पंजाब कांग्रेस में लगातार घमासान जारी है। चरनजीत सिंह चन्नी का गुट आर-पार के मूड में नजर आ रहा है और लगातार राजा वडिंग को अध्यक्ष पद से हटाने की मांग कर रहा है। स्थित की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी भूपेश बघेल भी पंजाब के हर जिले में जाकर फीडबैक लेने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनके कार्यक्रमों भी चन्नी समर्थक हंगामा कर रहे हैं। पिछले कई दिनों से तमाम जिलों से इस तरह की तस्वीरें सामने आई। हालांकि, राजा वडिंग आश्वस्त नजर आए कि उनकी कुर्सी सुरक्षित है और वह कांग्रेस को एक रखने की बात करते नजर आए। लेकिन बीते कल उनके कुछ बयानों ने नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। 

 

बीते एक महीने से राजा वडिंग उनके खिलाफ जारी संघर्ष को खारिज करते नजर आ रहे थे। उनके करीबी लोगों का भी यही मानना था कि चन्नी का खेमा कुछ दिन विरोध करने के बाद शांत हो जाएगा लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है। अब राजा वडिंग के तेवर भी बदले हुए नजर आ रहे हैं। वह खुद की उपलब्धियां गिना रहे हैं, भावुक अपील कर रहे हैं और गुस्से में भी दिखाई दे रहे हैं। इससे पहले तक वह शांत और सधे हुए जवाब दे रहे थे। उनके इस व्यवहार को कुछ राजनीतिक जानकार बदलाव की आहट भी मान रहे हैं। 

 

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मुक्तसर में हुए भावुक

राजा वडिंग श्री मुक्तसर साहिब में कांग्रेस के कार्यक्रम के दौरान भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि आज मुझे यहां आकर शांति मिली है क्योंकि मैं अपने घर आ गया। उन्होंने कहा, 'सारे लोग आपके इस बेटे को पकड़कर मारना चाहते हैं। अकाली दल और बीजेपी तो हैं ही झाडू लेकिन कुछ अपने भी बेगाने हो गए। पर मैंने कोई गुनाह नहीं किया। मेरा गुनाह यह है कि चार साल जब 80 सीट हमारे पास  थी और हम 18 पर आ गए, तो क्या यह मेरा कसूर है। दो बार कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सरकार हरा दी और 80 से हम 18 पर आ गए।'

 

राजा वडिंग ने कांग्रेस को बुरे दिनों की याद दिलाई और बताया कि किस तरह से 2022 में कांग्रेस की बुरी हार हुई थी और चन्नी अपनी दो सीटों में से एक सीट पर भी जीत दर्ज नहीं कर सके थे। राजा वडिंग ने कहा, 'गिद्दड़बाहा वालों को सलाम इन्होंने मुझे 1 सीट जीता दी नहीं तो मालवे से एक सीट और कम हो जाती और कांग्रेस 17 सीटों पर आ जाती।'

 

इस्तीफे पर क्या बोले?

राजा वडिंग ने अब साफ शब्दों में कह दिया है कि वह इस्तीफा नहीं देने वाले हैं। एक पत्रकार ने उनसे सवाल किया कि क्या वह अपने विरोध को देखते हुए इस्तीफा देंगे। इस पर राजा वडिंग गुस्सा हो गए। उन्होंने कहा, 'चार हमने काम किया और 7 लोकसभा सीटें जीती। अगर मुझे हटा दिया तो मैं कांग्रेस को मजबूत करने के लिए काम करूंगा। अगर आपके चैनल में आपका विरोध हो तो क्या आप चैनल छोड़ देंगे?' पत्रकारों ने जब फिर से वही सवाल किया तो राजा वडिंग ने साफ शब्दों में कहा कि बिल्कुल इस्तीफा नहीं दूंगा।

 

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क्यों बदले तेवर?

राजा वडिंग के तेवर बदले-बदले नजर आ रहे हैं। अब वह कार्यकर्ताओं के बीच और पार्टी के मंच से लगातार अपनी सफलताएं गिना रहे हैं। मुक्तसर में उन्होंने भावुक होकर अपनी बात भी रखी। कुछ लोग इसे कुर्सी जाने की आहट भी मान रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजा वडिंग को अब कुर्सी जाने का खतरा सताने लगा है। ऐसे में उनके बयान और तेवर अब बदले हुए नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि राजा वडिंग कांग्रेस आलाकमान तक संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्होंने पार्टी के लिए बहुत संघर्ष किया है। 

 

चन्नी खेमा लगातार राजा वडिंग को हटाने की मांग कर रहा है। इसके बावजूद आलाकमान अब तक राजा वडिंग के साथ नजर आ रहा है लेकिन लगातार विरोध के बाद अब माना जा रहा है कि फैसले पर फिर से विचार किया जा सकता है। भूपेश बघेल 9 अगस्त को दिल्ली में आलाकमान को रिपोर्ट सौंप सकते हैं।