तृणमूल कांग्रेस (TMC) में हर दिन होती बगावत के बीच पार्टी के लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी ने ममता बनर्जी की ओर से मोर्चा संभाल रखा था। बागियों को गद्दार बताकर कल्याण बनर्जी कह रहे थे कि इन लोगों में हिम्मत है तो अपने क्षेत्र में जाएं और कार्यकर्ताओं का सामना करके दिखाएं। सिर्फ दो दिन में कल्याण बनर्जी के भी सुर बदलने लगे है। अब उन्हीं कल्याण बनर्जी ने ममता बनर्जी को आंख दिखानी शुरू कर दी है। कल्याण बनर्जी ने साफ कहा है कि ममता बनर्जी को चुनना होगा कि वह पार्टी में उन्हें (कल्याण बनर्जी को) रखेंगी या अभिषेक बनर्जी को। कल्याण बनर्जी ने साफ कहा है कि अगर अभिषेक बनर्जी रहेंगे तो वह इस पार्टी में नहीं रह सकते हैं।

 

कल्याण बनर्जी की नाराजगी की बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि अभिषेक बनर्जी ने उन्हें अपने केस से वकील के तौर पर हटा दिया है। इस बारे में कल्याण बनर्जी ने कहा है कि जब वह केस देख रहे हैं तो उनसे पूछे बिना किसी और को यह केस कैसे दे दिया गया? कल्याण बनर्जी का कहना है कि उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी भी नहीं दी गई। बता दें कि हाल ही में टीएमसी ने काकोली घोष दस्तीदार को हटाकर कल्याण बनर्जी को ही चीफ व्हिप बनाया था।

 

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क्या बोले कल्याण बनर्जी?

इस बारे में विस्तार से बताते हुए कल्याण बनर्जी ने कहा है, 'यह एक क्रिमिनल रिमिशन है। पिछले शुक्रवार को यह मामला वैकेशन बेंच के सामने आया लेकिन इसे नहीं लिया गया। आखिरी वक्त में मैंने इस मामले का जिक्र किया कि यह बेहद अर्जेंट है। कोर्ट ने कहा कि यह केस कल लिया जाएगा। 12:30 बजे एक वकील आया और उसने मुझे बताया कि सर्च ऑपरेशन वाले मामले में एक दूसरी याचिका दायर की गई है। आप यह कैसे कर सकते हैं? जब मैं यह केस देख रहा हूं तो मुझसे सलाह क्यों नहीं ली?'

 

उन्होंने आगे कहा, 'पूरे दिन मुझे कोई जानकारी नहीं दी। मैं कल तैयारी कर रहा था कि 12:30 बजे मेरे बेटे के पास मैसेज आया कि कल्याण बनर्जी की जरूरत नहीं है। क्या यह सीनियर वकील की इज्जत करने का तरीका है? इन लोगों ने मेरे साथ जूनियर के तौर पर काम किया है। चाहे सब्यसाची बनर्जी हों या किशोर दत्ता। यह मेरा अपमान है। उनके (अभिषेक बनर्जी के) एरोगेंट एटीट्यूड ने पूरी पार्टी को बर्बाद कर दिया है। उन्हें यह समझना चाहिए। उनके बुरे बर्ताब ने ही सब खराब किया है। वह खुद को राजा समझते हैं। ऐसे में मेरे लिए काम कर पाना संभव नहीं है।

 

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अभिषेक बनर्जी को आड़े हाथ लेते हुए कल्याण बनर्जी ने कहा है, 'बिल्कुल यह भरोसे का मामला है। मैं ममता बनर्जी के साथ हूं लेकिन उन्हें फैसला करना होगा कि वह अभिषेक बनर्जी को रखेंगी या मुझे रखेंगी। पहले उन्हें फैसला लेना होगा। अगर वह कहती हैं कि वह अभिषेक बनर्जी के बिना पार्टी नहीं चला सकती हैं तो मैं इस पार्टी में नहीं रहूंगा।'

बता दें कि कल्याण बनर्जी सांसद होने के अलावा वरिष्ठ वकील भी हैं और लंबे समय से पार्टी से जुड़े मामले देखते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि उन्हें डस्टबिन ना समझा जाए। कल्याण बनर्जी ने फिर से कहा है कि वह इस समय भी ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं और रिस्क लेकर हर जगह जा रहे हैं लेकिन अभिषेक बनर्जी उनको कर्मचारी समझते हैं।