उत्तर प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के बीच प्रदेश मुख्यालय में हुई मारपीट और जूते-चप्पल चलने की घटना ने पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और महिला कांग्रेस की नेत्री एवं पार्षद ममता चौधरी से जुड़े विवाद के बाद अब पार्टी नेतृत्व ने मामले की जांच कराने का फैसला किया है। प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बृजलाल खाबरी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपनी है और मंगलवार, 13 अक्टूबर से जांच की प्रक्रिया आगे बढ़नी है। जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है।

 

इस पूरे घटनाक्रम में अजय राय और ममता चौधरी की भूमिका, समर्थकों के आचरण और पार्टी के भीतर अनुशासन को लेकर उठे सवाल अहम हो गए हैं। साथ ही, नियमित अनुशासन समिति के बजाय अलग जांच समिति गठित किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर हैं, जिससे विवाद की जिम्मेदारी तय होने और संबंधित नेताओं व कार्यकर्ताओं के खिलाफ संभावित कार्रवाई की तस्वीर साफ हो सकती है। 

 

प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में रविवार, 11 अक्टूबर को नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद के पदभार ग्रहण का कार्यक्रम था। कांग्रेस की परंपरा के अनुसार निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को नए प्रदेश अध्यक्ष को कार्यभार सौंपना था। कार्यक्रम के दौरान अजय राय और उनके समर्थक प्रदेश अध्यक्ष के कक्ष की ओर बढ़ रहे थे, जबकि आराधना मिश्रा महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित करने चली गईं। इसी दौरान महिला कांग्रेस की नेत्री एवं पार्षद ममता चौधरी और अजय राय के बीच कहासुनी हो गई। विवाद बढ़ने पर धक्का-मुक्की और गाली-गलौज की स्थिति बनी।

 

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अजय राय के समर्थक बताए जा रहे अमित और संदीप ने ममता चौधरी पर जूते से हमला किया। इसके बाद मौके पर जूते-चप्पल चलने लगे। घटना के दौरान कांग्रेस कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई। बाद में राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद सहित अन्य नेताओं ने हस्तक्षेप कर स्थिति संभालने की कोशिश की। प्रदेश मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच इस तरह का टकराव सामने आने से कांग्रेस को राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। 

बृजलाल खाबरी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित

प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने मामले की विस्तृत जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बृजलाल खाबरी को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। उनके अलावा उत्तर प्रदेश कांग्रेस के सह-प्रभारी अभिषेक दत्त और अब्दुल हन्नान, पूर्व सांसद रवि वर्मा तथा महिला कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शमीना शफीक को सदस्य बनाया गया है।


समिति का दायित्व पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट करना और अपनी रिपोर्ट नेतृत्व को सौंपना है। रिपोर्ट के लिए एक सप्ताह की समयसीमा तय की गई है। समिति की जांच में विवाद की शुरुआत, दोनों पक्षों के बीच हुई कहासुनी, धक्का-मुक्की और मारपीट में शामिल लोगों की भूमिका जैसे पहलू महत्वपूर्ण होंगे। प्रदेश प्रभारी की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

 

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अनुशासन समिति को मामला न सौंपने पर उठे सवाल

इस पूरे प्रकरण में जांच समिति के गठन को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चा है। प्रदेश कांग्रेस में अनुशासन संबंधी मामलों की जांच के लिए पूर्व विधायक श्याम किशोर शुक्ला के नेतृत्व में अनुशासन समिति गठित होने की जानकारी सामने आई है।  उस समय समिति में अध्यक्ष के अलावा अन्य सदस्य नहीं थे। ऐसे में मारपीट के मामले की जांच के लिए अलग पांच सदस्यीय समिति बनाए जाने और श्याम किशोर शुक्ला को उसमें शामिल नहीं किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।

 

पार्टी के भीतर यह चर्चा भी है कि जब मामला अनुशासनहीनता से जुड़ा है तो इसे नियमित अनुशासन समिति के माध्यम से क्यों नहीं निपटाया गया। इसके अलावा जांच समिति में दो सह-प्रभारियों को शामिल किए जाने पर भी चर्चा है। इन सवालों के बीच प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के बीच पहले से मतभेद होने की खबरें भी सामने आई हैं। प्रदेश अध्यक्ष के बदलाव में प्रदेश प्रभारी की सिफारिश की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हैं। 

अजय राय और ममता चौधरी के भविष्य पर टिकी निगाहें

मारपीट की घटना के बाद अजय राय और ममता चौधरी से जुड़े विवाद पर पार्टी के भीतर चर्चा तेज है। अजय राय  घटना के बाद वह अपने क्षेत्र वाराणसी चले गए हैं और पार्टी का काम कर रहे हैं। उन्होंने जांच समिति और घटना को लेकर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की। दूसरी ओर, ममता चौधरी की ओर से भी विवाद के बाद दुर्व्यवहार और अभद्र भाषा के आरोप लगाए जाने की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने अपने साथ हुए व्यवहार को लेकर आपत्ति जताई और कार्रवाई की मांग की है।

 

इन आरोपों की स्वतंत्र जांच जरूरी है और इन्हें जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।अब सवाल यह है कि जांच समिति की रिपोर्ट में किन लोगों की भूमिका सामने आती है और कांग्रेस नेतृत्व उनके खिलाफ क्या कार्रवाई करता है। यदि किसी कार्यकर्ता की भूमिका मारपीट में साबित होती है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं, अजय राय और ममता चौधरी के मामले में पार्टी का रुख भी जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगा। 

प्रदेश नेतृत्व परिवर्तन के बीच सामने आया संगठनात्मक संकट

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया चल रही है। आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष और इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद संगठन के सामने नई टीम के साथ तालमेल स्थापित करने की चुनौती है। निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के पदभार हस्तांतरण के दौरान हुआ विवाद पार्टी के लिए असहज स्थिति बन गया है।

 

प्रदेश मुख्यालय में हुई घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि संगठन में अनुशासन और आपसी समन्वय को किस तरह मजबूत किया जाए। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को प्रदेश में अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ानी हैं। ऐसे में वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच सार्वजनिक टकराव संगठन की छवि और एकजुटता को प्रभावित कर सकता है। जांच समिति की रिपोर्ट से न केवल घटना की जिम्मेदारी तय होने की उम्मीद है, बल्कि पार्टी के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई की दिशा भी स्पष्ट हो सकती है।

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अब जांच रिपोर्ट का इंतजार

प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में हुई मारपीट की घटना अब पांच सदस्यीय जांच समिति के सामने है। बृजलाल खाबरी की अध्यक्षता वाली समिति को एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपनी है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और संबंधित लोगों के पक्ष के आधार पर ही जिम्मेदारी तय होगी। इसके बाद पार्टी नेतृत्व दोषियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर फैसला ले सकता है।दूसरी ओर, अनुशासन समिति को अलग रखकर नई जांच समिति गठित किए जाने पर उठ रहे सवाल भी पार्टी के भीतर चर्चा का विषय बने हुए हैं। ऐसे में इस मामले की रिपोर्ट केवल मारपीट की घटना तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उससे कांग्रेस संगठन में अनुशासन, नेतृत्व के बीच तालमेल और विवादों से निपटने के तरीके पर भी नजरें रहेंगी। फिलहाल अजय राय, ममता चौधरी और विवाद में शामिल अन्य लोगों के संबंध में किसी अंतिम कार्रवाई की घोषणा नहीं हुई है। अब देखना होगा कि जांच समिति किन तथ्यों को सामने लाती है और कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाता है।