उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को एक बड़ा झटका लगा है। 6 बार के पूर्व मंत्री राम आसरे कुशवाहा ने गुरूवार को बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्या ली। इस दौरान अन्य पार्टियों से आए कुछ नेताओं ने भी समाजवादी पार्टी की सदस्या ली। राम आसरे कुशवाहा ने इस दौरान अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प लिया।
राम आसरे कुशवाहा उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक जाने-माने ओबीसी नेता हैं। कुशवाहा समाज में उनकी पकड़ मजबूत है जिसके कारण वह कई बार मंत्री पद तक भी पहुंचे। 13 साल पहले मुलायम सिंह यादव के साथ मतभेद के कारण उन्होंने समाजवादी पार्टी से रिश्ता तोड़ लिया था लेकिन अब 13 साल बाद वह अखिलेश की अध्यक्षता में एक बार फिर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं।
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क्या बोले राम आसरे कुशवाहा?
समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद राम आसरे कुशवाहा ने कहा कि उन्हें आज भी महसूस होता है कि नेताजी उनके बीच मौजूद हैं। उन्होंने कहा, 'अखिलेश यादव को भी वही पदवी और सम्मान मिलना चाहिए। जहां सम्मान होगा, वहीं कुछ मिलेगा। जहां सम्मान नहीं होगा, वहां कुछ नहीं मिलेगा, चाहे राजनीति हो, रिश्तेदारी हो या व्यवसाय।' उन्होने अपने समर्थकों से शपथ लेने के लिए कहा कि जब तक अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री नहीं बनाएंगे तब तक घर नहीं बैठेंगे।
अखिलेश यादव ने किया स्वागत
राम आसरे कुशवाहा के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी, निषाद पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल से कई नेता समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। अखिलेश यादव ने इन सभी लोगों का पार्टी में स्वागत किया। उन्होंने इस मौके पर कहा कि आज हम भगवान विश्वकर्मा जी को भी याद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह विश्वकर्मा जयंती पर छुट्टी होती थी, उसी तरह समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर फिर से विश्वकर्मा जयंती पर दोबारा छुट्टी कराई जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने रिवर फ्रंट पर भगवान विश्वकर्मा के भव्य और आधुनिक मंदिर का निर्माण करवाने का भी वादा किया।
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राम आसरे का राजनीतिक सफर
राम आसरे उत्तर प्रदेश की सियासत में ओबीसी वर्ग का एक बड़ा चेहरा हैं। उन्होंने अपना राजनीतिक सफर बहुजन समाजवादी पार्टी से शुरू किया था। पहली बार साल 1996 में वह बीएसपी के टिकट पर ही विधायक चुने गए थे। इसके बाद वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए और पार्टी में उन्हें कई अहम जिम्मेदारी मिली। वह मुलायम सिंह के करीबी नेताओं में गिने जाते थे और उन्हें राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी भी दी गई थी। इसके साथ ही उन्हें कैबिनेट मंत्री के बराबर का दर्जा भी दिया गया था। हालांकि, उनकी बयानबाजी के कारण पार्टी ने उन्हें अहम पदों से हटा दिया था। उन्होंने मुजफ्परपुर दंगों को लेकर पार्टी से अलग रुख रखा था। बाद में उन्होंने समाजवादी पार्टी छोड़ दी। इसके हाद वह बीजेपी में शामिल हुए और अब 13 साल बाद फिर से समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं।
