तृणमूल कांग्रेस टूट चुकी है। उसके 80 में से 60 विधायक बगावत करके पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का साथ छोड़ने का एलान कर चुके हैं। अपना वजूद बचाने की चुनौती से जूझ रही टीएमसी इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी का हाथ बता रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जो पार्टी और उसकी मुखिया 15 साल लगातार सत्ता में रही हैं, एकदम से ऐसी बगावत करने पर क्यों उतारू हो गए हैं?

 

साथ ही बंगाल चुनाव में मिली हार के बाद विधायकों के बगावत करने की आखिर वजह क्या है। इस बगावत का खुलासा भी पार्टी से निष्कासित विधायक संदीपन साहा ने गुरुवार को कर दिया। संदीपन साहा वही विधायक हैं, जिनको पिछले दिनों ऋतब्रत बनर्जी के साथ में टीएमसी ने पार्टी से निकाल दिया था।

कैसे हुई पार्टी में बगावत?

विधायक संदीपन साहा ने बताया कि टीएमसी में औपचारिक तौर पर बगावत की नींव चुनाव नतीजे आने के बाद छह मई को हुई पार्टी बैठक में पड़ी थी। इस दिन संदीपन ने टीएमसी की आंतरिक कार्यप्रणाली और नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम का 'ट्रिगर पॉइंट' पार्टी की चुनावी हार के बाद आया। उन्होंने कहा कि जब वे पार्टी की बैठक में शामिल हुए, तो सभी विधायकों को एक निर्देश जारी किया गया कि अभिषेक बनर्जी के बारे में कोई भी आलोचनात्मक शब्द का इस्तेमाल ना करे।

 

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अभिषेक बनर्जी बने कारण

संदीपन ने बताया, 'इसके बजाय, उन्हें निर्देश दिया गया कि अभिषेक बनर्जी ने असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन किया है और सभी को खड़े होकर तालियां बजानी होंगी। इसमें ऐसे विधायक भी शामिल थे जो तब से विधानसभा में सेवा कर रहे थे, जब अभिषेक बनर्जी स्कूल में पढ़ रहे थे। उन्हें भी खड़े होकर तालियां बजाने के लिए मजबूर किया गया।'

सामने आए खुद 60 बागी विधायक

उन्होंने कहा, 'स्वाभाविक रूप से ऐसी घटना मन में असहजता पैदा करती है। आज जब लोगों को इस रवैये को खारिज करने का मौका मिला है, तो वे ठीक वही कर रहे हैं।' साहा ने पार्टी के 60 बागी विधायकों के मुद्दे पर कहा कि कुछ ऐसे विधायक भी थे, जो विपक्ष के नेता (एलओपी) के चयन के समय मौजूद नहीं थे, लेकिन उनके नाम बड़े अक्षरों में दर्ज कर दिए गए।

 

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इसलिए बनाया अलग ग्रुप

संदीपन साहा ने कहा, 'अगर इसे नैतिकता के नजरिए से देखा जाए, तो सवाल उठता है कि जब आपके पास पहले से ही जरूरी संख्या थी, तब भी आपने इस तरह की प्रक्रिया क्यों अपनाई। इससे हम सभी के मन में संदेह पैदा हुआ।' उन्होंने बताया कि जब उन्होंने और सहयोगियों ने इस पर आपत्ति जताई, तो विधानसभा अध्यक्ष को एक औपचारिक पत्र सौंपा गया। इसके बाद अध्यक्ष ने मामले की जांच के आदेश दिए।

 

विधायक ने कहा, 'जैसे ही जांच शुरू हुई, ऐसे सबूत सामने आने लगे जो इन आरोपों की पुष्टि करते थे। इसके बाद अन्य विधायक भी हमसे संपर्क करने लगे।' उन्होंने कहा कि आपसी चर्चा के बाद बागी विधायकों ने यह निष्कर्ष निकाला कि अगर उन्हें विधानसभा के भीतर प्रभावी ढंग से अपनी जिम्मेदारियां निभानी हैं और अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लोगों की सेवा करनी है, तो उन्हें एक अलग समूह बनाना होगा।