बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने कांशीराम के देहांत के बाद उत्तर प्रदेश में साल 2007 का विधानसभा चुनाव लड़ा था। इसमें BSP ने पूर्ण बहुमत की सरकार बना ली थी। BSP संगठन ने सोशल इंजीनियरिंग का फाॅमूला दलित, मुस्लिम और ब्राह्मणों के गठजोड़ के तहत काम कियाा था। साल 2012 के विधानसभा चुनाव के बाद से BSP का जनाधार गिरता चला गया। तब BSP को विधानसभा में 80 सीटें मिली। वर्ष 2014 के लोक सभा चुनाव में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई। 2017 के विधानसभा चुनाव में BSP 19 सीटों पर ही सिमट गई। 2019 में लोकसभा का चुनाव समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करके लड़ा और BSP ने 10 लोकसभा की सीटें जीती लेकिन जल्द ही यह गठबंधन टूट गया। 4022 के विधानसभा चुनाव में BSP एक सीट पर ही सिमट कर रह गई। 2024 का लोक सभा चुनाव BSP ने अकेले लड़ा और एक भी सांसद नहीं जिता पाई।

 

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यूपी में पहला ब्राह्मण प्रत्याशी किया घोषित

BSP प्रमुख आगामी विधानसभा चुनाव में पुरानी सोशल इंजीनियरिंग  दलित, मुस्लिम, ब्राह्मण के फाॅर्मूले से सत्ता हासिल करना चाहती है। काफी समय से मायावती ब्राह्मणों की उपेक्षा को लेकर सरकार का विरोध कर रही है। सपा के ब्राह्मण प्रेम को भी दिखावा बताया। उन्होंने यूपी में अगले वर्ष होने वाले चुनाव  में जनपद जालौन की माधौगढ़ सीट से आशीष पांडेय को पार्टी का पहला प्रत्याशी घोषित करके ब्राह्मणों को अपने पक्ष में लाने का दांव खेला।

 

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आठ बडे़ चेहरों को ब्राह्मणों को पक्ष में करने की कमान

BSP सुप्रीमों में आगामी विधानसभा चुनाव में ब्राह्मणों को पक्ष में करने के लिए पार्टी के सबसे बड़े चेहरे राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्रा, पूर्व मंत्री नकुल दुबे, हरिशंकर तिवारी के पुत्र विनय तिवारी, रवि मिश्रा, पवन पांडेय,  आशीष पांडेय, अनंत  मिश्रा अंटू, पूर्व सांसद रितेश पांडेय को लगाया है। इसके साथ ब्राह्मण भाईचारा कमेटी के वरिष्ठ पदाधिकारी भी जिलों में जाकर डेरा डालेंगे। वे जिला स्तर पर डोर टू डोर ब्राह्मणों से संपर्क करेंगे।

संगठन को मजबूत करने की कवायद

BSP सुप्रीमा ने आगामी विधानसभा चुनाव में संगठन को धार देने की कवायद तेज कर दी है। कोर वाटरों को साधने की जिम्मेदारी जिलाध्यक्षों को सौंपी गई है। प्रदेश संगठन के पदाधिकारियों को जिलेवार समीक्षा करने का फरमान सुनाया गया। प्रत्येक माह जिलों की प्रगति का जायजा भी लिया जाएगा।