पंजाब कांग्रेस में मचा घमासान फिलहाल शांत होता नजर आ रहा है। गुरुवार को पूर्व सीएम और कैंपेन कमेटी के चेयरमैन चरणजीत सिंह चन्नी ने दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से मुलाकात की। बैठक के बाद चन्नी ने कहा कि हम पार्टी के प्रति समर्पित हैं और पार्टी लाइन का पालन किया जाएगा। पंजाब कांग्रेस में मची खींचतान के बीच हाईकमान के साथ चन्नी की मुलाकात और उनका यह बयान संकेत दे रहा है कि फिलहाल चन्नी कोई बगावत नहीं करने वाले हैं। हालांकि, प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के बीच सियासी खींचतान आगे भी जारी रहने की संभावना है। 

 

कांग्रेस पार्टी ने भले ही इस समय मामला शांत करवा लिया हो लेकिन यह खींचतान चुनाव तक जारी रहेगी। फिलहाल हाईकमान को चन्नी और वडिंग के मामले में अंतिम फैसला लेना है। हालांकि, माना जा रहा है कि आलाकमान अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के मूड में बिल्कुल भी नहीं है। यानी राजा वडिंग प्रधान बने रहेंगे। 

 

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टिकट पर होगी महाभारत

कांग्रेस पार्टी में सीएम पद के लिए कई बड़े नाम शामिल हैं। जिन नामों की ज्यादा चर्चा होती है उन नामों में सबसे आगे चरनजीत सिंह चन्नी हैं, जिन्हें कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर सीएम बनाया गया था। 2022 विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें सीएम को चेहरा भी घोषित किया था। हालांकि, वह अपनी ही दोनों सीटों से चुनाव हार गए और कांग्रेस भी सिर्फ 18 सीटों पर सिमट कर रह गई। इसके अलावा 2022 में पार्टी की कमान संभालने वाले राजा वडिंग इस रेस में शामिल हैं। पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा  के अलावा सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा इस रेस में शामिल हैं। 

 

कांग्रेस के सामने एक बड़ा सवाल यह है कि इन में से किन नेताओं को पार्टी 2027 में विधानसभा चुनाव का टिकट दे। राजा वडिंग, सुखजिंदर रंधावा और चन्नी मौजूदा समय में लोकसभा के सदस्य हैं और ये तीनों सीएम की रेस में शामिल हैं। ऐसे में पार्टी के सामने इन तीनों नेताओं को एडजस्ट करना बड़ी चुनौती होगा। राजा वडिंग और रंधावा तो विधायकी छोड़कर लोकसभा चुनाव लड़े थे। ऐसे में यह दोनों नेता फिर से विधानसभा चुनाव में टिकट की मांग करेंगे। 

क्या केरल वाला मॉडल लागू होगा?

कांग्रेस पार्टी ने केरल में विधानसभा चुनाव से पहले ही सांसदों को साफ कह दिया था कि पार्टी किसी भी सासंद को विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं देगी। कांग्रेस पार्टी के संगठन महासचिव खुद टिकट के दावेदारों में शामिल थे लेकिन पार्टी ने उन्हें भी टिकट नहीं दिया। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कांग्रेस पंजाब में भी इस तरह का फैसला लेने की कोशिश कर सकती हे लेकिन यह पार्टी के लिए आसान नहीं होगा। सीएम की रेस में शामिल तीन नेताओं को चुनाव ना लड़वाना और उन्हें इस बात के लिए राजी करना काफी मुश्किल हो सकता है। 

 

पंजाब कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि ये तीनों नेता और एक अन्य सांसद विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। गिद्दड़बाहा (राजा वडिंग की सीट) जैसी सीट पर राजा वडिंग ने कब्जा किया था लेकिन बाद में उनकी पत्नी उपचुनाव में हार गई थी। इस सीट पर पार्टी एक बार फिर से अमरिंदर सिंह राजा वडिंग पर विश्वास जता सकती है। इसके अलावा सुखजिंदर रंधावा भी अपनी सीट पर चुनाव लड़ना चाहेंगे और इस सीट पर पार्टी को प्रत्याशी के लिए मंथन करना पड़ सकता है। 

 

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अपने गुट के लिए टिकटों की मार

कांग्रेस पार्टी की कलह नेताओं के खुद के टिकट तक ही सीमित नहीं है। बल्कि नेता अपने गुट के ज्यादा से ज्यादा विधायकों को टिकट दिलवाने की कोशिश करेंगे ताकि चुनाव बाद अगर सीएम बने तो उन्हें जरूरी विधायकों का साथ मिल सके। चन्नी की मीटिंग में कई पूर्व विधायक और हल्का इंचार्ज (जो विधानसभा चुनाव ल़ड़ चुके हैं) शामिल हुए थे। ये सभी टिकट की उम्मीद में हैं लेकिन राजा वडिंग इनके टिकट कटवाने की कोशिश करेंगे।

 

हल्का इंचार्ज कांग्रेस पार्टी में कोई संगठन का पद नहीं है, जबकि जिला अध्यक्षों का साथ राजा वड़िंग को मिला हुआ है। ऐसे में राजा उनके लिए टिकट की मांग करेंगे। यह लड़ाई कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। कांग्रेस अपने सांसदों को किस तरह से चुनाव में मैनेज करती है और नेताओं के गुटों में टिकट बांटती है या फिर आलाकमान खुद टिकट तय करती है इस पर पंजाब कांग्रेस का भविष्य टिका है। फिलहाल कुछ समय के लिए पार्टी एकजुटता दिखाने की कोशिश करने का प्लान बना रही है।