय एक नेता बीच में होता है और चारों तरफ बैठे समर्थकों के बीच अपनी बात रखता है। पारंपरिक तौर पर बनने वाले स्टेज से जनता को दूर रखने के लिए कुछ गैप छोड़ा जाता है और फिर बैठने की जगह बनाई जाती है। माना जाता है कि इससे एक दूरी बनती है और इसी गैर को भरने के लिए बड़ी रैलियों में स्क्रीन भी लगाई जाती हैं।
यह भी पढ़ें: पढ़ाई, लिखाई से शादी तक, निषाद वोटरों पर क्या दांव खेल गए CM योगी?
इसकी तुलना में रैंप वाले स्टेज में नेता या स्पीकर जनता के बीचोबीच खड़ा होता है और ज्यादा से ज्यादा लोग उसे अपने पास देख पाते हैं। कई बार ये नेता वहीं से जनता से बातचीत करते हैं, हाथ मिलाते हैं या फिर सवाल-जवाब भी कर लेते हैं। इसके उलट, एक तरफ बड़े मंच दूसरी तरफ जनता वाली व्यवस्था में यह संभव नहीं होता है। शायद यही वजह है कि युवाओं से दूरी की समस्या से जूझ रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संवाद के इस तरीके को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
राहुल गांधी और CJP ने बढ़ाई चिंता?
यह देखा गया है कि CJP के प्रदर्शन के चलते युवाओं के बढ़ते गुस्से को काउंटर कर पाने में बीजेपी को काफी मुश्किल हुई। यही वजह रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रियों से कहा कि वे सभी इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्म के जरिए युवाओं से जुड़ें। इसकी शुरुआत खुद उन्होंने की और अब योगी आदित्यनाथ जैसे नेता भी वर्टिकल वीडियो बनाने लगे हैं। हालांकि, अभी भी बीजेपी में लगातार कोशिशें जारी हैं कि युवाओं से और बेहतर संवाद कैसे किया जाए। कहा जा रहा है कि संभावित कैबिनेट फेरबदल में भी इसका असर दिख सकता है और कम उम्र के ज्यादा नेताओं को मंत्री बनाया जा सकता है।
यह भी पढ़ें: प्रधानमंत्री का बन रहा है मंदिर, व्यक्ति पूजा को लेकर क्या कहते हैं वेद? समझिए
दूसरी तरफ, राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता और सक्रियता ने भी बीजेपी की चिंताओं का ग्राफ ऊपर कर दिया है। राहुल गांधी हर दिन सक्रिय हैं और अलग-अलग शहरों में जाकर 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के जरिए युवाओं से संवाद कर रहे हैं। राहुल गांधी के ये कार्यक्रम चर्चा में हैं क्योंकि इनमें भी संवाद के तरीके को बदला गया है। इनमें राहुल गांधी युवाओं को बुलाते हैं और पहले उनकी बात सुनते हैं। बाद में वह अपनी बात रखते हैं। इन कार्यक्रमों को वह गैर राजनीतिक बताकर ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जोड़ने की कोशिश में लगे हुए हैं।
इसके अलावा, CJP की लगातार सक्रियता और अलग-अलग मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिशों ने बीजेपी को और दबाव में ला दिया है। उसी का नतीजा है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगे बढ़कर उन तौर तरीकों को अपना रहे हैं जिनसे शायद बीजेपी अब तक दूरी बना रही थी।
इसी क्रम में वह सेल्फी वीडियो बना रहे हैं, 'मित्रो' की जगह 'हाय फ्रेंड्स' बोल रहे हैं और GenZ के बीच इस्तेमाल होने वाले कई शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
क्यों टेंशन में है बीजेपी?
आने वाले कुछ ही समय में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गुजरात, मणिपुर और गोवा जैसे राज्यों में चुनाव होने हैं। इनमें से पांच राज्यों में बीजेपी की ही सरकारें हैं। पांच में चार राज्य में तो पिछले दो या तीन बार से बीजेपी की ही सरकार है। ऐसे में बढ़ती ऐंटी इन्कमबेंसी में बीजेपी युवाओं की नाराजगी को नहीं जोड़ना चाही है।
यह भी पढ़ें: 20,700 करोड़ लागत, 326KM लंबाई; PM मोदी WDFC के 3 सेक्शन का किया उद्घाटन
चुनाव आयोग का डेटा बताता है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कुल जितने वोटर थे उनमें से 22.78 प्रतिशत ऐसे थे जिनकी उम्र 18 से 29 साल के बीच थी। यानी लगभग 20 प्रतिशत मतदाता ऐसे हैं जो कम उम्र के हैं और वे उसी वर्ग से आते हैं जिसने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करके धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया। उस उम्र वर्ग के 21 प्रतिशत वोटर यूपी में, गुजरात में 23 प्रतिशत, पंजाब में 21 प्रतिशत, उत्तराखंड में 22 प्रतिशथ, गोवा में 20 प्रतिशत तो मणिपुर में 24 प्रतिशत हैं। ऐसे में कोई भी पार्टी इन युवाओं को नाराज करने का रिस्क नहीं लेना चाहती है।
